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लखनऊ बदायूं योगी जी के शासन में एक ओर प्रदेश से गुंडे,बदमाश,चोर उचक्के, माफिया आदि प्रदेश छोड़कर अन्य प्रांतों में जाकर शरण ले रहे हैं

या फिर थानों में जाकर अपने आप को सरेंडर कर जेल जा रहे हैं,मगर बदायूं जनपद की तहसील सहसवान में योगी जी की सख्ती का असर भू माफियाओं में देखने को नहीं मिल पा रहा है

क्यूं कि उन पर सफेद पोश नेताओं की कृपा जो बनी हुई है,

जानकारी के अनुसार आपको बताते चलें की सहसवान में करोड़ों रुपए की शत्रु संपत्ति, संख्या 230 स्थित ज़ाहिद पुर आलम पुर की मूल स्वामिनी शमशुल निशा पत्नी अय्यूब खान,और अमीर अहमद खां, देश के विभाजन के समय भारत को छोड़ पाकिस्तान की नागरिकता प्राप्त कर चुके थे,

वहीं एक पत्र जिलाधिकारी बदायूं को उपरोक्त शत्रु संपत्ति के लिए भारत सरकार के अधीन अधिग्रहण किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र सौंपा गया था

जिसको माफियाओं और तहसील कर्मचारियों की संलिप्तता के चलते मामला रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया,
सूत्रों से मिली

जानकारी के अनुसार सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ से एक पत्र पत्रांक संख्या 171/8/ निoसo/02-2019 दिनांकित 5 अक्टूबर 2020 को जिलाधिकारी बदायूं को भेजा गया जिसमें उपरोक्त विवादित संपत्ति का जांच

कराकर निस्तारण किया जाए।मगर तत्कालीन जिलाधिकारी प्रशांत किशोर का स्थानांतरण हो जाने के कारण उक्त विवादित भूमि की जांच अधर में लटक गई

और इसका बहुत बड़ा फायदा भू माफियाओं ने तहसील स्टाफ के साथ मिलकर भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर प्लाटिंग कर के विक्रय करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया, वहीं सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है

कि उक्त शत्रु संपत्ति के संबंध में मंडलायुक्त बरेली मंडल बरेली के यहां भी एक वाद दर्ज किया जा चुका है, उपरोक्त भूमि में माननीय सीजेएम न्यायालय बदायूं के आदेशानुसार कमीशन भी हुआ

, और तो और इसकी शिकायत गृह मंत्रालय भारत सरकार दिल्ली ,को भी भेजी जा चुकी है,मगर भू माफियाओं के हाथ इतने लंबे होने के कारण अभी तक इस शत्रु संपत्ति के विरुद्ध स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई भी ठोस कार्यवाही अमल में नहीं

लाई जा सकी है, आज भी उक्त संपत्ति पर निर्माण कार्य चल रहा है।वहीं अब नगर वासियों की निगाहें प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ पर टिकी हुई हैं

कि अब तो बाबा जी ही इस भूमि को कब्जा मुक्त कराएंगे और बुल्डोजर चलाकर भू माफियाओं के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही भी अमल में लाई जाएगी।