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नई दिल्ली, 17 जून नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने
पूछताछ को लेकर तीन दिन की मोहलत दी है।

दरअसल, राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की सेहत का
हवाला देते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी से मोहलत की मांग की थी,

जिसे ईडी ने स्वीकार कर लिया है। अब जांच
एजेंसी राहुल से सोमवार को पूछताछ करेगी।

सोनिया की सांस नली में हुआ फंगल इन्फेक्शन
सोनिया गांधी को सांस नली के निचले हिस्से में फंगल इन्फेक्शन हो गया है,

जिसके कारण गुरुवार को उनकी
हालत बिगड़ गई थी। बता दें कि राहुल को गुरुवार के ब्रेक के बाद शुक्रवार को ईडी के दफ्तर पहुंचना था, लेकिन

सोनिया गांधी की खराब तबीयत के कारण उन्होंने पूछताछ पोस्टपोन करने कहा था। अब ईडी राहुल गांधी को
सोमवार को पूछताछ के लिए आने के संबंध में नया समन जारी करेगी।

ईडी ने सोनिया को भी तलब किया
ईडी ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को 23 जून को पूछताछ के लिए समन भेजा है

। इससे पहले 8
जून को पूछताछ के लिए समन किया था,

लेकिन 1 जून को वे कोरोना पॉजटिव हो गई थीं। जिसकी वजह से वे

ईडी के सामने पेश नहीं हो पाईं। वहीं रविवार को संक्रमण के चलते सोनिया की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के
सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
नेशनल हेराल्ड का मामला 2012 में चर्चा में आया था।

तब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में
याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि कुछ कांग्रेसी नेताओं ने गलत तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड (वाईआईएल)

के जरिए एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। स्वामी ने आरोप लगाया था कि यह सब कुछ
दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 2000 करोड़ रुपए की बिल्डिंग पर कब्जा करने के

लिए किया गया। साजिश के तहत यंग इंडियन लिमिटेड को टीजेएल की संपत्ति का अधिकार दिया गया है।
एजेएल का गठन

देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल
का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब एजेएल के

अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड, हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। 90 के
दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे।

साल 2008 तक एजेएल पर 90 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया।
तब एजेएल ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा।

अखबारों का प्रकाशन बंद करने
के बाद एजेएल प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।