Bihar कैबिनेट गठन: शपथ ग्रहण से पहले बढ़ा सस्पेंस—कौन बनेगा मंत्री, किसे मिलेगा कौन-सा विभाग?
Bihar की राजनीति इस समय जबरदस्त सरगर्मी में है। 2024 की शुरुआत में नीतीश कुमार ने एक बार फिर पलटी मारते हुए एनडीए में वापसी की और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब सबकी नज़रें टिकी हैं कैबिनेट विस्तार पर, जहाँ महत्वपूर्ण मंत्रालयों की बँटवारा जल्द होने की संभावना है।
पटना के गलियारों में चर्चा है कि नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण कुछ ही दिनों में हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही—किसको क्या मिलेगा?
यही सस्पेंस सुर्खियों में है।
सरकार गठन की पृष्ठभूमि
पिछले फ़रवरी में Bihar ने सत्ता का तेजी से बदला हुआ स्वरूप देखा।
नीतीश कुमार ने आरजेडी गठबंधन से नाता तोड़ा और फिर से बीजेपी के पाले में लौट गए।
इस बदलाव के बाद एनडीए विधानसभा में मजबूत बहुमत के साथ सरकार चला रहा है।
38 मंत्रिमंडलों (सीएम के साथ) के बंटवारे पर अभी भी गहन बातचीत जारी है।
राजधानी में रोज़ बैठकों का दौर जारी है—कौन-सा मंत्रालय किसे मिलेगा, किस हिस्से का दावा किस पार्टी का होगा—इन सब पर गहन मोलभाव चल रहा है।

नए गठजोड़ और ताकत का संतुलन
वर्तमान एनडीए में मुख्य साझेदार जेपी(यू) और बीजेपी हैं।
जेपी(यू): 45 विधायक
बीजेपी: 78 विधायक
छोटे दल: HAM, VIP और कुछ निर्दलीय समर्थन
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो:
JD(U) को 15–18 मंत्री पद
बीजेपी को 12–14 मंत्री पद
मिल सकते हैं।
Bihar में राजनीतिक निष्ठाएँ अक्सर बदलती रहती हैं, इसलिए संतुलन रखना जरूरी है। हर पार्टी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में लगी है।
पिछले मंत्रिमंडल से सबक और जनता की अपेक्षाएँ
महागठबंधन सरकार में आरजेडी के बड़े चेहरे अहम मंत्रालय सँभालते थे—तेजस्वी स्वास्थ्य और सड़क जैसे बड़े विभागों के इंचार्ज थे।
इस व्यवस्था पर कई योजनाओं में देरी और प्रशासनिक ढीलापन को लेकर आलोचना हुई थी।
अब जनता नए मंत्रियों से अपेक्षा कर रही है—
बेहतर काम
तेज़ फैसले
और ठोस नतीजे
किसानों, युवाओं, बाढ़-पीड़ित इलाकों और रोज़गार चाहने वालों के लिए तेज़ और भरोसेमंद काम की मांग है।

सबसे बड़े सवाल: कौन संभालेगा कौन-सा विभाग?
सबसे ज्यादा चर्चाएँ इन मंत्रालयों को लेकर हैं—
गृह (Home)
वित्त (Finance)
पथ निर्माण (Road Construction)
यही विभाग सरकार की गति तय करते हैं।
होम, फाइनेंस और सड़क—कौन बनेगा मुखिया?
गृह विभाग (Home):
अगर विजय कुमार सिन्हा स्पीकर ही रहते हैं, तो बीजेपी सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय दिलाने की कोशिश कर सकती है।वित्त (Finance):
यह विभाग JD(U) के किसी अनुभवी चेहरे को मिलने की चर्चा है—जैसे विजय चौधरी।पथ निर्माण (Roads):
Bihar में विकास का पैमाना largely सड़क परियोजनाओं पर निर्भर है।
संभावना है कि बीजेपी इस विभाग पर दावा करे, ताकि रफ्तार बढ़ाई जा सके।
जैसे—पटना–पूर्णिया हाईवे जैसी परियोजनाओं में देरी को लेकर काफी नाराज़गी रही है।
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन: सबसे बड़ी चुनौती
Bihar एक विविध राज्य है—
मगध, मिथिला, कोशी, भोजपुर, और सीमांचल की प्रतिनिधित्व की अपनी मांग है।
जातीय संतुलन भी अहम—
OBC
EBC
SC/ST
और सवर्ण
सभी समुदाय कैबिनेट में उचित प्रतिनिधित्व चाहते हैं।
संभावित स्थिति:

