Assam की राजनीति
Assam की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर सामने आया है, जहां Nandita Garlosa ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। यह घटनाक्रम Assam में 2026 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
दल बदल: अचानक हुआ बड़ा राजनीतिक झटका
मार्च 2026 की शुरुआत में यह घटनाक्रम तेजी से सामने आया। Nandita Garlosa ने 5 मार्च को बीजेपी से इस्तीफा दिया और 8 मार्च को कांग्रेस की रैली में शामिल होकर अपने फैसले की घोषणा की।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि उन्हें पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा था और अब वे अपने क्षेत्र के लोगों के लिए “वास्तविक बदलाव” चाहती हैं।
बीजेपी में उनका राजनीतिक सफर
गर्लोसा ने पिछले एक दशक में बीजेपी में मजबूत पहचान बनाई थी।
- 2016 और 2021 में विधायक बनीं
- वन एवं पर्यावरण मंत्री के रूप में काम किया
- खासकर जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों पर ध्यान दिया
लेकिन हाल के समय में:
- फंड की कमी
- परियोजनाओं में देरी
- पार्टी नेतृत्व से मतभेद
जैसी समस्याएं सामने आईं।
पार्टी छोड़ने के पीछे कारण
1. आंतरिक असंतोष
सूत्रों के मुताबिक, टिकट वितरण और स्थानीय योजनाओं को लेकर उनका पार्टी नेतृत्व से विवाद था।
2. उपेक्षा की भावना
उन्होंने खुद कहा कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।
3. कांग्रेस का आकर्षण
कांग्रेस ने उन्हें:
- बड़ी राजनीतिक भूमिका
- जनजातीय मुद्दों पर फोकस
- विकास के वादे
दिए, जो उनके फैसले में अहम साबित हुए।
राजनीतिक प्रभाव
बीजेपी पर असर
- पार्टी की छवि को झटका
- जनजातीय इलाकों में पकड़ कमजोर हो सकती है
- अन्य नेताओं के असंतोष की संभावना बढ़ी
कांग्रेस के लिए फायदा
- जनजातीय वोट बैंक में मजबूती
- चुनावी रणनीति को नई ऊर्जा
- स्थानीय स्तर पर प्रभाव बढ़ा
ऐतिहासिक संदर्भ
Assam की राजनीति में दल बदल नया नहीं है।
सबसे बड़ा उदाहरण है Himanta Biswa Sarma का, जिन्होंने 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी और बाद में राज्य की राजनीति बदल दी।
गर्लोसा का यह कदम उसी तरह का प्रभाव डाल सकता है, हालांकि इसका असर चुनाव परिणामों पर निर्भर करेगा।
आगे की राह
आने वाले समय में:
- बीजेपी को अपने संगठन को मजबूत करना होगा
- कांग्रेस इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश करेगी
- अन्य नेताओं की स्थिति पर भी नजर रहेगी
यह घटनाक्रम चुनावी समीकरणों को बदल सकता है, खासकर पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में।
Nandita Garlosa का बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में जाना असम की राजनीति में एक बड़ा संकेत है। यह न केवल आंतरिक असंतोष को उजागर करता है, बल्कि विपक्ष को भी मजबूत बनाता है।
आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला किस हद तक राजनीतिक समीकरणों को बदलता है।
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