Delhi

राजनीति में घिरी आस्था: कृत्रिम यमुना घाटों को लेकर AAP और BJP आमने-सामने, पीएम मोदी की छठ डुबकी से बढ़ी गरमी-Delhi

हर साल छठ पूजा उत्तर भारत में आस्था और उल्लास का पर्व लेकर आती है। भक्त सूरज देव को अर्घ्य देने के लिए नदियों में स्नान करते हैं। लेकिन Delhi में इस बार यह त्योहार श्रद्धा से ज्यादा राजनीतिक जंग का केंद्र बन गया है।
यमुना नदी का जहरीला झाग, प्रदूषण और कृत्रिम घाटों का मुद्दा अब AAP और BJP के बीच तीखी बहस में बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित स्नान ने आग में घी का काम किया है। सवाल उठता है—क्या श्रद्धा राजनीति के बोझ तले दब रही है?

छठ पूजा का महत्व और दिल्ली में इसका स्वरूप

छठ उत्तर भारत, खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपरा में गहराई से जुड़ा त्योहार है। महिलाएं परिवार की खुशहाली और समृद्धि के लिए उपवास रखती हैं, सुबह और शाम सूर्य को जल अर्पित करती हैं।
Delhi में लाखों प्रवासी परिवार यमुना किनारे यही परंपरा निभाते हैं। लेकिन यमुना की हालत देखकर श्रद्धालुओं का मन डगमगा गया है—काली, बदबूदार और झाग से भरी नदी में स्नान करना अब जोखिम भरा है।

यमुना की जहरीली सच्चाई-Delhi

आज की यमुना अपने नाम की नहीं रह गई है।

  • पानी में अमोनिया, भारी धातुओं और बैक्टीरिया के स्तर खतरनाक हैं।

  • नदी की सतह पर सफेद झाग बना रहता है, जो डिटर्जेंट और सीवेज से निकलता है।

  • Delhi की करीब 80% सीवेज बिना ट्रीटमेंट के यमुना में गिरती है।

2022 में छठ पूजा के दौरान कई लोगों को त्वचा पर दाने और आंखों में जलन की शिकायत हुई थी। डॉक्टरों ने इस बार भी चेतावनी जारी की है।

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कृत्रिम घाटों का निर्माण: सुरक्षा या दिखावा?

Delhi सरकार (AAP) ने इस बार 100 से ज्यादा कृत्रिम घाट बनाए हैं।
इन घाटों में टैंकरों से साफ पानी भरा गया है, चारों ओर प्लास्टिक शीट और रेत से नदी किनारे जैसा माहौल तैयार किया गया है।
उद्देश्य—लोगों को प्रदूषित यमुना से दूर रखकर सुरक्षित पूजा कराना।

इन घाटों पर

  • पानी की रियल-टाइम जांच

  • मेडिकल कैंप

  • सफाईकर्मी और वालंटियर
    तैनात किए गए हैं।

हालांकि विपक्ष इसे “फर्जी आस्था का नाटक” कह रहा है। BJP का आरोप है कि इतने करोड़ खर्च करने के बजाय नदी की सफाई पर काम होता तो बेहतर होता।

AAP vs BJP: आरोपों की जंग-Delhi

AAP का बचाव: “भक्तों की सुरक्षा सबसे पहले”

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा —

“हम श्रद्धालुओं की जान खतरे में नहीं डाल सकते। साफ पानी में पूजा कराना हमारा कर्तव्य है।”

AAP नेताओं का दावा है कि

  • कृत्रिम घाटों के पानी की गुणवत्ता नियंत्रित है।

  • यमुना सफाई परियोजनाएं जारी हैं।

  • पुराने नेताओं की नाकामी के कारण आज की हालत बनी।

सोशल मीडिया पर AAP ने “सुरक्षित छठ” के वीडियो शेयर किए हैं जिनमें महिलाएं मुस्कुराती दिख रही हैं।

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BJP का हमला: “आस्था का मजाक, नदी का अपमान”-Delhi

BJP नेताओं ने कहा कि कृत्रिम घाट “धोखा” हैं।

“मोदी जी असली यमुना में डुबकी लगाते हैं, और यहां लोगों को नकली तालाब में भेजा जा रहा है।”

BJP का कहना है—

  • NGT की चेतावनी के बावजूद यमुना में सुधार नहीं हुआ।

  • AAP करोड़ों का दिखावा कर रही है।

  • “साफ नदी, सच्ची आस्था” का वादा तोड़ दिया गया है।

कई बीजेपी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में पोस्टर लगाए—
“झाग नहीं, श्रद्धा चाहिए”

प्रदूषण और राजनीति के बीच फंसी आस्था-Delhi

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (DPCC) दोनों ने चेतावनी दी है कि

“यमुना में किसी तरह का स्नान असुरक्षित है।”

लेकिन राजनीतिक टकराव के बीच साफ-सुथरी नीति और दीर्घकालिक योजना गायब है।
AAP कहती है केंद्र ने फंड नहीं दिया,
BJP कहती है दिल्ली सरकार ने योजना पर काम नहीं किया।
नतीजा—झाग फिर लौट आता है।

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श्रद्धालुओं की दुविधा

भक्तों में मिश्रित प्रतिक्रिया है—

  • कुछ लोग कहते हैं, “कृत्रिम घाट पर पूजा अधूरी लगती है।”

  • दूसरे कहते हैं, “जान प्यारी है, भगवान भावना देखते हैं।”

एक बिहार निवासी महिला ने कहा—

“हम गंगा नहीं जा सकते, दिल्ली में यही घाट है। पर डर भी लगता है।”

कई बुजुर्गों ने इस बार डुबकी छोड़ सिर्फ अर्घ्य देने का निर्णय लिया है।

सुरक्षित छठ के लिए सुझाव

  1. केवल सरकारी स्वीकृत घाटों पर ही जाएं।

  2. पानी का रंग या बदबू देखकर सावधान रहें।

  3. बच्चों और बुजुर्गों को नदी में डुबकी न लगवाएं।

  4. पूजा के लिए साफ, उबला या फ़िल्टर किया पानी प्रयोग करें।

  5. त्वचा या आंखों में जलन हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

आस्था बनाम प्रशासन

यमुना विवाद का सार यही है —
AAP सुरक्षा दिखा रही है, BJP सफाई की बात कर रही है,
पर सच्ची जरूरत है — नदी को जिंदा करने की।

छठ पूजा की आत्मा शुद्ध जल और सच्ची नीयत में है, न कि कृत्रिम तालाबों में।
प्रधानमंत्री की डुबकी और नेताओं के बयानों से ज्यादा अहम है कि आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ यमुना मिले।

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