Bihar की राजनीति का माहौल
Bihar विधानसभा चुनाव 2025 भारतीय राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं है — यह एक ऐसा परीक्षण है जहाँ राष्ट्रीय दल, क्षेत्रीय गठबंधन और नई राजनीतिक धाराएँ एक साथ मैदान में हैं।
वर्तमान समय में दो बड़े ध्रुव — एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और महागठबंधन / MGB (Mahagathbandhan, जिसने बाद में “I.N.D.I.A.” गठबंधन के हिस्से के रूप में काम किया है) — एक दूसरे से आमने-सामने हैं। इसके अलावा, जन सुआराज पार्टी जैसे नए दलों की एंट्री ने इस चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है।
भी आकर्षित कर रहा है क्योंकि पिछले चुनावों के आंकड़े बहुत करीब रहे हैं, और बिहार में जातिगत समीकरण, विकास एजेंडा, गठबंधन राजनीति, नेतृत्व की छवि एवं वोटरों की असमंजस सभी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
नीचे मैं एक-एक करके चर्चा करूँगा कि कैसे एनडीए चुनावी मोड में है, MGB संघर्ष कर रही है, और एनडीए के बड़े दल बिहार में रण में कैसे उतरे हैं — साथ ही चुनौतियाँ और संभावित चुनावी परिदृश्य।
1. चुनावी मोड में NDA: तैयारी, गठबंधन और आक्रमक रणनीति
सीट बंटवारे एवं गठबंधन समन्वय
एनडीए गठबंधन ने विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। संयोजन इस प्रकार है:
बीजेपी और जेडीयू को प्रत्येक 101 सीटें मिली हैं
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(RV)] को 29 सीटें दी गई हैं
अन्य घटक दलों को 6–6 सीटें आवंटित की गई हैं (जैसे राष्ट्रीय लोक मोर्चा, हिंदुस्ताी अवाम मोर्चा आदि)
यह विभाजन तथ्य यह दर्शाता है कि अब बीजेपी और जेडीयू एक समान भागीदार बन गए हैं, और दोनों का दबदबा गठबंधन में बढ़ा है। यह बदलाव नीतीश कुमार की ‘बड़ी बंधु’ की भूमिका को सीमित कर सकता है।
हालाँकि इस बंटवारे में भी मतभेद सामने आए हैं। चिराग पासवान की पार्टी LJP (RV) ने विशेष रूप से ज़ोर से अपनी मांगें रखी, और कई संसदीय क्षेत्रों और सिटिंग सीटों पर दावेदारी को लेकर विवाद हुआ है।

उदाहरण के लिए, सोनबरसा, राजगीर, मोरवा जैसी सीटों पर JDU और LJP (RV) के बीच खींचतान शुरू हो गई है।
इस प्रकार, एनडीए को अपनी गठबंधन एकता बनाए रखना महत्वपूर्ण है — खिलापी दलों के दावे, टिकट असंतोष और साख दांव पर हैं।
संगठन, प्रचार एवं अभियान
एनडीए ने चुनावी मोड में सक्रिय होने के लिए कुछ कदम पहले ही उठा लिए हैं:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अक्टूबर को बिहार में ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान के तहत एनडीए कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे, जो बूथ-स्तर पर संगठन को सक्रिय करने का संदेश है।
बीजेपी और शीर्ष नेतृत्व ने Bihar की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए बैठकें की हैं, जिसमें यह ज़ोर दिया गया कि चुनावी तैयारी में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है।
एनडीए के नेता गिरिराज सिंह ने दावा किया है कि इस बार एनडीए 225 सीटें जीत सकता है — जो 2010 के रिकॉर्ड (206 सीटें) को पार करेगा।
सीटों के अंतर्गत और छोटी-छोटी रियासतों में स्थानीय नेता जनसम्पर्क और संवाद शिविरों द्वारा सक्रिय किए जा रहे हैं।
