Bihar में कानून-व्यवस्था का जनाज़ा?
NEET अभ्यर्थी की दर्दनाक मौत के बाद तेजस्वी यादव का प्रशासन पर तीखा हमला
कल्पना कीजिए—एक युवा छात्रा, डॉक्टर बनने का सपना लिए, पटना के एक परीक्षा केंद्र के बाहर भीड़ में फँस जाती है। NEET परीक्षा देने के लिए वह महीनों की मेहनत के बाद वहाँ पहुँची थी, लेकिन गेट पर मची भगदड़ ने उसकी जान ले ली। यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रहा, बल्कि Bihar की राजनीति में भूचाल ले आया।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे “Bihar की कानून-व्यवस्था का जनाज़ा” करार दिया। उनके बयान के साथ ही बिहार कानून व्यवस्था संकट, NEET अभ्यर्थी की मौत पर तेजस्वी यादव, और Bihar में शासन की विफलता जैसे शब्द सुर्खियों में छा गए। यह घटना छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
चिंगारी: NEET अभ्यर्थी की मौत का पूरा घटनाक्रम
घटना कैसे हुई?
यह हादसा पिछले सप्ताह पटना में एक NEET परीक्षा केंद्र के बाहर हुआ। सुबह करीब 8 बजे, हज़ारों छात्र एक साथ गेट की ओर बढ़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया। 19 वर्षीय छात्रा, जो पास के ही एक गाँव से आई थी, धक्का-मुक्की में गिर पड़ी और कुचल गई। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस और मेडिकल मदद पहुँची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस NEET अभ्यर्थी की मौत ने पूरे बिहार को झकझोर दिया।
प्रशासनिक लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि परीक्षा केंद्र पर पर्याप्त प्रवेश द्वार नहीं थे, जबकि 5,000 से ज़्यादा छात्र पहुँचे थे। भीड़ नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी।
विपक्ष का कहना है कि सुरक्षाकर्मी सिर्फ पहचान पत्र जांचने में लगे थे, भीड़ को नियंत्रित करने का कोई प्लान नहीं था। माता-पिता ने मीडिया को बताया कि 20 मिनट तक मदद की गुहार लगती रही, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था।
आलोचकों का मानना है कि थोड़ी सी बेहतर योजना—जैसे चौड़े रास्ते, बैरिकेडिंग और अतिरिक्त स्टाफ—इस जान को बचा सकती थी।

मीडिया और राजनीति की त्वरित प्रतिक्रिया
घटना के कुछ ही घंटों में टीवी चैनलों पर बहस शुरू हो गई। सोशल मीडिया पर भगदड़ के वीडियो वायरल हो गए। तेजस्वी यादव ने श्रद्धांजलि वीडियो साझा करते हुए न्याय की लड़ाई का ऐलान किया।
अख़बारों ने इसे छात्र सुरक्षा और शासन की विफलता के तौर पर प्रमुखता से छापा। देखते ही देखते NEET अभ्यर्थी की मौत, पटना राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला: “कानून-व्यवस्था का जनाज़ा”
“जनाज़ा” वाले बयान का मतलब
तेजस्वी यादव ने कहा कि Bihar की कानून-व्यवस्था “दफन हो चुकी है।”
उनका यह रूपक सिर्फ एक घटना की आलोचना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है। उनका संदेश साफ था—यह कोई चूक नहीं, बल्कि व्यवस्था का पतन है। पटना की रैली में उनके इस बयान पर लोगों की तालियाँ बताती हैं कि गुस्सा सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है।
पिछली सरकारों से तुलना
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि 2015–2020 के महागठबंधन शासन में अपराध दर में 15% की कमी आई थी।
उनका आरोप है कि मौजूदा NDA सरकार में हालात बिगड़े हैं—NCRB आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले साल अपराध में 20% तक बढ़ोतरी हुई।
उनके मुताबिक, पहले परीक्षा केंद्रों पर पुलिस व्यवस्था बेहतर थी, अब सिर्फ भीड़ और अव्यवस्था दिखती है।
जवाबदेही और जांच की मांग
तेजस्वी यादव ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
उन्होंने हाईकोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच, पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये मुआवज़ा और सुरक्षा चूक पर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग रखी।
उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील भी की।
एक घटना नहीं, सिस्टम की नाकामी
Bihar की परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
हर साल Bihar में 10 लाख से ज़्यादा छात्र NEET जैसी परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन परीक्षा केंद्र और बुनियादी ढाँचा उसी अनुपात में नहीं बढ़ा।
पुरानी इमारतें, सीमित जगह, गर्मी, बिजली कटौती—सब मिलकर जोखिम बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि Bihar को कम से कम 50% अधिक परीक्षा केंद्रों की ज़रूरत है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह पहली घटना नहीं है:
2015: नौकरी परीक्षा के दौरान पुल ढहने से 24 लोगों की मौत
2018: शिक्षक पात्रता परीक्षा में झड़पें, दर्जनों घायल
2023: पेपर लीक के बाद हिंसक प्रदर्शन
इन घटनाओं से साफ है कि सबक बार-बार नज़रअंदाज़ किया गया।
पुलिस और निजी सुरक्षा में तालमेल की कमी
बताया जा रहा है कि हज़ारों छात्रों के लिए सिर्फ 200 पुलिसकर्मी तैनात थे।
गेट पर निजी सुरक्षा गार्ड थे, लेकिन उन्हें भीड़ नियंत्रण का प्रशिक्षण नहीं था। पुलिस और निजी सुरक्षा के बीच तालमेल की कमी ने स्थिति बिगाड़ दी।
सरकार का पक्ष और आगे की घोषणाएँ
सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण हादसा” बताया।
गृह मंत्री ने भीड़ को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि प्रशासन ने नियमों का पालन किया था। बीजेपी नेताओं ने भी इसे दुर्घटना बताकर प्रशासनिक विफलता से इनकार किया।
भविष्य के लिए कदम
सरकार ने अगली परीक्षाओं में:
दोगुनी पुलिस तैनाती
समयबद्ध प्रवेश व्यवस्था
सभी केंद्रों पर CCTV
अतिरिक्त मेडिकल टीमें
जैसे कदमों की घोषणा की है।
जनता और सिविल सोसाइटी की प्रतिक्रिया
पटना में छात्रों ने मार्च निकाला। अभिभावक संगठनों ने राजनीति करने के बजाय ठोस समाधान की मांग की।
सोशल मीडिया सर्वे में 70% लोगों ने सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। साफ है कि गुस्सा सिर्फ विपक्षी राजनीति नहीं, बल्कि आम जनता का भी है।

भरोसे और सुरक्षा का सवाल
NEET अभ्यर्थी की मौत ने Bihar की परीक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
तेजस्वी यादव का हमला विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन सवाल असली है—क्या राज्य अपने छात्रों को सुरक्षित माहौल दे पा रहा है?
भरोसा तभी लौटेगा जब:
परीक्षा ढाँचे में त्वरित सुधार हो
पर्याप्त पुलिस और प्रशिक्षित सुरक्षा हो
स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो
यह सिर्फ राजनीति का मुद्दा नहीं, Bihar के युवाओं के भविष्य का सवाल है।
आप क्या सोचते हैं—क्या ऐसे हादसों के बाद सिर्फ बयान काफी हैं, या सिस्टम में बड़ा बदलाव ज़रूरी है?

