Bihar

1. तारीखें, प्रक्रिया और चुनावी कैलेंडर

1.1 विधान सभा की अवधि और समय सीमा

  • Bihar विधान सभा (243 सदस्य) की वर्तमान अवधि 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रही है।

  • इसलिए निर्वाचन प्रक्रिया (मतदान, मतगणना, सरकार गठन) को 22 नवंबर से पहले पूरा करना अनिवार्य है।

1.2 चुनावी तारीखों की घोषणा

  • चुनावी कार्यक्रम की घोषणा आज (6 अक्टूबर 2025) को होने की चर्चा थी। 

  • विकल्पों में यह बात थी कि चुनाव छठ पूजा (जो 28 अक्टूबर को है) के बाद कराए जाएँ ताकि त्योहार के ठीक पहले मतदाताओं की परेशानियाँ कम हों।

1.3 मतदान एवं मतगणना तिथियाँ

हालाँकि प्रारंभिक अटकलें और मीडिया रिपोर्ट्स अलग-अलग थीं, लेकिन नवीनतम विश्वसनीय रिपोर्टों की मानें तो:

  • मतदान दो चरणों में होगा — 6 नवंबर और 11 नवंबर 2025 को ।

  • मतगणना और परिणाम घोषित करने की तारीख 14 नवंबर 2025 निर्धारित की गई है।

  • इसके साथ ही चुनाव आचार संहिता लागू कर दी गई है।

  • मतदाता सूची की अंतिम रूप से समीक्षा हो चुकी है, और संशोधित मतदाता सूची जारी कर दी गई है।

  • विशेष “Special Intensive Revision (SIR)” नामक प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की सफ़ाई की गई।

इस तरह, मतदान 6 व 11 नवंबर और परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे — यानी लगभग 8 दिन समय अंतराल रहेगा।

2. चुनावी पृष्ठभूमि: बिहार का राजनीति परिदृश्य

2025 का बिहार विधानसभा चुनाव सिर्फ राज्य स्तर का संघर्ष नहीं होगा, बल्कि अगले लोकसभा चुनावों के लिए एक “परीक्षण” की तरह भी देखा जा रहा है। चलिए इसके प्रमुख घटकों और दशाओं पर नज़र डालते हैं:

Bihar Assembly Election 2020, The Election Programme Can Be Announced By  Tuesday - Amar Ujala Hindi News Live - बिहार विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती  शुरू, मंगलवार तक कार्यक्रम का हो सकता है ...

2.1 मुख्य प्रतिद्वंद्वी धुर समूह

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला रहेगा:

  • NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) — जिसमें मुख्य घटक हैं BJP, JDU और अन्य छोटे सहयोगी दल

  • INDIA / महागठबंधन — जिसमें RJD, कांग्रेस, वामदलों सहित अन्य घटक शामिल हैं

  • नई ताकत — जनता / तीसरी मोर्चा प्रयास — उदाहरण स्वरूप प्रशांत किशोर की Jan Suraaj Party (JSP या JSuch?) और अन्य स्थानीय दलों / उदारवादी विकल्पों का उदय

NDA की स्थिति

  • JDU और BJP की साझेदारी ने पिछले विधानसभा चुनावों में (2020) सफलता हासिल की थी।

  • JDU के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस गठबंधन में महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र हैं।

  • BJP का संगठन और संसाधन तय कर सकते हैं कि वे कितनी सीटों पर स्वायत्त रूप से लड़ें और कितनी सीटें JDU को सौंपें।

  • NDA के लिए चुनौती होगी अंतर्विरोध संतुलन, यानी JDU और BJP दोनों को खुश रखना, और छोटे सहयोगियों (जैसे LJP या अन्य OBC / जातीय दल) को संतुष्ट करना।

महागठबंधन / INDIA की स्थिति

  • RJD (तेजस्वी यादव नेतृत्व में) इस मोर्चे का मुख्य आधार है।

  • कांग्रेस हालांकि राज्य स्तर पर कमजोर रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर युद्ध की भूमिका निभाना चाहती है और “विरासत वोट” बचाने की जंग कह रही है।

  • वामदलों और अन्य दलों का समर्थन और सीट शेयर तय करना इस गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

  • इस गठबंधन को यह दिखाना होगा कि वह विकास, शासन, भ्रष्टाचार नियंत्रण जैसे एजेंडों पर भी प्रतिस्पर्धा कर सकता है, न कि सिर्फ “विरोध मोर्चा” के रूप में।