इन सब संकेतों से स्पष्ट है कि एनडीए ने चुनावी मोड में प्रवेश कर लिया है — न सिर्फ संगठन स्तर पर, बल्कि चुनावी जनसम्पर्क, दावेदारी और गठबंधन समन्वय स्तर पर भी।
2. MGB संघर्ष कर रही है (Mahagathbandhan / INDIA गठबंधन की चुनौतियाँ)
जबकि एनडीए मजबूत मोड में दिख रहा है, महागठबंधन / MGB को कई स्तरों पर संघर्ष झेलना पड़ रहा है:
आंतरिक मतभेद एवं दलों की अलग-अलग दावेदारी
महागठबंधन, जिसमें RJD, कांग्रेस, वाम दल आदि शामिल हैं, टिकट बंटवारे पर सहमति बनाने में जूझ रहा है।
मुख्य विवाद निम्न हैं:
RJD और कांग्रेस के बीच सीटों की मांग और प्राथमिकता को लेकर मतभेद हैं।
वाम दलों (CPI, CPIML आदि) को भी सीटों की हिस्सेदारी देने की मांग हो रही है, जो कभी-कभी RJD नेतृत्व की योजना से मेल नहीं खाती।
तेजस्वी यादव और उनके पिता लालू प्रसाद यादव के बीच टिकट बंटवारे या भूमिका को लेकर विवाद की अटकलें हैं।
इन आपसी दोषारोपणों और गठबंधन घटकों की ज़रूरतों को समान रूप से संबोधित करने की चुनौती ने MGB को लड़खड़ाने की स्थिति में ला दिया है।

वोटर अधिकार यात्रा, अभियान और गतिशीलता
MGB ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ जैसे कार्यक्रम लॉन्च किए हैं, जिसमें वे आम जनता, ग्रामीण इलाकों और युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
लेकिन इस यात्रा को चुनौतियाँ मिल रही हैं:
संसाधन और जनसमूह समायोजन: एक साथ बड़े अभियान चलाना महंगा और प्रबंधन का कार्य है।
मीडिया कवरेज और आउटरीच सीमित हो सकती है, खासकर ग्रामीण व दूरदराज इलाकों में।
प्रचार सामग्री, अभियान दलों के समन्वय और घोषणाओं में समयबद्धता बनाए रखना एक जटिल कार्य है।
वोट बैंक स्थिरता एवं सर्वेक्षण संकेत
कुछ सर्वेक्षणों ने यह संकेत दिया है कि वोट बैंक में बड़े बदलाव नहीं दिख रहे — यानी MGB पारंपरिक वोट संरचनाओं पर निर्भर है।
Ascendia सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, NDA एक बढ़त पर है, लेकिन MGB अभी भी मजबूत स्थिति में है — यह संकेत है कि संघर्ष की स्थितियाँ परिदृश्य को पलट सकती हैं।
इसलिए MGB अब केवल कार्यक्रम चलाने भर से नहीं, बल्कि रणनीतिक चालों और साझेदारी संतुलन पर निर्भर है।
3. NDA के बड़े दल कैसे रण में उतरे — भाजपा, JDU, LJP et cetera
एनडीए गठबंधन में शामिल हर दल की अपनी भूमिका, दावे और महत्व है। निम्नलिखित भागों में देखा जाए:
भाजपा (BJP)
केंद्रीय नेतृत्व और संसाधन: भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर संगठन और संसाधन की शक्ति रखती है। सीट बंटवारे से पहले ही उसने रणनीति तैयार कर ली है।
प्रतिनिधि नामांकन एवं टिकट वितरण: भाजपा ने उम्मीदवारों की सूची जारी करनी शुरू कर दी है। उदाहरण के लिए, गायक मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाए जाने की खबरें आई हैं।
चुनावी प्रचार और घोषणाएं: भाजपा विभिन्न चुनावी घोषणाएँ कर रही है, जैसे कि बूथ स्तर संगठन को मजबूत करना और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना।
रणनीतिक विज्ञापन और मीडिया प्रबंधन: भाजपा अपनी मीडिया पहुंच, सोशल मीडिया और जनसम्पर्क पर जोर दे रही है।

JDU (जनता दल (यूनाइटेड))
JDU अब भाजपा के साथ लगभग बराबर हिस्सेदारी में घुल गया है, और उसने एनडीए गठबंधन में अपनी भूमिका को फिर से परिभाषित किया है।
