‘hand मिलाने पर पाबंदी’: प्रतीकात्मक विरोध में पारंपरिक हावभाव से परहेज कर भारत ने पाकिस्तान को दिया बड़ा संदेश
भारत और पाकिस्तान के रिश्ते अक्सर तनाव से भरे रहे हैं. दोनों देशों के बीच कई बार युद्ध हुए हैं, सीमा पर हमेशा तनाव रहता है. कूटनीति भी इन रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखती है. हाल ही में, भारत ने पाकिस्तान के साथ ‘hand मिलाने’ से दूरी बनाकर एक बड़ा संकेत दिया है. यह कदम सिर्फ एक सामान्य हावभाव नहीं है, बल्कि यह एक गहरी प्रतीकात्मक अस्वीकृति है. इस ‘पाबंदी’ का क्या मतलब है, और भारत इसके जरिए क्या कहना चाहता है? यह कदम बताता है कि भारत अब पाकिस्तान के प्रति एक नई नीति अपना रहा है.
पाकिस्तान के प्रति भारत की प्रतीकात्मक अस्वीकृति
‘hand मिलाने’ के कूटनीतिक अर्थ
कूटनीति में, hand मिलाना अक्सर सद्भावना दिखाता है. यह दर्शाता है कि आप बातचीत के लिए तैयार हैं और रिश्ते सुधारना चाहते हैं. जब दो देशों के प्रतिनिधि हाथ मिलाते हैं, तो यह स्वीकार्यता का प्रतीक होता है. यह बताता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं. लेकिन जब कोई देश हाथ मिलाने से मना करता है, तो यह एक साफ संदेश होता है. यह दिखाता है कि वह दूसरे देश के कार्यों को स्वीकार नहीं करता. यह एक मजबूत विरोध का तरीका है, जो बिना शब्द बोले बहुत कुछ कह देता है.
कूटनीतिक बहिष्कार के पिछले उदाहरण
भारत और पाकिस्तान के इतिहास में ऐसे कई मौके आए हैं. दोनों देशों ने पहले भी प्रतीकात्मक विरोध दिखाया है. कभी उच्च स्तरीय वार्ता रद्द हुई है, तो कभी सांस्कृतिक आदान-प्रदान रोके गए हैं. जैसे, क्रिकेट मैच बंद करना या कलाकारों के कार्यक्रमों पर रोक लगाना. ये सभी कदम दिखाते हैं कि जब संबंध तनावपूर्ण होते हैं, तो प्रतीकात्मक हावभाव बहुत मायने रखते हैं. वर्तमान ‘hand न मिलाने’ का कदम भी इसी कड़ी का हिस्सा है. यह भारत की नाराजगी को स्पष्ट रूप से सामने लाता है.

‘hand मिलाने पर पाबंदी’ के पीछे के कारण
उरी और पुलवामा जैसे आतंकवादी हमले
भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में उरी और पुलवामा के आतंकी हमलों ने गहरी दरार डाली. उरी में 2016 में भारतीय सेना के कैंप पर हमला हुआ था. इसमें हमारे कई जवान शहीद हुए थे. इसके बाद 2019 में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ. इस हमले में भी हमारे बहादुर सैनिक जान गंवा बैठे. इन दोनों ही हमलों का आरोप भारत ने पाकिस्तान पर लगाया है. इन घटनाओं ने भारत की जनता और सरकार को बहुत आहत किया है.
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद का प्रायोजन
भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है. हमारे देश में हुए कई हमलों के पीछे पाकिस्तान समर्थित समूह थे. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यह बात उठाई है. पाकिस्तान अक्सर इन आरोपों से इनकार करता है. पर भारत का मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर कार्रवाई नहीं करेगा, रिश्ते सुधर नहीं सकते. यही कारण है कि भारत अब पाकिस्तान को अलग तरीके से जवाब दे रहा है.
कूटनीतिक वार्ता का स्थगित होना
आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत रुक गई है. कई सालों से कोई बड़ी कूटनीतिक वार्ता नहीं हुई है. भारत का साफ रुख है कि ‘आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते.’ पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि वह अपनी धरती से चलने वाले आतंकी समूहों पर कार्रवाई करे. जब तक यह नहीं होता, भारत किसी भी तरह की सामान्य बातचीत के लिए तैयार नहीं है. ‘हाथ न मिलाने’ का यह कदम इसी ठप पड़ी कूटनीति का एक और संकेत है.
भारत का संदेश: कूटनीतिक और राजनीतिक आयाम
पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति
‘hand मिलाने पर पाबंदी’ भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा है. भारत पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना चाहता है. वह दुनिया को दिखाना चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देता है. जब एक देश दूसरे के साथ सामान्य हावभाव भी नहीं दिखाता, तो यह एक मजबूत संदेश देता है. इससे अन्य देश भी सोचने पर मजबूर होते हैं. भारत चाहता है कि पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे पर दबाव बढ़े.

राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता
यह कदम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी दृढ़ता दिखाता है. भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई समझौता नहीं करेगा. यह जीरो-टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है. सरकार यह साफ करती है कि देश की सुरक्षा सबसे ऊपर है. ऐसे प्रतीकात्मक विरोध से देश की जनता में भी यह संदेश जाता है. लोग महसूस करते हैं कि सरकार देश के सम्मान और सुरक्षा के लिए खड़ी है.
घरेलू राजनीति पर प्रभाव
भारत में इस तरह के मजबूत कदम का घरेलू राजनीति पर भी असर होता है. जनता अक्सर ऐसे फैसलों का स्वागत करती है. यह सरकार की मजबूत छवि बनाता है. खासकर जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद की हो. लोग चाहते हैं कि पाकिस्तान को उसकी हरकतों का जवाब मिले. यह कदम सरकार को लोगों की नजरों में और मजबूत बनाता है. यह दिखाता है कि सरकार राष्ट्रीय हितों के लिए पीछे नहीं हटती.
विश्लेषकों और विशेषज्ञों की राय
भारतीय कूटनीतिक विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
भारतीय कूटनीतिक विशेषज्ञ इस कदम को सही मानते हैं. वे कहते हैं कि यह एक मजबूत संदेश है. उनका मानना है कि पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए जवाबदेह ठहराना जरूरी है. यह कदम भारत की दृढ़ता को दिखाता है. कुछ विशेषज्ञ इसे एक ‘कैलकुलेटेड मूव’ भी कहते हैं. उनका मानना है कि जब शब्दों से बात नहीं बनती, तो ऐसे प्रतीकात्मक हावभाव काम आते हैं. यह बताता है कि भारत अब पुरानी राह पर नहीं चलेगा.
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का दृष्टिकोण
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विश्लेषक भी इस घटना को ध्यान से देखते हैं. कुछ लोग इसे भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति के रूप में देखते हैं. वे समझते हैं कि भारत आतंकवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है. अन्य लोग इसे दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों का संकेत मानते हैं. हालांकि, अधिकांश मानते हैं कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत केस है. वे समझते हैं कि भारत की नाराजगी जायज है.
पाकिस्तान से संभावित प्रतिक्रियाएं
पाकिस्तान सरकार और मीडिया से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं. वे इसे भारत का ‘अनुचित व्यवहार’ बता सकते हैं. पाकिस्तान इसे अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम कह सकता है. पाकिस्तान मीडिया इसे भारत की ‘अहंकारी’ कूटनीति के रूप में भी पेश कर सकता है. वे भारत पर शांति भंग करने का आरोप लगा सकते हैं. हालांकि, अंदरूनी तौर पर उन पर आतंकवाद पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ सकता है.
आगे की राह और संभावित परिणाम
भारत-पाकिस्तान संबंधों का भविष्य
इस तरह के प्रतीकात्मक विरोध से भारत-पाकिस्तान संबंध और जटिल हो सकते हैं. यह तुरंत संबंधों को सुधारेगा, ऐसा कहना मुश्किल है. पर यह पाकिस्तान पर एक नैतिक दबाव बनाता है. इससे पाकिस्तान को अपनी नीतियों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. जब तक आतंकवाद का मुद्दा हल नहीं होता, संबंधों में सुधार मुश्किल है. यह कदम बताता है कि भारत अपने रुख पर अडिग रहेगा.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रतीकात्मक कूटनीति की भूमिका
प्रतीकात्मक कूटनीति अकेले आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकती. पर यह एक महत्वपूर्ण उपकरण है. यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचता है. यह बताता है कि एक देश आतंकवाद के खिलाफ कितना गंभीर है. ठोस कार्रवाई जैसे कि आर्थिक प्रतिबंध या सुरक्षा सहयोग भी जरूरी है. लेकिन ये छोटे हावभाव बड़े संदेश देते हैं. वे दिखाते हैं कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कितना प्रतिबद्ध है.
‘hand मिलाने पर पाबंदी’ भारत की एक मजबूत कूटनीतिक चाल है. यह सिर्फ एक साधारण हावभाव नहीं है. यह पाकिस्तान को आतंकवाद के प्रति उसकी नीतियों के लिए एक कड़ा संदेश है. भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी देश के साथ सामान्य संबंध नहीं रखेगा. यह कदम उरी और पुलवामा जैसे हमलों के बाद भारत की जीरो-टॉलरेंस नीति को दिखाता है. भारत की यह स्थिति उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है. यह एक स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी संप्रभुता और जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. यह भारत की दृढ़ कूटनीति का एक नया उदाहरण है, जो दुनिया को भारत के मजबूत इरादे दिखाता है.
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