Ashwini वैष्णव ने राहुल गांधी को कहा ‘धन्यवाद’: भारत में Foxconn-iPhone मैन्युफैक्चरिंग का उभार
राजनीति और उद्योग के मेल का एक दिलचस्प उदाहरण तब देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री Ashwini वैष्णव ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी को धन्यवाद कहा। वजह थी—भारत में iPhone निर्माता Foxconn के बढ़ते निवेश पर ध्यान दिलाना। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब वैश्विक टेक कंपनियाँ तेजी से अपने उत्पादन केंद्र भारत की ओर शिफ्ट कर रही हैं।
Foxconn, जो Apple के iPhone निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है, ने भारत में अपने ऑपरेशन को बड़े पैमाने पर बढ़ाया है। यह विस्तार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लक्ष्य से जुड़ा है।
यह लेख Ashwini वैष्णव के ‘धन्यवाद’, Foxconn की भूमिका और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसके असर को समझाता है—राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर रोज़गार और तकनीकी विकास के वास्तविक लाभों पर नज़र डालते हुए।
उत्प्रेरक बिंदु: वैष्णव-गांधी संवाद को समझना
‘धन्यवाद’ कहने की वजह क्या थी?
दिसंबर 2025 में एक प्रेस मीट के दौरान Ashwini वैष्णव ने राहुल गांधी का आभार जताया। राहुल गांधी ने एक ट्वीट में विदेशी कंपनियों द्वारा स्थानीय नौकरियों पर असर को लेकर चिंता जताई थी। इस पर वैष्णव ने पलटवार करते हुए कहा कि इस चर्चा से Foxconn के 1.5 अरब डॉलर के नए निवेश पर राष्ट्रीय ध्यान गया।
उन्होंने तमिलनाडु में Foxconn की नई iPhone उत्पादन लाइनों का ज़िक्र किया और कहा कि इस चर्चा से परियोजनाओं की मंज़ूरी प्रक्रिया तेज़ हुई। यह बयान दर्शाता है कि कभी-कभी विपक्ष की आवाज़ भी सरकारी प्रयासों को रफ्तार दे सकती है।
हालाँकि सोशल मीडिया पर इस पर बहस छिड़ गई—क्या यह वास्तविक सहयोग था या चतुर राजनीतिक रणनीति?
मैन्युफैक्चरिंग पर राहुल गांधी का पक्ष
राहुल गांधी लंबे समय से भारत की मैन्युफैक्चरिंग नीति में निष्पक्षता की बात करते रहे हैं। अपने हालिया बयान में उन्होंने सवाल उठाया कि PLI जैसी योजनाएँ क्या वास्तव में छोटे भारतीय उद्योगों को लाभ पहुँचा रही हैं या सिर्फ़ Foxconn जैसी बड़ी विदेशी कंपनियों को।
उन्होंने श्रमिक अधिकारों, वेतन और स्थानीय वैल्यू एडिशन पर ज़ोर दिया। उनके अनुसार अभी iPhone के केवल लगभग 20% पुर्ज़े भारत में बनते हैं, जो आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से कम है।
यह रुख़ सरकार पर नीतिगत सुधारों का दबाव बनाता है, लेकिन इसी ने वैष्णव के जवाब का रास्ता भी खोला।

