Bihar एग्ज़िट पोल 2025: नीतीश कुमार की सियासी जमीन हिलती दिखी – सर्वे में बड़ी गिरावट के संकेत
कल्पना कीजिए—Bihar की सियासत के सबसे अनुभवी नेता की कुर्सी अचानक डगमगा रही है।
2025 Bihar विधानसभा चुनावों के एग्ज़िट पोल ने यही तस्वीर पेश की है।
सर्वे के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी टीम को इस बार बड़ा झटका लग सकता है।
यह सर्वे न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश का ध्यान खींच रहा है, क्योंकि यह सत्ता में संभावित बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
सेक्शन 1: एग्ज़िट पोल के प्रमुख नतीजे – कौन आगे, कौन पीछे
प्रमुख सर्वे एजेंसियों जैसे C-Voter के अनुसार,
एनडीए गठबंधन को 243 सीटों में से 90 से 110 सीटों तक मिल सकती हैं,
जबकि इंडिया (INDIA) गठबंधन यानी विपक्ष को 130 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान है।
यह स्थिति 2020 के मुकाबले उलट है, जब एनडीए ने 125 से ज़्यादा सीटें जीती थीं।
सर्वे में 3-5% की त्रुटि सीमा बताई गई है, यानी परिणाम थोड़े ऊपर-नीचे हो सकते हैं।
हालाँकि, बिहार की वोटिंग दर 62% रही—इतनी अधिक भागीदारी अक्सर सत्ता विरोधी लहर का संकेत होती है।
सर्वे बताते हैं कि करीब 40 अहम सीटों पर मतदाताओं का रुझान निर्णायक रूप से बदला है।

“नीतीश फैक्टर” पर असर: घटती लोकप्रियता का संकेत
नीतीश कुमार की लोकप्रियता में साफ गिरावट दिख रही है।
2020 में जहाँ उनका समर्थन स्तर लगभग 40% था,
वहीं अब यह घटकर 28% पर आ गया है।
कारण?
बार-बार राजनीतिक पलटी (बीजेपी से महागठबंधन और फिर वापसी)।
युवा मतदाताओं में विश्वास की कमी।
और “स्थिर नेतृत्व” की जगह “राजनीतिक असमंजस” की छवि।
युवा मतदाता—खासकर 30 साल से कम उम्र के—अब रोज़गार और शिक्षा जैसे ठोस मुद्दे देख रहे हैं,
ना कि गठबंधन की चालें।
सेक्शन 2: प्रदर्शन में गिरावट के कारण
1. सत्ता विरोधी लहर और प्रशासनिक थकान
पिछले 18 सालों में सत्ता में रहने के बाद जनता थकान महसूस कर रही है।
बेरोज़गारी दर लगभग 15% पर है, और प्रवासी युवाओं का पलायन नहीं थमा।
सड़कें और स्कूलों का विकास धीमा है,
जबकि अपराध दर पिछले साल से 10% बढ़ी बताई गई।
ग्रामीण इलाकों में बाढ़ राहत की देरी और किसानों की उपेक्षा ने नाराज़गी बढ़ाई।
इन सबका नतीजा – “परिवर्तन की चाह” अब खुले तौर पर दिख रही है।

2. गठबंधन की खींचतान और उम्मीदवार चयन की गड़बड़ी
एनडीए के अंदर सीटों को लेकर बड़ी खींचतान चली।
भाजपा और जदयू के बीच असहमति ने ग्राउंड लेवल कार्यकर्ताओं को निराश किया।
वहीं राजद नेता तेजस्वी यादव ने रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर अभियान केंद्रित किया,
जिसका असर ग्रामीण वोटरों पर पड़ा।
सर्वे के अनुसार –
आंतरिक मतभेदों से 20 जिलों में वोट प्रतिशत गिरा,
कमजोर उम्मीदवार चयन से 15–20 सीटों का नुकसान तय माना जा रहा है।
सेक्शन 3: क्षेत्रवार असर – कहाँ सबसे बड़ा झटका
शहरी बनाम ग्रामीण वोटिंग पैटर्न
शहरी इलाकों में एनडीए को भारी नुकसान दिख रहा है।
पटना, गया, भागलपुर जैसे शहरों में सर्वे के अनुसार
70% सीटों पर विपक्ष की बढ़त है।
कारण:
ट्रैफिक और प्रदूषण से नाराज़ मध्यम वर्ग,
और “नई सोच” की तलाश में युवा वोटर।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुकाबला टक्कर का है।
कृषि संकट और बाढ़ राहत जैसे मुद्दों पर
55-45 के अनुपात में विपक्ष को बढ़त मिलती दिख रही है।

जातीय समीकरण में बड़ा बदलाव
Bihar की राजनीति का दिल जाति समीकरण है—और इस बार वही बदल गया है।
अति पिछड़ा वर्ग (EBC) का 60% हिस्सा विपक्ष की ओर झुक गया है।
महादलित वोट नीतीश से खिसककर 70% से घटकर 45% पर आ गया।
यादव और मुस्लिम मतदाता अब भी INDIA गठबंधन के साथ मज़बूती से टिके हैं (करीब 30% कुल)।
एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा—
“नीतीश की जातीय इंजीनियरिंग अब पुरानी पड़ गई है।”
जो समीकरण कभी उनकी सबसे बड़ी ताकत थे,
अब वही उलझन बन गए हैं।
सेक्शन 4: आगे की राजनीति पर असर
नीतीश कुमार का भविष्य
अगर एग्ज़िट पोल सही साबित हुए,
तो नीतीश कुमार पर नेतृत्व छोड़ने का दबाव बढ़ सकता है।
74 साल की उम्र में वे नई पीढ़ी को मौका देने की घोषणा कर सकते हैं।
बीजेपी भी भविष्य में अकेले चुनाव लड़ने का रास्ता अपना सकती है।

हालाँकि नीतीश अपनी “राजनीतिक चालाकी” के लिए जाने जाते हैं—
यदि नतीजे बहुत करीब रहे, तो वे फिर से नई चाल चल सकते हैं।
लेकिन माहौल यही कहता है—यह एक युग का अंत हो सकता है।
राष्ट्रीय राजनीति पर असर
Bihar के नतीजे सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहते।
अगर INDIA गठबंधन को बढ़त मिलती है,
तो यह 2029 लोकसभा चुनाव के लिए विपक्ष का मनोबल बढ़ा देगा।
वहीं, अगर एनडीए को झटका लगा,
तो केंद्र की राजनीति में भी “बिहार इफ़ेक्ट” दिखेगा।
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