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लखनऊ बदायूं उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने सुनाया शिक्षकों के हक में फैसला शिक्षकों को गृह जनपदों में दिया तैनाती का आदेश ,
इसी क्रम में स्थानान्तरित शिक्षकों को बदायूं जनपद की तहसील सहसवान में न्याय पंचायत रसूलपुर बेला ने भावपूर्ण विदाई दी ,
68 हज़ार पांच सौ भर्ती से संबंधित कुछ शिक्षक अपने जनपद में पोस्टिंग के लिए एक लंबे समय से संघर्षरत थे जिसका वाद माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लंबित चला आ रहा था जो कि माननीय उच्च न्यायालय ने याचीगण उच्च
न्यायालय इलाहाबाद ने फैसला देते हुए शिक्षकों को उनके गृह जनपद में तैनाती का आदेश दिया जिसको लेकर शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी और अपने गृह जनपदों में स्थानांतरण न होने का गम सालता रहता था जिसको माननीय
न्यायालय ने दूर कर दिया खंड विकास सहसवान से 25 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके चयनित स्थान पर किया गया जिसको लेकर न्याय पंचायत रसूलपुर बेला के शिक्षकों ने सहसवान से स्थानांतरित रविकान्त यादव, विवेक तौमर, त्रिदेव
कुमार, प्रवीण कुमार,और राम दत्त वर्मा को गले में अंग वस्त्र डाल कर भावपूर्ण विदाई दी और सभी ने एक दूसरे को मीठा खिलाया,
इस अवसर पर वरिष्ठ ए आर पी ओमप्रकाश,जमील अहमद तथा संकुल शिक्षक इकबाल अहमद,अजीत सिंह नरेश पाल आदि ने अपने संबोधन में स्थानांतरित शिक्षकों से कहा कि जिस प्रकार से आपने अब तक पूरी निष्ठा से कार्य किया है उसी
प्रकार आप जहाँ भी रहें , शिक्षा विभाग और समाज की उम्मीदों पर खरा उतरने का काम करेंगे उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक सिर्फ शिक्षक ही नहीं होता है वोह देश के भविष्य का निर्माण विद्यार्थी के रूप में करता है और विद्यार्थी का एक
अच्छे पिता का भी दायित्व निभाने का काम करता है श्री इकबाल ने कहा कि हम शिक्षकों के सामने चुनौतियां बड़ी होती हैं मगर हम अपने विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण में अपना योगदान ईमानदारी के साथ देने का काम करते हैं उसका
परिणाम यह होता है की बड़े होकर वो ही विद्यार्थी एक चपरासी से लेकर आई ए एस, आई पी एस ,देश के प्रधान मंत्री तक का सफर तय करता है इस लिए हम शिक्षकों को अपने कार्य में पूरी निष्ठा ईमानदारी के साथ अभिभावकों की नजर
में खरा उतरना ही हमारा मेडल है पुरुष्कार है, वहीं उपस्थित सभी शिक्षकों ने उन्हें उनके गृह जनपदों में जाने की बधाई दी ,
इस मौके पर स्थानांतरित शिक्षकों के चेहरों पर ख़ुशी छलकती हुई देखी जा सकती थी वहीं स्थानांतरित हुए शिक्षकों के चेहरे पर खुशी थी तो कहीं अपने अच्छे साथियों से बिछड़ने का गम भी देखा जा सकता था ।

