-प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड की तरक्की का एक्सप्रेस-वे किया शुरू
जालौन (उत्तर प्रदेश), 16 जुलाई ( प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मतदाताओं को लुभाने के लिये जनता में
मुफ्त की सौगात बांटने को देश के लिये घातक बताते हुए कहा है कि देश में मुफ्त की रेवड़ी बांट कर वोट बटोरने
की परिपाटी पनप रही है, ये ‘रेवड़ी कल्चर’ देश के लिये घातक है और सभी को मिलकर इस ‘रेवड़ी कल्चर’ को
राजनीति से हटाना है। मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का यहां कैथेरी गांव में लोकार्पण
करने के बाद अपने संबोधन में देशवासियों को आगाह किया कि मुफ्त की वस्तुयें बांटकर वोट बटोरने वाली
राजनीति से बहुत सावधान रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने यहां विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा,
“हमारे देश में मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने का कल्चर लाने की कोशिश हो रही है। ये रेवड़ी कल्चर देश के
विकास के लिए बहुत घातक है। इस रेवड़ी कल्चर से देश के लोगों को बहुत सावधान रहना है।”
मोदी ने लोगों से इस परिपाटी को मिटाने का आह्वान करते हुए कहा, “रेवड़ी कल्चर वाले कभी आपके लिए नए
एक्सप्रेसवे नहीं बनाएंगे, नए एयरपोर्ट या डिफेंस कॉरिडोर नहीं बनाएंगे। रेवड़ी कल्चर वालों को लगता है कि जनता
जनार्दन को मुफ्त की रेवड़ी बांटकर, उन्हें खरीद लेंगे। हमें मिलकर उनकी इस सोच को हराना है, रेवड़ी कल्चर को
देश की राजनीति से हटाना है।” उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार मुफ्त की रेवड़ी बांटने का
शॉर्टकट नहीं अपना रही, बल्कि मेहनत करके राज्य के भविष्य को बेहतर बनाने में जुटी है। इससे पहले प्रधानमंत्री
मोदी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक और केन्द्रीय मंत्री
भानु प्रताप वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का लोकार्पण किया। मोदी ने
कहा कि यह एक्सप्रेस वे बुंदेलखंड को विकास आैर स्वरोजगार से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि पहले यह माना जाता
था कि बेहतर सड़कों का लाभ सिर्फ बड़े शहरों को ही मिलता है, लेकिन अब सरकार बदली है तो मिजाज भी बदला
है। अब छोटे शहरों को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है
और सही मायने में यही सबका साथ सबका विकास
और सबका विश्वास है।
इस अवसर पर योगी ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, “बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड के विकास का जीवंत प्रमाण
है। यह एक्सप्रेसवे क्षेत्र को नई पहचान दिलाकर यहां औद्योगिक निवेश को आमंत्रित करने का नया माध्यम
बनेगा।” उन्होंने कहा कि ‘बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे’ एवं ‘इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ के निर्माण से प्रदेश में रोजगार के अवसर
सृजित होंगे। यह एक्सप्रेस-वे उ.प्र. के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। गौरतलब है कि मोदी ने फरवरी
2020 में 14,850 करोड़ रुपए की लागत से बने चार लेन वाले बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे का चित्रकूट में शिलान्यास
किया था।
इसका आज उद्घाटन होने से बुंदेलखंड के सात जिले चित्रकूट से इटावा तक, एक्सप्रेस वे के माध्यम से
दिल्ली और लखनऊ से सीधे जुड़ गये हैं।
दिल्ली और लखनऊ से सीधे जोड़ने वाले 296 किमी लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के जरिये दिल्ली से चित्रकूट तक की
630 किमी की दूरी तेज गति से फर्राटा भर कर तय की जा सकेगी। वैश्विक महामारी कोरोना के बावजूद बुंदेलखंड
एक्सप्रेस वे निर्माण की अनुमानित अवधि से आठ महीने पहले बनकर तैयार हो गया है। इसे 28 माह में बना
लिया गया है। उप्र सरकार का दावा है कि इसे अनुमानित लागत से करीब 12.72 प्रतिशत कम कीमत में बना
लिया गया है। इससे सरकारी खजाने को 1132 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। विभिन्न एक्सप्रेस वे के जरिये दिल्ली
से चित्रकूट तक की 630 किमी की दूरी को पूरा करने में बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की हिस्सेदारी 296 किमी रहेगी।
जबकि, डीएनडी फ्लाईवे नौ किमी, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे 24 किमी, यमुना एक्सप्रेस वे 165 किमी और
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे 135 किमी की हिस्सेदारी निभायेंगे।
बुंदलेखंड एक्सप्रेस वे लोगों को दिल्ली सहित अन्य राज्यों से भी जोड़ेगा। इससे चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर,
जालौन, औरैया और इटावा जिलों के लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। सरकार का कहना है कि बुंदेलखंड
एक्सप्रेस वे इस इलाके की कनेक्टिविटी में सुधार के साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा। बांदा और जालाैन में
एक्सप्रेस वे के किनारे औद्योगिक कारिडोर भी बनाया जा रहा है। इसके लिए सलाहकार एजेंसी का चयन हो चुका
है। उद्योग लगने से लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिलेगा। एक्सप्रेस वे के आरओडब्ल्यू के तहत लगभग
सात लाख पौधे रोपे जा रहे हैं। यह एक्सप्रेस वे चार लेन की चौड़ाई वाला है। एक्सप्रेसवे पर प्रवेश और निकासी के
लिए 13 स्थानों पर इंटरचेंज सुविधा दी गई है। परियोजना के आस-पास के गांव के निवासियों को सुगम आवागमन
की सुविधा के लिए सर्विस रोड का निर्माण किया गया है। एक्सप्रेसवे पर चार रेलवे ओवर ब्रिज, 14 दीर्घ सेतु, छह
टोल प्लाजा, सात रैम्प प्लाजा, 293 लघु सेतु, 19 फ्लाई ओवर और 224 अण्डरपास का निर्माण किया गया है।
जानें 296 किलोमीटर लंबा बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे किन-किन शहरों से गुजरेगा
1.प्रधानमंत्री ने 29 फरवरी, 2020 को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया था। इस एक्सप्रेसवे का काम 28
महीने के भीतर पूरा कर लिया गया है।
2.इस चार लेन वाले एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए)
के तत्वावधान में लगभग 14,850 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है
और आगे चलकर इसे छह लेन तक भी
विस्तारित किया जा सकता है।
3.यह एक्सप्रेस-वे चित्रकूट जिले में भरतकूप के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-35 से लेकर इटावा जिले के कुदरैल गांव तक
फैला हुआ है, जहां यह आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के साथ मिल जाता है।
यह एक्सप्रेसवे सात जिलों-चित्रकूट, बांदा,
महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा- से होकर गुजरता है।
4.बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से सफर के दौरान बागेन, केन, श्यामा, चंद्रावल, बिरमा, यमुना, बेतवा और सेंगर नदियां
पड़ेंगी। इसमें कुल चार रेलवे ओवरब्रिज,
14 बड़े पुल, छह टोल प्लाजा, सात रैंप प्लाजा, 266 छोटे पुल और 18
फ्लाई ओवर हैं।
5.बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे इस इलाके की कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा,
क्योंकि इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के ढेरों अवसर सृजित होंगे। बांदा और जालौन जिलों में इस
एक्सप्रेस-वे के समीप औद्योगिक गलियारा बनाने का काम पहले ही शुरू हो चुका है।

