Amitabh बच्चन और अभिषेक बच्चन ने विज्ञापन जगत के दिग्गज पियूष पांडे को दी अंतिम विदाई
बॉलीवुड और विज्ञापन जगत दोनों के लिए यह खबर बहुत भारी रही। भारत के सबसे रचनात्मक दिमागों में से एक, पियूष पांडे का निधन एक युग का अंत है। उनके अंतिम संस्कार में Amitabh बच्चन और अभिषेक बच्चन शामिल हुए — यह सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि दो उद्योगों के गहरे रिश्तों का प्रतीक थी।
पियूष पांडे: भारतीय विज्ञापन क्रांति के जनक
पियूष पांडे ने भारतीय विज्ञापन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने ओगिल्वी (Ogilvy) में शुरुआत की और अपनी कल्पनाशक्ति से उसे नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया। उनके विज्ञापनों में मज़ाकिया अंदाज़ और भावनात्मक जुड़ाव का सुंदर मेल था। उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले, लेकिन असली जीत लोगों के दिलों में थी।
उन्होंने साबित किया कि विज्ञापन केवल बेचने का ज़रिया नहीं, बल्कि कहानियाँ कहने का तरीका है।
‘फौज’ से ‘फेविकोल’ तक: यादगार सफ़र
फेविकोल के मशहूर विज्ञापन में मज़दूरों का नाचता हुआ गीत अब भी लोगों की ज़ुबान पर है। उसी तरह कैडबरी का “कभी खुशी का मौका” वाला विज्ञापन हर दिल को छू गया। उनके ‘फौज’ अभियान ने हजारों युवाओं को सेना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
उनके विज्ञापन सिर्फ ब्रांड नहीं बेचते थे — वे रिश्ते बनाते थे।
भारतीयता की जड़ में बसे विज्ञापन
पांडे ने कभी विदेशी दिखावे पर भरोसा नहीं किया। उन्होंने भारत के त्योहारों, परिवारों और छोटे कस्बों की सादगी को केंद्र में रखा। एशियन पेंट्स के विज्ञापन में बच्चों की मासूम शरारत ने “घर” की असली भावना दिखा दी।
उनकी कहानियाँ दर्शकों का सम्मान करती थीं — ज़ोरदार नारे नहीं, बल्कि सच्चे एहसास। यही वजह थी कि लोग वर्षों बाद भी उनके विज्ञापनों को याद करते हैं।

सिनेमा और मीडिया पर असर
टीवी से आगे बढ़कर उन्होंने फिल्मों में भी योगदान दिया। लगान जैसी फिल्म में उनकी कहानी कहने की शैली झलकी। सरकार में Amitabh बच्चन के संवादों में भी वही भावनात्मक गहराई दिखी।
विज्ञापन और फिल्मों के बीच की रेखा उन्होंने धुंधली कर दी — दोनों को एक साझा मंच दिया।
बच्चन परिवार की श्रद्धांजलि
Amitabh बच्चन और अभिषेक बच्चन का अंतिम संस्कार में शामिल होना उनके निजी रिश्ते की गहराई को दर्शाता है। अमिताभ ने ट्वीट किया, “उनकी कहानियों ने ज़िंदगियाँ रौशन कीं; अब वे सितारों में चमकेंगे।”
अभिषेक ने नम आँखों से पुष्पांजलि दी और कहा, “एक सच्चा आइकॉन बहुत जल्दी चला गया।”
अंतिम संस्कार का दृश्य
मुंबई के एक शांत श्मशान में बारिश की हल्की फुहारों के बीच अंतिम संस्कार हुआ। मंत्रोच्चार के साथ पियूष पांडे की पार्थिव देह को अग्नि दी गई। बच्चन परिवार folded hands के साथ मौन खड़ा रहा।
वह दृश्य सादगी और सम्मान से भरा था — जैसे उनके विज्ञापन होते थे, बिना किसी दिखावे के, सिर्फ सच्चाई और संवेदना के साथ।

उद्योग की अंतिम सलामी
ओगिल्वी और अन्य एजेंसियों ने बयान जारी कर कहा, “एक अध्याय खत्म हुआ, लेकिन उनकी रोशनी हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेगी।”
कई युवा विज्ञापन पेशेवरों ने उन्हें अपना गुरु बताया।
उनकी विरासत और आने वाला कल
डिजिटल युग भले तेज़ी से बदल रहा हो, लेकिन पियूष पांडे का संदेश हमेशा जीवित रहेगा — “कहानी सबसे बड़ी ताकत है।”
उनका जीवन हमें सिखाता है कि भारतीय भावनाओं से जुड़ी सच्ची कहानियाँ ही लोगों के दिलों में जगह बनाती हैं।

एक युग का अंत, लेकिन प्रेरणा अमर
Amitabh और अभिषेक बच्चन की उपस्थिति ने दिखाया कि पियूष पांडे ने केवल विज्ञापन नहीं बनाए — उन्होंने लोगों के बीच पुल बनाए।
फेविकोल की हंसी से लेकर लगान की जयकार तक, उन्होंने भारत की रचनात्मक आत्मा को आवाज़ दी।
वह अब नहीं हैं, लेकिन उनके बनाए शब्द, दृश्य और भावनाएँ हमेशा हमारे साथ रहेंगे।
Delhi में कृत्रिम वर्षा के लिए सफल परीक्षण; पहला क्लाउड सीडिंग संभवतः 29 अक्टूबर को
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

