जगदलपुर, 03 जून छत्तीसगढ़ के बस्तर की कॉफी को अब इसे राजधानी रायपुर के अलावा दिल्ली में
बस्तर कैफे के नाम से बेची जायेगी।
उद्यानिकी विभाग के सूत्रों के अनुसार बस्तर की जलवायु को कॉफी की खेती
के अनुकूल पाया गया है।
यहाँ दो साल पहले दरभा में कॉफी की खेती की शुरुआत की गई। यह प्रयोग अब सफल
रहा। कॉफी का उम्मीद से ज्यादा उत्पादन हो रहा है।
अब विभाग कॉफी की खेती का रकबा बढ़ाने जा रहा है।
विभाग को चार महीने पहले केंद्र सरकार के कॉफी बोर्ड द्वारा ओडिशा के कोरापुट से 265 किलो कॉफी के बीज
आवंटित किए गए थे। इन बीजों के माध्यम से सात लाख पौधे तैयार हो रहे हैं, जोकि अगले महीने तक परिपक्व
हो जाएंगे और इनसे बस्तर जिले के अलग अलग ब्लॉक में खेती की जाएगी।
बस्तर की कॉफी को रायपुर और
दिल्ली में बस्तर कैफे के नाम से बेचने की तैयारी चल रही है। इसकी पैकेजिंग और रिफाइनिंग प्रोसेस को भी पूरी
तरह से कमर्शियल किए जाने की तैयारी हो चुकी है।
बस्तर में कॉफी की खेती को सफल बनाने में जूटे हैं। सूत्रों के
अनुसार जो बीज मिले हैं उससे करीब 7 लाख पौधे जुलाई तक तैयार कर लिए जाएंगे।
यह पौधे कऱीब एक हजार
एकड़ में लगाए जाएंगे। पौधे वरभा, बास्तनार और लोहंडीगुड़ा में लगाए जाएंगे।
54 गांवों में की जाने वाली कॉफी
की खेती के लिए सरकारी जमीन और किसानों की जमीन का उपयोग किया जाएगा।

