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लखनऊ, 26 मई उत्तर प्रदेश विधानसभा सत्र के चौथे दिन बृहस्पतिवार को महंगाई के मामले पर चर्चा
कराने की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया और सरकार विरोधी नारे
लगाए।

विधानसभा में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य मनोज कुमार पांडेय और राकेश प्रताप सिंह ने नियम-56
(तात्कालिक विषयों पर सदन की कार्यवाही रोककर चर्चा कराना) के तहत महंगाई के मुद्दे पर चर्चा कराये जाने की

मांग की। पांडेय ने कहा कि आज पूरा सदन इस बात से सहमत होगा कि लगातार बढ़ रही महंगाई से प्रदेश का
गरीब व्यक्ति बड़े संकट में गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से महंगाई बढ़ रही है ऐसे में अगर सरकार

ने उसे नियंत्रित नहीं किया तो हालात खराब होंगे, लोग आत्महत्या करेंगे और पलायन को मजबूर होंगे।

गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने ग्राहृता पर चर्चा करते हुए कहा कि महंगाई का संबंध मुख्यतः केंद्र
सरकार से होता है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारों की चर्चा करते हुए कहा कि पूरे संसार में अकेला
भारत ऐसा देश है,

जहां कोविड महामारी में भी भूख से एक आदमी नहीं मरा।
नोक झोंक शुरू हुई तो मंत्री ने चुनौती दी,

‘‘भूख से मरने का एक उदाहरण दे दीजिए, मैं जांच करा लूंगा। जिस
देश में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है क्या वहां कोई भूख से मरेगा।’’

इस बीच सपा के एक सदस्य ने मंत्री के बयान को झूठ करार दिया,

जिस पर वह नाराज हो गये। संसदीय कार्य
मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यह आपत्तिजनक शब्द है और इसे कार्यवाही से निकाल दीजिए।

मामले को लेकर सत्ता

पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच नोकझोंक तेज हो गई तो सपा के मनोज पांडेय ने कहा, ‘‘हम सदन से बहिर्गमन
करते हैं।’’ इसके बाद सपा सदस्यों ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बहिर्गमन किया।

सपा सदस्यों के बहिर्गमन के बाद अभी इसी मामले पर सुरेश खन्ना सदन में बोल ही रहे थे कि सपा सदस्य वापस
लौट आए।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने संसदीय कार्य मंत्री खन्ना के अनुरोध पर सपा सदस्यों की मांग
अग्राह्य कर दी।