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लखनऊ, 24 जुलाई । उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी पर निर्मित 115 साल पुराने कर्जन ब्रिज को
योगी सरकार पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है।

योजना के तहत लॉर्ड कर्जन ब्रिज को
गंगा गैलरी तथा हेरीटेज पर्यटन स्थल के रूप में किया जाएगा।

विकसित रेलवे ब्रिज पर ग्लास का फर्श लोगों को लुभाएगा तो दर्शकों के लिए प्रयागराज की ऐतिहासिकता एवं
ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित होगी। यह परियोजना अर्थगंगा योजना का हिस्सा होगी, जो भारतीय संस्कृति और

धार्मिक पर्यटन पर फोकस करेगी। इसके साथ ही गंगा किनारे के दोनों तरफ विभिन्न प्रकार कारोबार को बढ़ावा भी
मिलेगा।

बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉर्ड कर्जन ब्रिज को सजाने-संवारने की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया
है। कार्ययोजना के मुताबिक पर्यटन विभाग द्वारा कर्जन ब्रिज पर गंगा गैलरी स्थापित कराई जाएगी। पुल के दोनों

किनारों पर रेलवे की जमीन है, जिसमें श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्किं ग, टॉयलेट, टिकट
काउंटर, कैफेटेरिया आदि बनाए जाएंगे। रेलवे पुल पर मां गंगा के उद्भव से लेकर गंगा सागर तक की यात्रा

प्रदर्शित होगी। साथ ही प्रयागराज की पौराणिकता, धार्मिकता एवं सांस्कृतिक विरासत को लाइट एंड साउंड के
माध्यम से देखने-समझने का मौका मिलेगा।

ब्रिज सौंदर्यीकरण की योजना पूरी हुई तो प्रयागराजवासियों को सुबह की सै

र शाम की मस्ती के लिए एक नया
ठिकाना भी मिलेगा। यहां पुल के उपरी तल सड़क पर भारतीय व्यंजनों, शिल्प आदि की सचल वाहनों के माध्यम

से बिक्री की योजना भी है। इससे पर्यटक 100 साल से अधिक पुराने इस पुल एवं मां गंगा के बारे में महत्व की
जानकारी तो पाएंगे ही, स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री ने रेलवे ब्रिज पर ग्लास का फर्श एवं

उसके दोनों ओर रेलिंग बनाने के निर्देश दिए हैं। सेतु एवं सड़क के मध्य स्थान को आकर्षक बनाया जाएगा।
प्रयागराज आदिकाल से कुंभ के लिए विश्वविख्यात रहा है, सो पुल पर समुद्र मंथन की घटना को प्रमुखता से

दर्शाया जाएगा। सिंचाई विभाग द्वारा गंगा के प्रवाह को चैनलाइज किया जाएगा तथा कर्जन ब्रिज से संगम तक
फेरी की सुविधा भी होगी। कर्जन ब्रिज को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रयागराज प्रशासन एवं

रेलवे आपस में समन्वय कर परियोजना को अमली जामा पहनाएंगे। इस दिशा में जल्द ही काम शुरू होने जा रहा
है।

बता दें कि प्रयागराज स्थित गंगा नदी पर फाफामऊ एवं प्रयागराज को जोड़ने वाले कर्जन ब्रिज को 1899 से 1905
तक भारत में वायसराय रहे लॉर्ड कर्जन के नाम पर वर्ष 1901 में स्वीकृति मिली तथा जनवरी, 1902 में इसका

निर्माण शुरू हुआ। इस क्षेत्र में 61 मीटर लंबे गर्डर और 15 पिलर का प्रयोग किया गया है। पुल के नीचे की ओर
सिंगनबाड़ गेज रेलवे लाइन तथा ऊपर सड़क का निर्माण किया गया। उस कालखंड से लेकर 1990 तक यह रेलवे

पुल यातायात के लिए सक्रिय रहा। अत्यधिक पुराना होने के कारण रेलवे ने इसे वर्ष 1998 में यातायात के लिए

प्रतिबंधित कर दिया। इसके पश्चात रेल मंत्रालय ने इसे तोड़ने का निर्णय लिया, लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध
पर इसे ऐतिहासिक रेलवे सेतु को राज्य सरकार को सौंप दिया गया।

इस पुल के इतिहास को देखते हुए एवं इसके साथ दीर्घकाल की स्मृतियों के जुड़ा होने के कारण राज्य सरकार ने
इसे टूरिस्ट स्पाट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। अंग्रेजों के दौर का बनाया हुआ यह रेलवे पुल

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का भी साक्षी रहा है। इसके अलावा कुंभ में श्रद्धालुओं की सेवा करता रहा। वर्ष 1998
में रेलवे द्वारा पुल को यातायात के लिए बंद किए जाने के पहले पुल से गुजरने वाली गंगा-गोमती एक्सप्रेस
आखिरी ट्रेन थी।