भ्रष्टाचार पर अंकुश: Amit Shah की डिजिटल इंडिया परिकल्पना से Gujarat में बदलता शासन
कल्पना कीजिए एक ऐसे शासन तंत्र की, जहाँ हर सरकारी लेन-देन का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड हो—जिसे न छिपाया जा सके और न बदला जा सके। यही दृष्टि Amit शाह डिजिटल इंडिया के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। उनका मानना है कि जब प्रक्रियाएँ सुरक्षित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर चलेंगी, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश स्वतः कम हो जाएगी।
गुजरात इस राष्ट्रीय डिजिटल अभियान की एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला के रूप में उभरा है। राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेही को तकनीक के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान शासन व्यवस्था में डिजिटल साधन सुशासन की रीढ़ बनते जा रहे हैं।
पारदर्शिता की संरचना: डिजिटल शासन के मुख्य स्तंभ
डिजिटल उपकरण उन क्षेत्रों को लक्षित करते हैं जहाँ पहले भ्रष्टाचार की संभावना अधिक रहती थी—जैसे भूमि लेन-देन, सरकारी अनुदान और लाइसेंसिंग प्रक्रियाएँ। तकनीक अब एक सख्त प्रहरी की तरह कार्य कर रही है।
1. भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण
डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के तहत गुजरात में कागजी रजिस्टरों को ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदला गया है। इससे फर्जी नामांतरण और बेनामी संपत्तियों पर रोक लगी है।
अब किसान और खरीदार मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से भूमि का विवरण देख सकते हैं। इससे भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आई है और व्यापार सुगमता में सुधार हुआ है।
2. ई-गवर्नेंस पोर्टल द्वारा सेवा वितरण
गुजरात का सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम व्यापारिक अनुमतियों को ऑनलाइन उपलब्ध कराता है। आवेदन, ट्रैकिंग और भुगतान—सब कुछ डिजिटल माध्यम से होता है।
ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ने नकद लेन-देन और छोटे स्तर के रिश्वत तंत्र को काफी हद तक समाप्त किया है। विभागों के बीच डेटा साझाकरण से प्रक्रियाएँ तेज हुई हैं और पारदर्शिता बढ़ी है।
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3. बायोमेट्रिक और पहचान सत्यापन
आधार आधारित प्रमाणीकरण से लाभार्थी योजनाओं में फर्जी नाम हटाए गए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बायोमेट्रिक सत्यापन से राशन केवल पात्र परिवारों तक पहुँच रहा है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से छात्रवृत्ति और अन्य अनुदान सीधे बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।
निगरानी और जवाबदेही: डेटा एनालिटिक्स की भूमिका
डिजिटल रिकॉर्ड केवल संग्रह नहीं, बल्कि निगरानी का साधन भी बन गए हैं। डेटा विश्लेषण उपकरण संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।
सार्वजनिक खरीद में अनियमितता की पहचान
ई-टेंडरिंग प्लेटफॉर्म पर निविदाएँ स्वचालित और पारदर्शी तरीके से खोली जाती हैं। यदि कोई कंपनी असामान्य रूप से अधिक ठेके जीतती है, तो सिस्टम चेतावनी देता है। इससे मिलीभगत की संभावनाएँ कम हुई हैं।
रियल-टाइम ऑडिटिंग
हर बड़े व्यय का डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध होता है। वित्तीय विभाग ऑनलाइन ऑडिट कर सकता है, जिससे अनियमितताओं पर तुरंत कार्रवाई संभव होती है।
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डिजिटल हस्तक्षेप के प्रभावी उदाहरण
परमिट जारी करने में रिश्वत पर रोक
औद्योगिक और पर्यावरणीय अनुमतियाँ अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जारी होती हैं। आवेदन की स्थिति सार्वजनिक रूप से ट्रैक की जा सकती है। इससे प्रक्रिया की अवधि घटी है और “स्पीड मनी” की शिकायतों में कमी आई है।
लक्षित सब्सिडी में लीकेज समाप्त
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और छात्रवृत्ति योजनाओं में डिजिटल सत्यापन से फर्जी लाभार्थियों को हटाया गया है। राज्य स्तरीय ऑडिट में डिजिटल स्कूलों में ‘घोस्ट स्टूडेंट’ नहीं पाए गए।
मानव पक्ष: प्रशिक्षण और विश्वास निर्माण
तकनीक तभी प्रभावी होती है जब कर्मचारी और नागरिक उसे अपनाएँ। गुजरात में सरकारी कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं। डिजिटल दक्षता को प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ा गया है।
नागरिकों के लिए जागरूकता अभियान और शिकायत निवारण ऐप शुरू किए गए हैं। लोग ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर उसकी प्रगति देख सकते हैं, जिससे शासन में विश्वास बढ़ा है।
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डिजिटल जवाबदेही की ओर भविष्य
Amit शाह की डिजिटल इंडिया परिकल्पना ने गुजरात में शासन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
मुख्य उपलब्धियाँ स्पष्ट हैं:
भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण
ऑनलाइन सेवा वितरण
बायोमेट्रिक सत्यापन
डेटा आधारित निगरानी
ये पहलें समय, धन और जनविश्वास—तीनों की बचत करती हैं।
भविष्य की दिशा स्पष्ट है: हर विभाग में डिजिटल पारदर्शिता को और गहरा करना। नागरिकों की भागीदारी इस परिवर्तन की कुंजी है। डिजिटल प्रणालियों का उपयोग करें, अनियमितताओं की रिपोर्ट करें और स्वच्छ शासन की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
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