बैरकपुर बीजेपी सभा में अमित शाह का TMC पर तीखा हमला
बैरकपुर की ज़मीन पर हज़ारों कदमों की धूल उड़ रही थी। मंच पर पहुंचे Amit शाह—बीजेपी के शीर्ष रणनीतिकार—और उनके शब्द सीधे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सत्ता पर वार करने लगे। पश्चिम बंगाल में यह रैली किसी चुनावी बिगुल से कम नहीं लगी। चुनाव नज़दीक हैं, और शाह का मक़सद साफ़ था—ज़मीन हिलाना। भीड़ का शोर बढ़ता गया, झंडे लहराए, नारे गूंजे। शाह ने बदलाव का वादा किया और TMC को बंगाल की समस्याओं का खलनायक बताया।
उत्तर 24 परगना का बैरकपुर—उद्योगों और मज़दूरों का इलाक़ा—कठिन दौर जानता है। शाह की मौजूदगी बीजेपी के बड़े अभियान का संकेत थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 20,000 से ज़्यादा लोग जुटे। मंच से दिए गए वादों और आरोपों ने माहौल गरमा दिया। तस्वीरों में सघन भीड़, ऊँचे बैनर और जोश साफ़ दिखा।
मुख्य नैरेटिव: TMC शासन पर सीधा प्रहार
Amit शाह ने कोई लाग-लपेट नहीं रखी। उन्होंने TMC नेताओं को नाम लेकर घेरा और कहा कि उनका समय अब ख़त्म हो रहा है। बंगाल को “ताज़ी हवा” चाहिए—यह संदेश बार-बार दोहराया गया।
भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप
Amit शाह ने “सिंडिकेट राज” का ज़िक्र किया—निर्माण परमिट से लेकर नौकरियों तक में कथित वसूली। बैरकपुर में आम लोगों को छोटे काम के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती है, ऐसा आरोप उन्होंने लगाया। उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे सड़क और स्कूल के लिए आए फंड कथित तौर पर गायब हो जाते हैं। उनका दावा था कि 2011 के बाद से घोटालों में 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का नुकसान हुआ।
भीड़ ने सहमति में सिर हिलाए। तुलना कड़ी थी—“खराब बॉस” जो मेहनत की कमाई खुद रख ले।
क़ानून-व्यवस्था पर सवाल
Amit शाह ने कहा कि सड़कों पर हिंसा का साया है। TMC के “गुंडों” पर विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हमलों का आरोप लगाया गया। हालिया झड़पों और बैरकपुर में एक बीजेपी कार्यकर्ता पर हमले का ज़िक्र हुआ। पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप भी लगाया गया।
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि अपराध बढ़े हैं और न्याय पार्टी-निष्ठा के आगे झुक जाता है। हर बिंदु पर तालियाँ और नारे तेज़ होते गए।
केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में विफलता
Amit शाह ने आरोप लगाया कि केंद्र की योजनाओं को राज्य सरकार रोकती है। पीएम आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ पूरा नहीं पहुंचता—उनका दावा था कि सिर्फ़ 40% घरों तक लाभ पहुंचा। राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में कटौती का भी आरोप लगाया गया।
बीजेपी की जीत पर “पूरी तरह क्रियान्वयन” का वादा किया गया।
रणनीतिक संदेश: बैरकपुर के अहम वर्गों पर फोकस
Amit शाह ने श्रोताओं को ध्यान में रखकर बात रखी—मज़दूर, परिवार, और विविध समुदाय। औद्योगिक बेल्ट की नाराज़गी को उन्होंने सीधा छुआ।
उद्योग और मज़दूर वर्ग को साधना
कपड़ा और जूट जैसे उद्योगों में काम की कमी का मुद्दा उठा। निवेश लाने, नए प्लांट और स्किल सेंटर खोलने का वादा किया गया। न्यूनतम मज़दूरी और सुरक्षा की बात हुई।
TMC के दौर में लंबे स्ट्राइक और देरी का ज़िक्र कर विकास का वैकल्पिक चित्र पेश किया गया।
अल्पसंख्यक और मतुआ समुदाय तक पहुंच
मतुआ समुदाय के नागरिकता संबंधी डर पर Amit शाह ने भरोसा दिलाया। NRC के संदर्भ में सुरक्षा का आश्वासन दिया।
मुस्लिम समुदाय के लिए “एकता” और “पुल बनाने” की भाषा इस्तेमाल हुई, केंद्र से मिले फंड और शिक्षा-संस्थानों का ज़िक्र किया गया। स्वर अपेक्षाकृत नरम रहा—भरोसे की कोशिश दिखी।
स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं को मज़बूत करना
Amit शाह ने कार्यकर्ताओं की हौसलाअफ़ज़ाई की—“आप योद्धा हैं।” 2021 में बढ़त का हवाला देकर लक्ष्य दोगुना करने को कहा। संगठनात्मक समर्थन और संसाधनों का भरोसा दिया गया।
नीतिगत घोषणाएँ और भविष्य की प्रतिबद्धताएँ
आलोचना के साथ रोडमैप भी रखा गया।
उत्तर 24 परगना के लिए आर्थिक पुनरुद्धार
करीब 5,000 करोड़ रुपये के निवेश का ज़िक्र—टेक और मैन्युफैक्चरिंग हब, नदी-आधारित पोर्ट अपग्रेड, और ग्रीन एनर्जी परियोजनाएँ। पाँच साल में 50,000 नौकरियों का दावा किया गया।
प्रशासनिक सुधार का वादा
पुलिस प्रशिक्षण, निष्पक्षता, तेज़ प्रशासन, स्थानीय निकायों में सुधार और सीधे फंड ट्रांसफर—“लालफीताशाही” कम करने की बात। तुलना की गई—जैसे जाम नाली साफ़ करने से पानी बहने लगता है।
TMC की त्वरित प्रतिक्रिया और राजनीतिक असर
TMC ने तुरंत पलटवार किया। ममता बनर्जी और पार्टी नेताओं ने आरोपों को “झूठ” बताया, योजनाओं के लाभार्थियों के सबूत गिनाए और बीजेपी पर “बाहरी” होने का आरोप लगाया।
उनकी दलील थी—हम ज़मीन जानते हैं, दिल्ली से वादे आसान हैं।
स्थानीय राजनीति पर असर
बैरकपुर में चर्चा तेज़ है—कुछ लोग बदलाव की बात करते हैं, कुछ TMC के साथ बने हैं। सोशल मीडिया पर बीजेपी को नई धार मिली है। आगे और रैलियाँ तय हैं; मुकाबला और तीखा होगा।
बैरकपुर के बाद की राह
Amit शाह की बैरकपुर रैली ने सियासी तापमान बढ़ा दिया। भ्रष्टाचार, क़ानून-व्यवस्था और योजनाओं पर सीधा हमला—बीजेपी ने आक्रामक रुख़ दिखाया। TMC अपनी ज़मीन बचाने में जुटी है। चुनावी लड़ाई तेज़ होने वाली है।
मुख्य बातें
भ्रष्टाचार पर बिना समझौते का रुख़ बीजेपी के लिए ध्यान और भरोसा बनाता है।
मज़दूरों और समुदायों पर लक्षित संदेश से स्थानीय पकड़ मज़बूत होती है।
नीतिगत वादे विकास का वैकल्पिक रास्ता दिखाते हैं।
आगे क्या होगा? नज़रें सड़कों और सभाओं पर रहेंगी। आख़िरकार, आपका वोट ही दिशा तय करेगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति पर नज़र बनाए रखें—और अपनी राय ज़रूर साझा करें।