मगध: गया, जहानाबाद से दो मंत्री
मिथिला: दरभंगा के नेता शिक्षा विभाग की दावेदारी रखते हैं
कोशी: बाढ़ प्रभावित इलाकों से जल संसाधन मंत्री की मांग
भोजपुर: ग्रामीण विकास या खाद्य व आपूर्ति की मांग
जरा सी चूक बड़े विरोध का कारण बन सकती है।
छोटे सहयोगियों को खुश रखने की रणनीति
HAM जैसे दल पिछड़े वर्गों पर फोकस के लिए विभाग चाहते हैं।
VIP अपने बुनकर समुदाय के वोटों को देखते हुए शहरी विकास जैसे विभाग का दावा कर सकती है।
2017 में भी नीतीश ने छोटे सहयोगियों को अहमियत देकर सरकार को स्थिर रखा था—इस बार भी वही उम्मीद है।
मंत्रियों के संभावित नाम: वरिष्ठ बनाम वफादार
अभी तय कुछ भी नहीं है, लेकिन चर्चाओं की भरमार है:
JD(U) के संभावित चेहरे
बिजेंद्र यादव — ग्रामीण सड़क या ऊर्जा
श्रवण कुमार — स्वास्थ्य
शेखर सिंह — लघु सिंचाई
BJP के संभावित चेहरे
नितिन नबिन — जनजातीय कल्याण
शाहनवाज़ हुसैन — अल्पसंख्यक कल्याण
रेनू देवी — महिला व बाल विकास
मित्र दल
जीतन राम मांझी (HAM) — सामाजिक न्याय या सामाजिक कल्याण विभाग
कुछ आरजेडी से टूटकर आए नेताओं की भी निगाहें हैं—इनाम की उम्मीद में।
नीतीश कुमार की अंतिम मुहर और गोपनीयता का सवाल
अंतिम फैसला नीतीश कुमार का है—और दिल्ली में बीजेपी नेतृत्व की राय भी मायने रखती है।
दोनों पार्टियों के बीच विभागों पर कड़ा मोलभाव चल रहा है, इसी वजह से देरी हो रही है।
किसी भी आधिकारिक सूची की अनुपस्थिति ने अटकलों को और बढ़ा दिया है।
जैसे ही नाम फाइनल होंगे, सूची सीधे राजभवन भेजी जाएगी।

मंत्रालयों के बटवारे का भविष्य पर असर
विभागों का सही चयन आने वाले सालों को तय करेगा।
2025 के चुनाव पास हैं—इसलिए यह कैबिनेट NDA के लिए ‘परीक्षा’ है।
परफॉर्मेंस-आधारित चयन की जरूरत
शिक्षा
बिजली
स्वास्थ्य
सड़क
इन विभागों में अच्छा प्रदर्शन NDA की छवि मजबूत कर सकता है।
बिहार अभी भी प्रति व्यक्ति आय (₹47,000/वर्ष) में देश के सबसे नीचे राज्यों में है—मजबूत मंत्री ही इसे बदल सकते हैं।
सहयोगियों की नाराज़गी का खतरा
अगर किसी बड़े नेता को छोटा विभाग मिला, तो असंतोष उभर सकता है।
2017 और 2021 जैसे उदाहरण बताते हैं कि छोटा विवाद भी गठबंधन को हिला सकता है।
NDA इस खतरे को समझते हुए सभी को संतुलित हिस्सेदारी देने में जुटा है।
Bihar कैबिनेट गठन और आगे की दिशा
संकेतों के मुताबिक, नया मंत्रिमंडल मध्य-2024 तक आ सकता है।
फिलहाल हर कोई इंतज़ार कर रहा है—कौन बनेगा मंत्री, कौन पाएगा कौन-सा विभाग?
मुख्य बिंदु:
JD(U)–BJP के बीच संतुलन इस कैबिनेट की नींव
वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग अनुभवी चेहरों को
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर गहरा ध्यान
देरी का कारण—पार्टियों के बीच मोलभाव
मजबूत टीम बनेगी तो 2025 चुनाव से पहले NDA का फायदा
Bihar फिर एक नए राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है।
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