यह गठबंधन के अंदर संतुलन बनाए रखने का दबाव है — क्योंकि जेडीयू को यह सुनिश्चित करना है कि उसका राजनीतिक स्वाभिमान और राज्य स्तर की पहचान टिके।
सीट बंटवारे में जो जेडीयू को 101 सीट मिली हैं, वे इसे एक निर्णायक घटक बनाती हैं।
LJP (रामविलास) — Ch irag Paswan की भूमिका
LJP (RV) को 29 सीटों का महत्वपूर्ण हिस्सेदारी मिला है, जिससे वह एनडीए के भीतर ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकता है।
चिराग पासवान ने सीटों की मांग पर जोर दिया और कई सीटों पर दावेदारी जताई है, जिससे JDU और BJP के साथ तनाव बढ़ा है।
LJP (RV) ने महिलाओं और विभिन्न जातियों से उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई है — यह रणनीति गठबंधन में अपनी अनुमति और जनसमर्थन बढ़ाने की कोशिश है।
अन्य घटक दल
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) एवं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 6–6 सीटें दी गई हैं।
ये दल स्थानीय शक्ति केन्द्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, खासकर उन जिलों में जहां इनकी पहचान मजबूत है।
इस प्रकार, एनडीए में सत्ता-संतुलन, हिस्सेदारी विभाजन और घटक दलों की महत्वाकांक्षा इस गठबंधन को गतिशील बनाती है।
4. चुनौतियाँ, बाधाएँ और विशेष पहलू
एनडीए और MGB दोनों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, और चुनाव परिणाम कई अनिश्चित कारकों पर निर्भर करेगा। नीचे कुछ मुख्य चुनौतियाँ और पहलू दिए गए हैं:
चुनाव आचार संहिता एवं कानून व्यवस्था
आचार संहिता लागू होने के बाद ही प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है — अब तक लगभग ₹20.87 करोड़ मूल्य के अवैध सामान जब्त किए गए हैं (नकदी, शराब, ड्रग्स, फ्रीबीज आदि)मतदान सूची (Voter List) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर विवाद हुआ है। MGB ने चक्का जाम की चेतावनी दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वोटर पहचान के लिए आधार कार्ड के अलावा अन्य दस्तावेज भी मान्य किए जाएँ।
इन आयामों से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, न्याय, और जनसामान्य को सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बढ़ जाती है।
मतदान विभाजन, जातीय समीकरण और वोट बैंक निष्कर्षण
Bihar विधानसभा चुनावों में जातिगत राजनीति हमेशा निर्णायक रही है — यादव, राजपूत, दलित, भूमिहार आदि जातियों का प्रभाव अत्यधिक रहा है।
किसी भी गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह इन जातिगत समीकरणों को कैसे जोड़े और संतुलन बनाये।
यदि कोई गठबंधन नए वोट बैंक (जैसे युवाओं, अल्पसंख्यक, ग्रामीण मध्यम वर्ग) को जोड़ पाए, तो परिणाम में बदलाव की संभावना है।

शक्ति संतुलन और नेतृत्व छवि
MGB में यदि नेतृत्व विवाद (तेजस्वी-विभाजन, टिकट बंटवारे) सार्वजनिक हो जाए तो वोटरों को यह संकेत मिल सकता है कि यह गठबंधन अस्थिर है।
NDA के भीतर यदि घटक दलों के बीच झगड़ा बढ़े, तो उसका मतलब है कि गठबंधन की छवि कमजोर हो सकती है।
तीसरा मोर्चा / त्रिकोणीय मुकाबला: जनसुराज और अन्य दलों की भूमिका
जन सुआराज पार्टी जैसी नई राजनीतिक शक्तियाँ त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना जगाती हैं। यदि यह पार्टी कुछ जिलों में तेजी पकड़ लेती है, तो यह दोनों मुख्य गठबंधनों को प्रभावित कर सकती है।
