साहिबाबाद, 21 अप्रैल । जिले में गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं,
लेकिन जो लोग इसके लिए जिम्मेदार है
, उनके प्रति सरकारी सिस्टम ने खामोशी अख्तियार कर ली है। यही वजह
है कि हर साल भूमिगत जल स्तर नीचे गिर जाता है।
शहर में चल रहे 400 से ज्यादा पानी के अवैध प्लांट
संचालक न केवल भूमि की कोख को खाली कर रहे हैं
बल्कि अशुद्ध पानी से लोगों की सेहत के साथ खेल रहे हैं।
नगर निगम और जीडीए द्वारा पानी देने की लचर व नाकाम व्यवस्था पूरे काले कारोबार के लिए जिम्मेदार है।
अवैध प्लांटों में भूजल का दोहन कर लाखों लीटर पानी ट्रीट कर आधा-अधूरा शुद्ध बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में
निकलने वाला लाखों लीटर दूषित पानी नालियों में बहा दिया जाता है।
पानी की आपूर्ति न होने पर शहर के लाखों
लोगों की जेब ढीली हो रही है। लोग बोतलबंद पानी खरीदकर पीने के लिए मजबूर हैं।
निगम जल कर तो वसूल
रहा है लेकिन पानी देने में नाकाम है।
पिछले तीन दिन वसुंधरा, राजेंद्र नगर, शहीदनगर, वैशाली कौशांबी सहित
शहर के अन्य इलाकों में गंगाजल की आपूर्ति में समस्या बनी हुई है।
यह समस्या आए दिन बनी रहती है। यही
वजह कि लोगों को पानी माफियाओं से अशुद्ध पानी लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी ने कहा कि पानी का छोटा प्लांट लगाने में डेढ़ से दो लाख रुपये खर्च
होते हैं। यह प्लांट एक घंटे में करीब पांच सौ लीटर साफ पानी तैयार करता है।
इस तरह 24 घंटे में 12 हजार
लीटर पानी तैयार हो जाता है।
प्लांट से निकले एक बोतल (20 लीटर का जार) की कीमत यदि 25 से 30 रुपये
है। एक दिन में करीब 15 हजार रुपये का पानी बिक जाता है
। इस तरह 400 प्लांट से प्रतिदिन 60 लाख रुपये का
पानी बेचा जा रहा है।
अवैध रूप से चल रहे पानी के प्लांट पर कार्रवाई खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की जाती है।
शिकायत मिलने पर तुरंत ही पानी की आपूर्ति को सुचारू कर दिया जाता है।

