Bihar की वित्तीय छलांग: ₹91,000 करोड़ के अनुपूरक बजट और नरेंद्र नारायण यादव के उपाध्यक्ष चुने जाने का विस्तृत विश्लेषण
Bihar विधानसभा का हालिया सत्र राज्य की वित्तीय नीतियों और राजनीतिक संतुलन—दोनों को नया आकार दे सकता है। विधायकों ने ₹91,000 करोड़ का विशाल अनुपूरक बजट पेश किया, जो अनेक प्रमुख परियोजनाओं को तेज़ रफ़्तार देने के लिए लाया गया है। इसी दौरान, नरेंद्र नारायण यादव को विधानसभा का नया उपाध्यक्ष चुना गया। ये दोनों कदम मिलकर दिखाते हैं कि बिहार की सरकार विकास को गति देने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। चुनाव नज़दीक होने के कारण, पटना से लेकर गाँवों तक लोग इस पर कड़ी निगाह रखे हुए हैं। यह बजट सिर्फ़ आंकड़े नहीं—सड़क, स्कूल और खेती जैसे रोज़मर्रा के मुद्दों पर असर डालने वाला पैसा है।
Bihar बाढ़, बेरोज़गारी और बुनियादी ढाँचे जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। नीतीश कुमार नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इन कमियों को दूर करने की योजना बना रही है। सवाल यही उठता है—क्या यह अतिरिक्त राशि बदलाव की गति बढ़ाएगी? आइए इसे चरणबद्ध तरीके से समझते हैं।
₹91,000 करोड़ के अनुपूरक बजट का विश्लेषण
यह अनुपूरक बजट राज्य की वार्षिक योजना में बड़ा इज़ाफ़ा करता है। यह ₹91,000 करोड़ का है, जबकि मुख्य बजट पहले ही ₹2.78 लाख करोड़ तय किया गया था। यानी खर्च क्षमता में लगभग 33% की बढ़ोतरी। सरकार का कहना है कि यह राशि उन तात्कालिक ज़रूरतों के लिए है जो वर्ष के बीच में सामने आईं।
राशि मुख्य रूप से ऋण और राज्य के बढ़े हुए कर राजस्व से आएगी। कर संग्रहण में सुधार को वित्त विभाग सकारात्मक मान रहा है, हालांकि इससे कर्ज़ का बोझ थोड़ा बढ़ेगा।
फंड का बँटवारा: पैसा किस पर खर्च होगा?
सबसे अधिक राशि इंफ्रास्ट्रक्चर (40%) पर जा रही है—लगभग ₹36,400 करोड़।
इसके बाद 25% सामाजिक कल्याण, यानी ₹22,750 करोड़।
बाकी स्वास्थ्य और शिक्षा — लगभग 20-20%।

कुछ प्रमुख आवंटन:
सड़कों और पुलों के लिए ₹15,000 करोड़, खासकर बारिश के बाद हुए नुकसान की मरम्मत हेतु
50 लाख परिवारों के लिए सीधी सहायता वाली योजनाएँ
10,000 नए शिक्षक भर्ती के लिए राशि
ये प्राथमिकताएँ पिछले साल की बाढ़ और टूटे रास्तों को देखते हुए तर्कसंगत लगती हैं।
राजकोषीय स्थिति और घाटे का प्रबंधन
अतिरिक्त खर्च से राजकोषीय घाटा बढ़कर 3.5% हो जाता है—जो केंद्र द्वारा तय सीमा के भीतर है।
राज्य सरकार बाज़ार से ₹50,000 करोड़ उधार लेने की योजना में है।
GST संग्रह में बढ़ोतरी से भी उम्मीदें बंधी हैं।
हालाँकि, कुछ विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि आय का ग्राफ़ धीमा हुआ या बाढ़ से अतिरिक्त नुकसान हुआ तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मूल बजट से तुलना
मुख्य बजट था: ₹2.78 लाख करोड़ (2024-25)
अब कुल हो जाएगा: ₹3.69 लाख करोड़
यह पिछले साल के लगभग ₹20,000 करोड़ के अनुपूरक बजट से कहीं अधिक बड़ा है।
इससे बिहार का कुल व्यय कई बड़े राज्यों के बराबर हो जाता है।
फायदा किन क्षेत्रों को होगा?
1. इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कें, पुल, शहरों का विकास
₹20,000 करोड़ सड़क सुधार और नई हाईवे परियोजनाओं के लिए
500 किमी नई सड़कों का लक्ष्य
पटना शहरी विकास के लिए ₹10,000 करोड़ (सीवर, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज)
‘घर-घर नल जल’ योजना 1,000 और गाँवों तक
गंगा पर नए पुल जो यात्रा समय आधा करेंगे
इससे 2 लाख नौकरियाँ बनने का अनुमान है।

