एनडीए की सत्ता-साझेदारी तय: Bihar में सरकार गठन और चिराग पासवान के शपथ-ग्रहण बयान का पूरा विश्लेषण
Bihar की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ चुका है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने आखिरकार अपनी सत्ता-साझेदारी का फ़ॉर्मूला तय कर लिया है, जिससे नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा, जदयू और एलजेपी(रामविलास) जैसे प्रमुख दलों के बीच गहन बातचीत के बाद यह सहमति बनी। चिराग पासवान के ताज़ा शपथ-ग्रहण संबंधी बयान ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि क्या यह गठबंधन Bihar को स्थिर नेतृत्व दे पाएगा और राज्य की पुरानी चुनौतियों का समाधान कर पाएगा।
एनडीए का अंतिम सत्ता-साझेदारी फ़ॉर्मूला
एनडीए का यह फार्मूला पार्टियों की ताकत और चुनावी प्रदर्शन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। भाजपा ने सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी हासिल की है, लेकिन जदयू और एलजेपी(आर) को भी मजबूत हिस्से मिले हैं।
मंत्रिमंडल की प्रमुख हिस्सेदारी तय
भाजपा – 17 मंत्रिपद
वित्त, गृह, सड़क जैसी अहम जिम्मेदारियाँ भाजपा के पास रहेंगी।जदयू – 12 मंत्रिपद
शिक्षा, कृषि और जल संसाधन जैसे क्षेत्र जदयू के हिस्से आए हैं।एलजेपी(रामविलास) – 5 मंत्रिपद
ग्रामीण विकास, युवा कार्यक्रम, खाद्य एवं उद्योग जैसे विभाग चिराग की पार्टी को मिले हैं।
चुनावी आंकड़ों के हिसाब से यह तालमेल स्वाभाविक लगता है — भाजपा 78 सीटों, जदयू 45 सीटों और एलजेपी(आर) 23 सीटों के साथ विधानसभा में पहुंचे थे।
नए गठबंधन के प्रमुख नीति-फोकस
वार्ताओं के दौरान रोजगार, विकास और सामाजिक कल्याण पर सबसे ज़्यादा जोर दिया गया। सरकार ने सड़कों, स्कूलों और कृषि क्षेत्र में अधिक निवेश का वादा किया है। गांव-शहर कनेक्टिविटी, किसानों की आय और गरीब परिवारों के लिए कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान रहेगा।
हालाँकि कुछ मतभेद भी दिखे — जदयू जहां जाति-आधारित नौकरियों पर जोर देता है, वहीं भाजपा राष्ट्रीय योजनाओं को तेज़ी से लागू करना चाहती है। फिलहाल स्थिरता दिख रही है, लेकिन लंबी अवधि में नीतिगत मतभेद चुनौती बन सकते हैं।
चिराग पासवान का फैक्टर और शपथ-ग्रहण पर आधिकारिक घोषणा
एलजेपी(आर) ने इस बार उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे चिराग पासवान की राजनीतिक शक्ति बढ़ी। उन्होंने बातचीत में कड़ा रुख अपनाया और दलित प्रतिनिधित्व, युवा मंत्रालय और भ्रष्टाचार विरोधी कदमों पर स्पष्ट मांग रखी।
चिराग पासवान का रुख और उपलब्धियाँ
एलजेपी(आर) की 23 सीटों की जीत ने चिराग की स्थिति मजबूत की।
उन्होंने अपने पिता राम विलास पासवान की विरासत का सम्मान सुनिश्चित करने की मांग रखी।
युवा मंत्रालय और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर उन्हें ठोस आश्वासन मिला।
शपथ-ग्रहण की तारीख का ऐलान
चिराग पासवान ने पुष्टि की कि शपथ-ग्रहण समारोह 15 नवंबर को पटना के राजभवन में होगा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे पहले शपथ लेंगे।
मुख्य साझेदारों की भूमिका: भाजपा और जदयू
भाजपा की रणनीति
भाजपा सत्ता का केंद्र बनी रहेगी, लेकिन सहयोगियों को साथ लेकर चलने की रणनीति भी अपनाएगी।
डिप्टी सीएम पदों में संतुलन रखा जाएगा।
बड़े फैसलों पर भाजपा की पकड़ मजबूत होगी।
संयुक्त नीति समितियाँ गठबंधन को स्थिर रखने में मदद करेंगी।
नीतीश कुमार और जदयू की स्थिति
नीतीश कुमार नौवीं बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
जदयू को 12 मंत्रालय मिले हैं।
स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण रोजगार जैसे विभाग नीतीश की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
भाजपा का समर्थन उन्हें ताकत देता है, लेकिन चिराग पासवान का उभार उन पर राजनीतिक दबाव भी डाल सकता है।
नई सरकार के सामने तात्कालिक चुनौतियाँ
आर्थिक प्राथमिकताएँ और अवसंरचना विकास
बेरोजगारी अभी भी 7.6% के आसपास है।
सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की अवसंरचना योजना का संकेत दिया है।
नए उद्योग और सौर ऊर्जा परियोजनाएँ विकास को गति दे सकती हैं।
कानून-व्यवस्था: एक पुरानी परीक्षा
ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध दर बढ़ी है।
सरकार सीसीटीवी, त्वरित न्यायालय और सामुदायिक निगरानी कार्यक्रमों पर जोर देगी।
दलित सुरक्षा और युवाओं के पुनर्वास में एलजेपी(आर) की भूमिका अहम रहेगी।
स्थिरता या जांच की घड़ी?
एनडीए ने स्पष्ट सत्ता-साझेदारी के साथ सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। 15 नवंबर का शपथ-ग्रहण समारोह नई शुरुआत का संकेत देगा।
अल्पकालिक रूप से गठबंधन मजबूत दिख रहा है, लेकिन जनता अब परिणाम चाहेगी — सड़कें, रोजगार, सुरक्षा और विकास।
भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि ये दल अपने वादों पर कितना खरे उतरते हैं।
Bihar में भाजपा को मिले प्रचंड जनादेश ने उसे नीतीश कुमार के खिलाफ खड़ा कर दिया है।
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