इंडिया सावधान न्यूज़
लालकुआं। स्मैक एक ऐसा नशा जिसकी जकड़ में अगर कोई आ गया तो बाहर निकलना बहुत ही मुश्किल है। वर्तमान समय में स्मैक गांव की गलियों तक पहुंच गया है,
परिणाम स्वरूप नई पीढ़ी नशे के दलदल में में धसती जा रही है और जिम्मेदार मूकदर्शक बन कर नस्लों को बरबाद होते हुए देख रहे हैं।
यही कारण है कि पुलिस भी इस भयानक नशे से समाज को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही है।
वर्तमान में समाज में स्मैक का बढ़ता प्रकोप भयानक समस्या के रूप में सामने आने लगा है। कुछ लोग चंद पैसों के लिए
नई पीढ़ी को स्मैक कारोबार के कारोबार में धकेल रहे हैं, शहर,नगर व गांव की गलियों तक स्मैक आसानी से उपलब्ध हो रही है। बताया जा रहा है कि नशा कारोबारियों द्वारा बहेड़ी, मुरादाबाद व किच्छा से स्मैक लाकर स्थानीय छोटे तस्करों को
उपलब्ध कराई जाती है। ऐसा नहीं है कि पुलिस को कारोबारियों व स्मैक के अड्डों की जानकारी नहीं है, लेकिन तस्करों के मजबूत नेटवर्क के चलते वह पुलिस के पहुंचने से पहले ही रफूचक्कर हो जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार स्मैक तस्कर नई पीढ़ी यानी 17 से 25 साल के युवाओं को निशाना बना रहे हैं । इसके अलावा प्राईवेट स्कूलों के बच्चे भी इनके निशाने पर हैं।
क्योंकि उनके अभिभावक उन्हें बिना पूछे जेब खर्च दे देते है। जबकि सरकार स्कूलों के बच्चों को फीस देने को बमुश्किल पैसा मिलता है।
स्मैक का नशा स्कूली व बेरोजगार युवाओं के लिए काफी महंगा नशा है। जिस कारण वह स्मैक के लिए पहले घर में फिर बाहर चोरी व अन्य वारदातों को अंजाम देते है। यही नहीं कई नशेड़ी परिजनों को तमाम धमकी देकर व इमोशनल
ब्लैकमेल कर पैसे लेकर स्मैक पीते हैं। वर्तमान समय में कोतवाली क्षेत्र से करीब दो दर्जन युवा नशा मुक्ति केंद्र में अपना उपचार करा रहे हैं। परंतु स्मैक के आसानी से उपलब्ध होने के कारण घर आने के बाद अधिकतर युवा फिर से स्मैक का
सेवन करने लगते हैं तथा युवक नशे के लिए स्वजनों पर पैसा देने के लिए दबाव बना रहा है, पैसा नहीं देने पर आत्महत्या करने व अपने को चोट पहुंचाने जैसी हरकतें कर ब्लैकमेल करते हैं।
बरहाल क्षेत्र में स्मैक का नशा खतरनाक रूप लेता जा रहा है, कई घर बरबाद हो गए हैं और तमाम बरबादी के कगार पर हैं ऐसे में सभी को सामुहिक प्रयास करने होंगे
और जल्द ही नशे के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाया जाए ताकि नौनिहालों को नशाखोरी से बचाया जा सके।