राजनीतिक शिष्टाचार या रणनीतिक चाल?
क्या यह धन्यवाद आर्थिक मुद्दों पर द्विदलीय सहमति का संकेत है? आंशिक रूप से हाँ—दोनों पक्ष मानते हैं कि भारत को रोज़गार सृजन के लिए मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी।
लेकिन यह बीजेपी की एक रणनीतिक चाल भी हो सकती है, जिसमें आलोचना को उपलब्धि में बदल दिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि असली परीक्षा नीतियों के अमल में होगी, खासकर आगामी बजट में।
भारत में Foxconn का बढ़ता कदम: iPhone निर्माण का विस्तार
निवेश और उत्पादन का पैमाना
Foxconn ने 2017 में भारत में सीमित स्तर पर शुरुआत की थी। आज चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर प्लांट में हर साल लाखों iPhone बनाए जा रहे हैं। कंपनी 2026 तक 25 मिलियन यूनिट उत्पादन का लक्ष्य रखती है।
कर्नाटक में नए प्लांट, तमिलनाडु में अपग्रेड—अब तक 40,000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार मिल चुका है, जिसे जल्द दोगुना करने की योजना है।
PLI योजना की भूमिका
PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना के तहत तय उत्पादन लक्ष्य पूरे करने पर कंपनियों को 6% तक प्रोत्साहन मिलता है। इससे Foxconn जैसी कंपनियों को लागत कम करने और चीन से उत्पादन शिफ्ट करने में मदद मिली।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2020 से अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में 10 अरब डॉलर से अधिक FDI आया है।
भारत क्यों बना पसंदीदा विकल्प?
महामारी के बाद कंपनियाँ सप्लाई चेन का जोखिम कम करना चाहती हैं। चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत एक मजबूत विकल्प बनकर उभरा है—कम लागत वाला श्रम, विशाल घरेलू बाज़ार और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी वजह हैं।
वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत का पैमाना बड़ा है, जो मेगा-फैक्ट्रियों के लिए अनुकूल है।

Apple से आगे: भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम पर असर
सहायक उद्योगों में उछाल
Foxconn के साथ कई छोटे भारतीय सप्लायर जुड़े हैं—केबल, केसिंग, बैटरी पैक जैसे पुर्ज़े अब देश में बन रहे हैं। तमिलनाडु में ही 50 से अधिक MSME इस चेन में शामिल हुए हैं।
रोज़गार सृजन
सरकार का लक्ष्य 2030 तक 60 लाख नए इलेक्ट्रॉनिक्स जॉब्स का है। Foxconn अकेले 50,000 प्रत्यक्ष और करीब 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा कर रहा है।
इनमें लगभग 60% महिलाएँ हैं, जो सामाजिक समावेशन की दृष्टि से अहम है।
कौशल विकास और तकनीक का हस्तांतरण
iPhone निर्माण में उन्नत तकनीक की ज़रूरत होती है। Foxconn, ITI और ट्रेनिंग सेंटर्स के साथ मिलकर हर साल 10,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित कर रहा है।
इससे भारत में तकनीकी क्षमता तेजी से बढ़ रही है, जिसका लाभ भविष्य में घरेलू ब्रांड्स को भी मिलेगा।
नीति निरंतरता बनाम राजनीतिक बयानबाज़ी
भारत में FDI के लिए नीतिगत स्थिरता 1990 के दशक से बनी हुई है। अलग-अलग सरकारों के बावजूद इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को समर्थन मिलता रहा है।
यही निरंतरता Foxconn जैसी कंपनियों को लंबे समय के लिए निवेश का भरोसा देती है।
निवेशकों और नीति-निर्माताओं के लिए सीख
निवेशकों के लिए:
PLI नियमों को अच्छी तरह समझें
तमिलनाडु, कर्नाटक जैसे तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर वाले राज्यों को चुनें
स्थानीय सप्लायर्स से साझेदारी करें

नीति-निर्माताओं के लिए:
बिजली और लॉजिस्टिक्स स्थिर रखें
श्रम कानूनों में स्पष्टता लाएँ
कौशल प्रशिक्षण बढ़ाएँ
वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मानचित्र पर भारत
Ashwini वैष्णव और राहुल गांधी के बीच यह संवाद दिखाता है कि राजनीति कभी-कभी प्रगति को उजागर करने का माध्यम भी बन सकती है। Foxconn का iPhone विस्तार, PLI और नीतिगत समर्थन के साथ, भारत में रोज़गार और तकनीकी विकास को नई दिशा दे रहा है।
अगर नीतियों का सही क्रियान्वयन जारी रहा, तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
आप क्या सोचते हैं—क्या यह रफ्तार बनी रहेगी? आने वाले निवेश और नीतिगत फैसलों पर नज़र बनाए रखें।

