Nitish कुमार को भारत रत्न?
जीतन राम मांझी की बड़ी मांग और बिहार की राजनीति पर इसका असर
भारतीय राजनीति की पेचीदा गलियों में कभी-कभी ऐसे बयान आते हैं जो सबको चौंका देते हैं। ऐसा ही एक बयान दिया है बिहार की सत्तारूढ़ व्यवस्था के अहम सहयोगी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के नेता जीतन राम मांझी ने। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री Nitish कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है।
यह कोई सामान्य तारीफ नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और प्रतीकात्मक कदम है। Nitish कुमार पिछले दो दशकों से बिहार की राजनीति और शासन को दिशा दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या यह सम्मान वाकई मिल सकता है या यह महज राजनीतिक रणनीति है? आइए विस्तार से समझते हैं।
भूमिका: बिहार के सर्वोच्च सम्मान की मांग क्यों?
मांझी की अपील: अचानक लेकिन असरदार
पिछले सप्ताह पटना में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जीतन राम मांझी ने यह मांग रखी। उन्होंने सड़कों, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में Nitish कुमार के कामों की सराहना करते हुए कहा—
“मोदी जी को बिहार के सच्चे सपूत को भारत रत्न देना चाहिए।”
मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में एनडीए के भीतर एकजुटता बेहद अहम मानी जा रही है। खुद पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके मांझी का समर्थन राजनीतिक रूप से वजन रखता है। कई लोग इसे आगामी चुनावों से पहले मनोबल बढ़ाने और गठबंधन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।
भारत रत्न: सम्मान की कसौटी और परंपरा
भारत रत्न की शुरुआत 1954 में हुई थी। यह सम्मान कला, विज्ञान, साहित्य और सार्वजनिक सेवा में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। इसके लिए कोई लिखित नियम नहीं—प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति इसे प्रदान करते हैं।
अब तक सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे दिग्गजों को यह सम्मान मिल चुका है। सक्रिय राजनेताओं को यह सम्मान मिलना दुर्लभ है, लेकिन असंभव नहीं।
Nitish कुमार की राजनीतिक विरासत और विकास का रिकॉर्ड
शासन और आर्थिक उपलब्धियां
2005 के बाद से Nitish कुमार के नेतृत्व में बिहार की तस्वीर काफी बदली।
सड़कों और पुलों का बड़ा नेटवर्क विकसित हुआ
गांवों तक बिजली पहुंची (पहले 20% से भी कम, अब 90% से अधिक)
गरीबी दर में उल्लेखनीय गिरावट आई

बालिका साइकिल योजना जैसी पहलों से शिक्षा में भागीदारी बढ़ी। कुछ वर्षों में बिहार की आर्थिक वृद्धि दर 10% तक पहुंची, जो बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
सामाजिक न्याय और समावेशी नीतियां
Nitish कुमार ने महिलाओं और पिछड़े वर्गों को केंद्र में रखा।
2016 में शराबबंदी लागू की गई, जिससे घरेलू हिंसा में कमी का दावा किया गया
EBC और OBC वर्गों के लिए आरक्षण बढ़ाया गया
महिला सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाए गए
इन नीतियों ने उन्हें सामाजिक न्याय के नेता की छवि दी।
बदलते राजनीतिक गठबंधन
Nitish कुमार का राजनीतिक सफर कई बार मोड़ ले चुका है—
2005 में बीजेपी के साथ
2013 में अलगाव
फिर राजद के साथ सरकार
2022 में दोबारा एनडीए में वापसी
आलोचक इसे अवसरवाद कहते हैं, समर्थक इसे राजनीतिक चतुराई। भारत रत्न की संभावनाओं पर यह पहलू भी असर डालता है।
मांझी की मांग के पीछे की राजनीतिक गणित
एनडीए में HAM की भूमिका
HAM की विधानसभा में सीमित सीटें हैं, लेकिन गठबंधन में उसकी भूमिका अहम है। Nitish कुमार के लिए भारत रत्न की मांग कर मांझी अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं और सीट-बंटवारे में मजबूत स्थिति बनाना चाहते हैं।

EBC/OBC वोट बैंक को संदेश
Nitish कुमार और मांझी दोनों ही पिछड़े वर्गों से आते हैं।
भारत रत्न की बात इन वर्गों को यह संदेश देती है कि उनकी राजनीति और योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल रही है। 2025 के चुनावों से पहले यह बड़ा संकेत हो सकता है।
राजनीतिक भारत रत्न का उदाहरण
पहले भी राजनीतिक संदर्भों में भारत रत्न दिए गए हैं—
पी. वी. नरसिंह राव
हाल ही में कर्पूरी ठाकुर (मरणोपरांत)
इससे स्पष्ट है कि राजनीति और सम्मान पूरी तरह अलग नहीं हैं।
भारत रत्न मिलने की प्रक्रिया और चुनौतियां
इस सम्मान के लिए कोई औपचारिक आवेदन प्रक्रिया नहीं होती। गृह मंत्रालय औपचारिक काम देखता है, लेकिन अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का होता है।
मीडिया और जनता की राय भी अहम होती है।

बिहार में समर्थन मजबूत है
राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है—कुछ लोग उपलब्धियों की सराहना करते हैं, तो कुछ राजनीतिक पलटाव पर सवाल उठाते हैं
क्या Nitish कुमार भारत रत्न के हकदार हैं?
मुख्य बिंदु
✔ विकास कार्यों से बिहार की छवि बदली
✔ सामाजिक सुधार और समावेशी नीतियां
❌ बार-बार गठबंधन बदलने पर सवाल
❌ कुछ नीतियों पर विवाद भी
जीतन राम मांझी की मांग ने इस बहस को राष्ट्रीय मंच पर ला दिया है। फिलहाल यह राजनीतिक संदेश ज्यादा लगता है, लेकिन अगर भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल रहीं और एनडीए को बिहार में मजबूती चाहिए, तो Nitish कुमार का नाम गंभीरता से लिया जा सकता है।
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