तीसरे मोर्चे की एंट्री से वोट विभाजन हो सकता है, खासकर यदि वे प्रमुख सीटों पर उम्मीदवार उतारें।
सिकुड़ती समयसीमा एवं प्रचार दक्षता
नामांकन जमा करने की समयसीमा, चुनाव आयोग की प्रक्रिया, मीडिया कवरेज, संसाधन प्रबंधन — ये सब दोनों पक्षों को समय-संकट में डालते हैं।
प्रचार सामग्री, रोड शो, जनसभा, सोशल मीडिया अभियानों का संतुलन जरूरी है।
5. संभावित परिणाम और परिदृश्य
नीचे कुछ संभावित रुझान और परिणाम दिए हैं, जिनका चुनावी नतीजों पर प्रभाव पड़ सकता है:
NDA का बढ़ता दबदबा
यदि एनडीए गठबंधन एकजुट रह सके और छोटी-छोटी मतभेदों को नियंत्रित रखे, तो 225 सीटों तक का लक्ष्य (जैसा कि गिरिराज सिंह ने दावा किया है) संभव हो सकता है।
विजय की राह पर बड़े दलों के मजबूत संगठन और मीडिया प्रभुत्व इसे और भी संभव बना सकते हैं।
LJP (RV) को यदि गठबंधन की एक निर्णायक भूमिका निभानी हो, तो वह कुछ सीटों पर निर्णायक दबाव बना सकती है।
MGB के लिए वापसी की स्थिति
यदि MGB सफलतापूर्वक अपनी गठबंधन एकता बनाए और विवादों को नियंत्रित रखे, तो वह NDA को टक्कर दे सकती है।
अगर वोटर अधिकार यात्रा और सामाजिक न्याय-आधारित घोषणाएँ जनता में स्वीकार्य हों, यह MGB को बढ़त दिला सकती है।
चुनावी सर्वेक्षणों में यदि वह कुछ क्षैतिज बढ़त ला पाये तो दबदबा बना सकती है।
त्रिकोणीय मुकाबला की भूमिका
जन सुआराज पार्टी जैसे तीसरे मोर्चे की जीत या बेहतर प्रदर्शन मुख्य गठबंधनों को प्रभावित कर सकती है।
यदि यह पार्टी किसी प्रमुख सीट पर जीत हासिल करती है या अप्रत्याशित वोट तोड़ती है, तो परिणाम अनपेक्षित हो सकते हैं।
सीमांत एवं बचाव की लड़ाइयाँ
कई सीटें ऐसी होंगी जहां जीत हार का अंतर बहुत कम होगा, और इन “स्लिम सीटों” पर छोटी-छोटी घटनाएँ (बलपूर्वक वोटबैंक, प्रचार, प्रत्याशी छवि) निर्णायक होंगी।
दोनों गठबंधन को ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा जहाँ पिछली बार हार हुई थी — एनडीए को उन जिलों को सुधारना है, MGB को अपनी पकड़ मजबूत करनी है।

मुख्यमंत्री पद के लिए झड़प
चुनाव से पहले ही यह सवाल खड़ा हो चुका है कि यदि NDA जीते तो मुख्यमंत्री कौन होगा — क्या यह नीतीश कुमार होंगे या किसी नए चेहरे को प्रमुखता मिलेगी?
MGB में भी यदि सत्ता मिलती है, तो तेजस्वी यादव और अन्य नेताओं में चयन विवाद प्रसारित हो सकता है।
Bihar चुनाव 2025 एक जटिल, दृष्टिपथ परखने वाला और राजनीतिक रणनीति की लड़ाई है।
एनडीए वर्तमान में चुनावी मोड में है — गठबंधन की एकता, आक्रामक प्रचार और बड़ी दावेदारी इसकी ताकत हैं।
लेकिन MGB संघर्ष कर रही है — आंतरिक मतभेद, गठबंधन संतुलन और संसाधन प्रबंधन उसकी चुनौतियाँ हैं।
एनडीए के बड़े दल — BJP, JDU, LJP (RV) — अपनी-अपनी भूमिका में सक्रिय हो गए हैं, सीट मांग, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक क्रियाएँ तेज कर दी गई हैं।
चुनौतियाँ कम नहीं हैं — निर्वाचन प्रक्रिया, वोटर सूची विवाद, जातिगत समीकरण, तीसरे मोर्चे की भूमिका — ये सभी कारक परिणाम प्रभावित कर सकते हैं।
अंततः, यदि गठबंधन एक साथ रह सके और जनसमर्थन जुटा सके, तो NDA को बड़ी सफलता मिल सकती है। यदि MGB अपनी रणनीति ठीक से संचालित करे और गठबंधन एकजुटता दिखाए, तो वह भी प्रतिद्वंद्वी बनने में सक्षम है।
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