2. सामाजिक क्षेत्रों में निवेश: स्वास्थ्य और शिक्षा
स्वास्थ्य – ₹15,000 करोड़
ग्रामीण क्षेत्रों में 200 नए स्वास्थ्य केंद्र
टीकाकरण अभियान तेज़
शिक्षा – ₹18,000 करोड़
5 लाख छात्रों को लैपटॉप
शिक्षक प्रशिक्षण के नए कार्यक्रम
3. कृषि और ग्रामीण रोज़गार
₹12,000 करोड़ फसल बीमा और राहत
किसानो के लिए बीज पर 30% सब्सिडी
ड्रिप इरिगेशन 50,000 एकड़ में
MGNREGA में 10% अतिरिक्त रोजगार
सरकार का अनुमान है कि अगले सीज़न में उपज 15% बढ़ सकती है।
नरेंद्र नारायण यादव का उपाध्यक्ष चुना जाना: राजनीतिक महत्व
बजट के साथ ही विधानसभा ने नरेंद्र नारायण यादव (JDU) को उपाध्यक्ष चुना। यह निर्णय राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
यह कदम एनडीए गठबंधन की एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

उपाध्यक्ष की भूमिका क्या है?
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन चलाना
बहसों को नियंत्रित करना
वोटिंग में बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट देना
महत्वपूर्ण समितियों की अध्यक्षता
243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में यह पद बेहद प्रभावशाली है।
नामांकन के पीछे राजनीतिक समीकरण
जदयू ने यादव को इसलिए चुना ताकि उत्तर बिहार के प्रमुख सामाजिक समूहों का प्रतिनिधित्व हो सके।
यह गठबंधन (JDU–BJP) की एकता प्रदर्शित करता है, जो आगामी चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है।
विपक्ष ने आपत्ति जताई, पर संख्या बल के कारण चुनाव सरलता से हो गया।
नए उपाध्यक्ष से अपेक्षाएँ
पूर्व उपाध्यक्षों ने अक्सर तटस्थ होकर सदन चलाया है।
यादव के सामने भी यही चुनौती होगी—विशेषकर कृषि, रोजगार और खर्च से जुड़े विधेयकों पर उनकी भूमिका अहम रहेगी।
अनुपूरक बजट: विधायी प्रक्रिया और जन निगरानी
बजट पेश करने के बाद उस पर बहस होती है, सवाल पूछे जाते हैं, और फिर मतदान होता है।
इस बार विपक्ष ने इसे “चुनावी खर्च” बताते हुए पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
विपक्ष की तत्काल प्रतिक्रिया
रोजगार योजनाओं पर अधिक जानकारी की मांग
कुछ सदस्यों का वॉकआउट का संकेत
RJD नेताओं द्वारा कठोर टिप्पणियाँ

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सरकार ऑनलाइन फंड-ट्रैकिंग सिस्टम लाएगी
CAG ऑडिट के नियम और मजबूत किए जा रहे हैं
‘घोस्ट प्रोजेक्ट’ रोकने के उपाय
व्हिसलब्लोवर सुरक्षा प्रावधान
इससे पारदर्शिता तो बढ़ेगी, पर पिछली गड़बड़ियों को देखते हुए जनता सतर्क है।
आगे क्या?
संभावना है कि बाढ़ या महँगाई जैसी नई परिस्थितियों में एक और अनुपूरक बजट आए।
राज्य 8% वृद्धि दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
राजस्व सुधार और केंद्र से मिलने वाली सहायता आगे की राह तय करेंगे।
Bihar के लिए दोहरी ज़िम्मेदारी
इस सत्र में दो बड़े निर्णय हुए:
₹91,000 करोड़ का अनुपूरक बजट — जो सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि को गति देगा।
नरेंद्र नारायण यादव का उपाध्यक्ष चुना जाना — जो राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
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