नई दिल्ली, 05 जून। सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया लि. (सीआईएल) की कैप्टिव बिजली संयंत्रों
(सीपीपी या खुद के इस्तेमाल वाले) और सीमेंट जैसे क्षेत्रों को कोयले की आपूर्ति मई में पिछले साल के समान
महीने की तुलना में घटी है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सीपीपी को कोयले की आपूर्ति मई
में 39.74 प्रतिशत घटी है।
वहीं सीमेंट क्षेत्र को आपूर्ति में 16.74 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी तरह स्पॉन्ज
क्षेत्र को कोल इंडिया की आपूर्ति 8.74 प्रतिशत कम रही है। हालांकि, मई में इस्पात क्षेत्र को कोल इंडिया की
आपूर्ति 67.83 प्रतिशत बढ़ी है। वहीं बिजली क्षेत्र को भी आपूर्ति 19.48 प्रतिशत बढ़ी है। गैर-नियमन वाले क्षेत्रों को
कोयले की आपूर्ति घटने के बीच उद्योग निकायों से इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की
है। उनका कहना है कि उद्योगों को बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए एक्सचेंजों से ऊंची दर पर बिजली खरीदनी पड़
रही है।
विनिर्माण क्षेत्र, एमएसएमई और सीपीपी आधारित उद्योगों ने 10 उद्योग संघों के समूह के जरिये इस बारे
में प्रधानमंत्री को संयुक्त रूप से ज्ञापन दिया है।
इसमें कहा गया है कि सीपीपी, इस्पात, सीमेंट और स्पॉन्ज
आयरन क्षेत्र को कोयले की आपूर्ति चालू वित्त वर्ष में करीब 32 प्रतिशत घट गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि
कोयले की कमी की वजह से कई उद्योगों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है
और कुछ अन्य बंदी के कगार पर हैं।
उद्योग संघों ने कहा कि इस संकट की वजह से विनिर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है जिसका अंतत:
असर आम आदमी पर पड़ेगा।