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तीसरी मोर्चा / नया विकल्प

  • प्रशांत किशोर ने “जन सुआराज” (या इसी तरह का नाम) के रूप में संभावित नई राजनीतिक शुरुआत की संभावना जताई है।

  • वह मत विचलन कर सकता है — विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ मतदाता “दो विरोधी धड़ों के बीच असंतुष्ट” हैं।

  • तीसरे मोर्चे की सफलता निर्भर करेगी कि क्या वह पर्याप्त संसाधन जुटा पाए, संगठन बना पाए और व्यापक समर्थन हासिल कर पाए।

2.2 मतदाता आधार और सामाजिक समीकरण

Bihar में चुनाव केवल पार्टी विपक्ष नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों का भी खेल है — जाति, धर्म, क्षेत्र, विकास मुद्दे, शासन अनुभव आदि।

जातीय समीकरण

  • OBC, दलित, समाजवादी हिस्सों का प्रभाव बड़ा है।

  • यादव, मुसहर, नडवैया, भूमिहार, राजपूत, मुसलमान आदि की जातीय वोट बैंक गठबंधन पर असर डाल सकती है।

  • पिछले चुनावों में जातीय मोर्चे पर गठबंधन बहुत मायने रखता था।

धर्म और अल्पसंख्यक वोट

  • मुसलमानों का वोट महागठबंधन के पक्ष में झुकने की संभावना अधिक मानी जाती है।

  • भाजपा / NDA इस वोट बैंक पर आक्रामक रणनीति अपनाने से हतोत्साहित नहीं होंगे — ध्यान देने की बात है कि किस तरह के ट्वीट्स, बयानों, घेराओं इत्यादि से संवेदनशील माहौल बन सकता है।

विकास और शासन

  • सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरियों जैसे मुद्दे मतदाताओं को प्रभावित करते हैं।

  • इस बार गणना हो चुकी है कि “गर्भनियोजन, महिला आरक्षण, युवा कल्याण” जैसे सामाजिक-लाभों की घोषणाएँ भी चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं।

  • उदाहरण के लिए, केंद्र की घोषणाएँ 19 नए केंद्रीय विद्यालयों के लिए बिहार में करना, चुनावी दृष्टिकोण से एक संचलन माना गया।

  • सरकार ने चुनाव से पहले कई कल्याण योजनाएँ और घोषणाएँ की हैं, जिसे विपक्ष ने “लोकलुभावन” कहा है।

मतदाता सूची विवाद

  • SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में लाखों नाम हटाए गए।

  • विपक्ष दलों ने आरोप लगाए कि यह प्रक्रिया “मानवाधिकारों के उल्लंघन” और “निष्पक्षता में गड़बड़ी” का रूप ले सकती है।

  • एक रिपोर्ट के अनुसार 15 विधान क्षेत्रों में लगभग 67,826 संदेहास्पद डुप्लिकेट वोटर पहचानें गए हैं।

  • इस विवाद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं, और यह मतदाता विश्वास का एक संवेदनशील विषय बन गया है।

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2.3 रणनीति, घोषणाएँ और टकराव

इस चुनाव में कई झड़पें, बयानबाज़ियाँ और रणनीतियाँ देखने को मिल रही हैं:

  • BJP ने तेजस्वी यादव और राहुल गांधी को “कलयुग का रावण” कहकर तंज कसा।

  • कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग “समझौता” कर चुका है और भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है।

  • मोदी सरकार ने चुनाव से पहले शिक्षा एवं कल्याण संबंधी घोषणाएँ की हैं, जैसे नए केंद्रीय विद्यालयों की शुरुआत। कांग्रेस का फोकस अपनी “विरासत वोट बैंक” को बचाना है, जिससे वह विधानसभा स्तर पर कमजोर स्थिति से बाहर निकल सके।

  • चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों पर मोबाइल जमा प्रणाली (mobile deposit facility) जैसी नई व्यवस्था पेश की है ताकि मतदान प्रक्रिया सुगम हो सके।

  • राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है, अधिक तीखे बयान और आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं।

3. संभावित परिदृश्य और चुनौती

चुनावी मुकाबले को देखते हुए, निम्नलिखित संभावनाएँ और चुनौतियाँ सामने आती हैं:

3.1 वोट विभाजन और संघटन

  • तीसरे मोर्चे (Prashant Kishor / जन सुआराज) के कारण मत विभाजन (vote splitting) हो सकता है। यदि वह महागठबंधन या NDA में से किसी के वोट काटता है, तो उस गठबंधन को नुकसान हो सकता है।

  • NDA और महागठबंधन, दोनों को यह देखना होगा कि वे किन सीटों पर “मौन समझौता” करें और किन सीटों पर आपस में टकराव करें।

  • छोटे दलों / स्थानीय गठबंधनों पर निर्भरता बढ़ सकती है — खासकर OBC / जातीय दलों का सहयोग निर्णायक हो सकता है।

3.2 राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय राजनीति

  • राष्ट्रीय मुद्दों जैसे “भारत vs विपक्ष”, “राष्ट्रवाद”, “विकास मॉडल” आदि इस चुनाव में घुल सकते हैं, खासकर BJP की रणनीति में।

  • क्षेत्रीय मुद्दों — जैसे Bihar में बेरोज़गारी, युवा हित, कृषि संकट, बाढ़-क्षेत्र, दलित-आश्रित बस्तियाँ आदि — इनका प्रभाव स्थानीय स्तर पर अधिक होगा।

  • महागठबंधन को यह दिखाना होगा कि वह केवल “विरोध मोर्चा” नहीं है, बल्कि प्रशासन और विकास के एजेंडे पर भी चुनौती दे सकता है।

3.3 बहस और लड़ाई का स्वरूप

  • मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया पर विवाद न्यायालयीन चुनौती और लोकआंदोलन का रूप ले सकती है।

  • सोशल मीडिया, डिजिटल प्रचार, AI आधारित मतदाता लक्षित अभियान आदि इस बार अधिक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

  • बयानबाज़ी, ध्रुवीकरण, जातिगत बयान, धार्मिक भावनाएँ आदि अधिक उग्र रूप ले सकते हैं, यदि दलों ने संयम न रखा।

  • चुनाव आयोग की निष्पक्षता की छवि एवं जनविश्वास इस चुनाव में निर्णायक कारक हो सकती है।

3.4 परिणाम और अनुमान

  • यदि NDA मजबूती बनाए रखे तो उसे बहुमत हासिल हो सकता है — विशेष कर यदि JDU-BJP गठबंधन कम छिद्रों वाला रहे।

  • महागठबंधन को तेजस्वी यादव के नेतृत्व में यह दिखाना होगा कि वह नए वोटर्स को जोड़ सकता है और गठबंधन को अंदरूनी रूप से संतुलित रख सकता है।

  • तीसरे मोर्चे की सफलता — चाहे सीमित स्तर पर हो — यह तय कर सकती है कि कौन किसे नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

  • यदि महामारी, आर्थिक मंदी, बाढ़ या प्राकृतिक आपदाएँ चुनाव से ठीक पहले हों, तो उनका प्रभाव मतदाता मनोवृत्ति पर हो सकता है।

  • चुनाव परिणाम (14 नवंबर) तय करेगा कि बिहार में अगली सरकार किस गठबंधन की बनेगी, और यह पूरे भारत के अगले लोकसभा रणनीति को भी प्रभावित करेगा।

Bihar 2025: अवसर और चुनौतियाँ

Bihar विधानसभा चुनाव 2025 को संक्षिप्त रूप में इस तरह देखा जा सकता है:

  • तारीखें तय हो चुकी हैं — 6 और 11 नवंबर मतदान, 14 नवंबर परिणाम।

  • राजनीतिक समीकरण बेहद जटिल हैं — NDA vs महागठबंधन प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में होंगे, और तीसरा मोर्चा संभावित रूप से वोट विभाजन कर सकता है।

  • सामाजिक, जातीय, क्षेत्रीय एवं विकास मुद्दे इस चुनाव को केवल हार-जीत का संघर्ष नहीं बनाते, बल्कि यह बहुस्तरीय संघर्ष होगा — मतदाता चयन, गठबंधन प्रबंधन, जनविश्वास, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और रणनीतिक चुनावी प्रबंधन।

  • मतदाता सूची विवाद, घोषणाएँ, बयानबाज़ी और प्रचार अभियान इसबार पहले से ज़्यादा तीव्र होंगे।

  • अंततः, यह चुनाव न सिर्फ बिहार की सरकार तय करेगा, बल्कि अगले राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य (लोकसभा) के लिए एक परीक्षा भी साबित होगा।

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