बदायूं संभल में झोला छाप डॉक्टरों की बाढ़ मरीजों के साथ हो रहा खिलवाड़ स्वास्थ्य विभाग बना मूक दर्शक, भ्रूण हत्या रोकने में है नाकाम
इंडिया सावधान न्यूज़ मजहर अंसारी
लखनऊ, बदायूं संभल जनपदों में स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में फल फूल रहा झोला छाप डॉक्टरों का गोरख धंधा मरीजों के साथ हो रहा है खिलवाड़ स्वास्थ विभाग सो रहा कुंभ करनी नींद,जब तक स्वास्थ विभाग जागेगा तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी
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सूत्रों से मिलीं जानकारी के अनुसार जनपद बदायूं और संभल में झोला छाप डॉक्टरों को समझो बाढ़ सी आ गई हो ,जिधर देखो उधर ही कुकरमुत्ते की तरह झोला छाप डॉक्टर नजर आ जायेगा,जिला बदायूँ के कस्बा इस्लाम नगर में तो इन झोलाछाप डॉक्टरों ने आतंक मचा रखा है इस्लाम नगर के हर रोड पर आपको फ़र्ज़ी अस्पताल मिल जायेगे बिल्सी रोड बिसौली रोड सहसवान रोड चंदौसी रोड बहजोई रोड इस्लाम नगर के चारो ओर इन माफिया का कब्जा है,
मिली जानकारी के अनुसार उक्त जनपदों की तहसीलों सहसवान, दातागंज , बिल्सी, बिसौली, गुन्नौर, संभल, आदि में प्रत्येक दिन एक नया अस्पताल या क्लिनिक खोले जा रहे जो कि मानकों पूरा किए बिना और एक बोर्ड लगा दिया जाता है उस पर अमुक डॉक्टर का नाम और डिग्री लिख दी जाती है जबकि उक्त डॉक्टर ने न ही कभी वोह अस्पताल या क्लिनिक की शक्ल तो दूर नाम भी नहीं सुना होगा,अब सबसे हैरत अंगैज बात तो है कि जितने भी यह झोला छाप डॉक्टर हैं
उनकी सबकी आयु लगभग 20 वर्ष से लेकर 40 वर्ष तक की आयु वाले नवयुवक ही लगे हुए हैं,जिसके चलते मरीजों के जीवन के साथ यहां खिलवाड़ किया जा रहा है. जिले में इसकी वजह आए दिन कई मौतें हो चुकी हैं. बिना, डिग्री-डिप्लोमा उपचार कर रहे हैं. विभाग के माध्यम से आज तक कोई कार्यवाही तक नहीं की जाती है, हमारी टीम ने झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किये जा रहे उपचार का अलग-अलग क्षेत्रों में कवरेज कर हकीकत का जायजा लिया.
तब यह पता चला कि
बदलते मौसम के चलते उपरोक्त जनपदों के सैकड़ों गांव में वायरल फीवर और डेंगू जैसे खतरनाक बीमारी का प्रकोप चरम सीमा पर फैला हुआ है, तो वहीं इस बीमारी का फायदा उठाते हुए झोलाछाप चिकित्सक जिनके पास ना तो डिप्लोमा है और ना ही कोई डिग्री यहां तक कुछ डॉक्टर तो कक्षा 8 पास ही हैं, वह भी स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में फल फूल रहे इसकी हकीकत का जायजा लेने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से कवरेज कर मीडिया ने हकीकत का जायजा लिया तो कवरेज के दौरान किस तरह के नजारे देखने के मिले आइए आपको बताते हैं.

जनपद बदायूं के थाना इस्लामनगर क्षेत्र में फर्जी बंगाली डॉक्टर अस्पताल में कंपाउंडर बनकर फोड़ा फुंसी की चीर फाड़ का काम करते हैं, लेकिन इन दिनों निजी अस्पताल खोलकर फोड़ा फुंसी के अलावा डेंगू और वायरल फीवर के साथ- साथ अन्य गुप्त रोगों का उपचार करते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि उनके पास कोई भी डिग्री और डिप्लोमा नहीं है.
सूत्रों की मानें तो उक्त अस्पतालों में और क्लीनिकों में उपरोक्त फर्जी डॉक्टर द्वारा अस्पतालों गर्भ पात भी कराया जा रहा है जिसके एवज में मोटी रकम वसूली जाती है और उसकी गंदगी ग्रामों के घूरों आदि में फेंक दी जाती है,और गर्भपात के दौरान जो भूर्ण होते हैं उसको ग्रामों के आवारा कुत्ते घसीट घसीट कर आबादी वाले क्षेत्रों में ले जाकर डाल देते हैं जिस से समाज और वायु दोनो का वातावरण दूषित होता है।
वहीं, जनपद के अनेकों ऐसे हॉस्पिटल हैं जो कि शोरूम के रूप में खुले हुए है और अच्छा खासा बोर्ड भी लगा हुआ है. अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी के साथ-साथ भ्रूण हत्या का भी काम होता है, यहां तक एमबीबीएस डॉक्टर के नाम भी लिखे हुए होते हैं अनवर स्त्रीरोग विशेषज्ञ पुरुष रोग विशेषज्ञ तथा सेक्स स्पेशलिस्ट और तो और कैंसर जैसी भयानक बीमारी का भी यह झोला छाप डॉक्टर करते नजर आते हैं। सबसे मजेदार बात तो यह है कि बिना किसी स्पोर्ट के यह इलाज करते नजर आते हैं,
ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग को इन फर्जी डॉक्टरों की जानकारी नहीं है, लेकिन कार्यालय से संबंध रखते हुए मंथली सुविधा शुल्क देकर खुलेआम उपचार कर रहे हैं. जिसके चलते झोलाछाप चिकित्सकों के उपचार से अब तक अनगिनत मौतें भी हो चुकी हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक बना रहता है,और तो और इन जनपदों में के ड्रग इंस्पेक्टर प्रत्येक महीना सुविधा शुल्क लेकर अनगिनत फर्जी मेडिकल स्टोर्स भी धड़ल्ले से चलवा रहे हैं उक्त मेडिकल स्टोर्स पर ज्यादर जेनरिक दवाइयां बेची जाती हैं जिनपर उनके मूल से कहीं अधिक पैसा मरीजों से बसूला जाता है और तो और एक्सपायरी दवाइयां भी मरीजों को बेच दी जाती हैं, देखना यह होगा कि योगी राज में इतनी सख्ती के बा बजूद स्वास्थ विभाग, और झोला छाप डॉक्टर बे खोफ होकर जनता के स्वास्थ के साथ कर रहे इस खिलवाड़ को कब बंद करेंगे ।
सूत्रों से मिलीं जानकारी के अनुसार आपको बताते चलें जनपद बदायूं की तहसील सहसवान के मोहल्ला मुहीउद्दीन पुर में विगत वर्षों पूर्व एक डॉक्टर ने एक मरीज को x Ray के नाम पर फ्रीज से एक्स रे कर दिया था और उसके एवज में उस मरीज से उस समय चौदह सौ रुपए ले लिए थे और एक्स रे़ फिल्म किसी और की दे दी थी।

