Priyanka Gandhi Vadra की रणनीतिक चालें: Assam चुनाव से पहले भाजपा-विरोधी मोर्चा बनाने की कोशिश
Assam की उमस भरी राजनीतिक हवा में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तनाव साफ महसूस किया जा सकता है। आर्थिक मुश्किलें और पहचान से जुड़े सवालों ने मतदाताओं के मन में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे समय में प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की ओर से नेतृत्व संभालते हुए पार्टी की अंदरूनी दरारों को भरने और भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विपक्षी मोर्चा तैयार करने में जुटी हैं।
वे दूर से निर्देश देने वाली नेता के रूप में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय नेतृत्व के रूप में सामने आई हैं। स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से लगातार बैठकों के जरिए उनका लक्ष्य साफ है—असंतोष को एकजुट राजनीतिक शक्ति में बदलना। सवाल यह है कि क्या वे बिखरे विपक्ष को एक मंच पर ला पाएंगी या पुरानी खाई और गहरी हो जाएगी?
एकता की अनिवार्यता: आंतरिक कलह को सुलझाने की चुनौती
Assam कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से जूझ रही है। विभिन्न खेमों के बीच खींचतान ने संगठन को कमजोर किया है। प्रियंका गांधी वाड्रा की यात्रा का मुख्य उद्देश्य इन मतभेदों को चुनाव से पहले सुलझाना है।
कांग्रेस इकाई में पहले से मौजूद दरारें
पार्टी के भीतर कुछ नेता क्षेत्रीय दलों से गठबंधन के पक्ष में हैं, जबकि कुछ अकेले चुनाव लड़ने के समर्थक हैं। पिछले वर्ष सार्वजनिक मतभेद और इस्तीफों ने संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाया। डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी जैसे जिलों में असंतोष खुलकर सामने आया।
स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप रहा कि शीर्ष नेतृत्व से संवाद और संसाधनों की कमी है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया।
प्रियंका गांधी वाड्रा का सीधा हस्तक्षेप
गुवाहाटी में लगातार बैठकों के जरिए उन्होंने अलग-अलग गुटों से बातचीत की और साझा लक्ष्य पर जोर दिया—“या तो हम मिलकर भाजपा का मुकाबला करें, या बिखर जाएं।”
उन्होंने स्थानीय नेतृत्व को अधिक अधिकार देने और टिकट वितरण में पारदर्शिता का भरोसा दिया। इससे कुछ हद तक तनाव कम हुआ है, हालांकि पूरी एकजुटता अभी भी चुनौती बनी हुई है।

बाहरी गठबंधन की रणनीति: भाजपा-विरोधी मोर्चा
अंदरूनी मतभेद सुलझाने के साथ-साथ प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य विपक्षी दलों से भी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही हैं।
संभावित सहयोगी दल
All India United Democratic Front (AIUDF) — निचले Assam में मजबूत पकड़, विशेषकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच।
Bodoland People’s Front (BPF) — बोडो और आदिवासी इलाकों में प्रभावशाली।
Assam Jatiya Parishad (AJP) — नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोध आंदोलन से उभरा, युवाओं में लोकप्रिय।
इन दलों के साथ गठबंधन से विपक्षी वोटों का बंटवारा रुक सकता है। हालांकि सीट बंटवारे को लेकर जटिल बातचीत जारी है।
सीट बंटवारे की जटिलताएं
AIUDF 25–30 सीटों की मांग कर रही है, जबकि कांग्रेस संतुलन बनाए रखने के लिए कम संख्या चाहती है। नेतृत्व की भूमिका और साझा मंच की रणनीति भी चर्चा का विषय है।
पिछले चुनाव में भाजपा ने 126 में से 86 सीटें जीती थीं, लेकिन विपक्षी वोटों का कुल प्रतिशत काफी था। यदि विपक्ष संगठित होता है तो 20–25 सीटों पर मुकाबला कड़ा हो सकता है।
संदेश और नैरेटिव: भाजपा के खिलाफ रणनीतिक अभियान
एक मजबूत गठबंधन के लिए साझा एजेंडा जरूरी है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने रोजगार, महंगाई, बाढ़ और पहचान के मुद्दों को केंद्र में रखा है।

साझा मंच के प्रमुख मुद्दे
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर पुनर्विचार
चाय बागान मजदूरों के वेतन में सुधार
युवाओं के लिए रोजगार सृजन
भूमि और पर्यावरण संरक्षण
उनका संदेश स्थानीय भावनाओं से जुड़ा है—“असम पहले” का नारा क्षेत्रीय अस्मिता को संबोधित करता है।
चुनावी प्रभाव: क्या बदलेगा समीकरण?
प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रियता से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। कुछ क्षेत्रों में रैलियों में भीड़ बढ़ने की खबरें हैं। यदि विपक्ष एकजुट रहता है तो मतदान प्रतिशत में वृद्धि और करीबी मुकाबले की संभावना है।

इतिहास बताता है कि असफल गठबंधन विपक्ष को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन मजबूत और अनुशासित गठबंधन सत्ता परिवर्तन का रास्ता खोल सकते हैं।
Assam की राजनीति का निर्णायक मोड़
Assam में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है। प्रियंका गांधी वाड्रा की पहल कांग्रेस की अंदरूनी समस्याओं को सुलझाने और व्यापक विपक्षी एकता बनाने की दिशा में अहम कदम है।
सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह एकता टिकाऊ बन पाती है। यदि हां, तो Assam की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है; यदि नहीं, तो भाजपा की राह आसान हो सकती है।
आने वाले महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह रणनीति Assam के चुनावी समीकरण को कितना बदल पाती है।

