मुकेश सहनी वर्तमान में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के संयोजक हैं और हाल-ही में महागठबंधन के Bihar विधानसभा चुनाव-2025 में उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) चेहरे के रूप में नामित किए गए हैं। उनकी यह उभार Bihar की राजनीति में सामाजिक-वर्गीय समीकरण, गठबंधन-रणनीति एवं वोट बैंक-रियायती दृष्टि से महत्व रखती है।
नीचे हम इस नामांकन की पृष्ठभूमि, कारण, असर, चुनौतियाँ एवं आगे की संभावनाओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
पृष्ठभूमि & राजनीतिक सफर
मुकेश सहनी का राजनीतिक सफर पारंपरिक नहीं रहा; आइए इसके प्रमुख पड़ाव देखें:
सहनी का जन्म 1981 में दरभंगा में मछुआ (मल्लाह/निषाद) समुदाय में हुआ।
उन्होंने मुंबई में काम किया, बॉलीवुड में सेट-डिजाइनर की भूमिका निभाई, और बाद में 2013 के आसपास सामाजिक-संगठन से जुड़े।
2018 में VIP की स्थापना की, जिसका लक्ष्य विशेष रूप से मल्लाह-निषाद जैसे पिछड़े/अति-पिछड़े वर्गों को राजनीतिक पहचान देना था।
2020 में VIP ने कुछ सीटें जीती थीं (चार सीटें) लेकिन बाद में MLAs की पार्टी-बदलाव की घटनाएँ हुईं।
इस बार सभा चुनाव-2025 से पहले महागठबंधन में शामिल होकर सहनी को उपमुख्यमंत्री चेहरे का प्रस्ताव मिला है।
इस तरह, एक छोटे पार्टी-नेता से उठते हुए, सहनी अब बिहार की बड़ी राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
नामांकन: उपमुख्यमंत्री चेहरे क्यों?
उनके नामांकन के पीछे कई रणनीतिक और सामाजिक कारण कम-उल्लेखित नहीं हैं:
वोट बैंक का समीकरण
मल्लाह-निषाद समुदाय Bihar में महत्वपूर्ण अस्तित्व रखते हैं, और उन्हें “अति-पिछड़ा” या EBC श्रेणी में देखा जाता है।
महागठबंधन के लिए यह वर्ग आकर्षित करना ज़रूरी था — इसके लिए सहनी एक प्रतीक बन सकते हैं।गठबंधन में सामंजस्य व शक्ति-संतुलन
RJD-कांग्रेस-VIP-बाएँ दलों के गठबंधन में VIP जैसा छोटा लेकिन रणनीतिक दल शामिल होने से विशाल गठबंधन में सोशल- बेस विस्तृत होता है। सहनी को उपमुख्यमंत्री चेहरे के रूप में देना, गठबंधन के अंदर संतुलन का संकेत भी है।

संदेश-विनियोजन (Symbolic messaging)
“मल्लाह का बेटा”-वाले नारे के माध्यम से सामाजिक पिछड़े वर्गों को यह संदेश देना है कि अब सत्ता में उनकी भागीदारी बढ़ेगी।रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता
NDA खेमे में नीतीश कुमार-वर्चस्व में EBCों का रूझान मजबूत था। महागठबंधन ने सहनी को आगे रखकर इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है।
इन सब कारणों से, सहनी का नामांकन महागठबंधन की रणनीति का एक सार्थक हिस्सा माना जा रहा है।
नामांकन की प्रक्रिया और घोषणाएं
23 अक्टूबर 2025 को महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को अपना मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में घोषित किया, और सहनी को उपमुख्यमंत्री चेहरे के रूप में नामित किया गया।
घोषणाकाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के नेतृत्व में संवाददाता सम्मेलन हुआ जिसमें यह फैसला सार्वजनिक किया गया।
सीट-बाँट व साझेदारी मामले में VIP ने पहले कई सीटों की माँग की थी (40-50 सीटें तक) लेकिन बाद में सहमति बनकर लगभग 15-18 सीटें तय हुईं।
इस प्रकार, सहनी का नामांकन संघ-सम्बंधी, सामाजिक और चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण मोड़ है।
संभावित प्रभाव
इस निर्णय के परिणाम कई दृष्टियों से देखने योग्य हैं:
सामाजिक-वर्गीय समीकरण में बदलाव
यदि मल्लाह-निषाद समुदाय महागठबंधन की ओर अधिक झुकता है, तो यह जमिनी-स्तर पर मत-गतिविधि को प्रभावित कर सकता है।म्हगठबंधन का विस्तार
VIP के शामिल होने से गठबंधन को EBC-वोटर ग्रुप में विस्तार करने में मदद मिल सकती है, जो पहले अधिक NDA फेवर में था।राजनीतिक संदेश व पहचान
सहनी के माध्यम से यह संदेश जाता है कि पिछड़े वर्गों को सिर्फ वोट बैंक नहीं बल्कि नेतृत्व-भागी माना जा रहा है — यह एक प्रतीकात्मक बदलाव भी है।चुनावी गतिशीलता
इस नामांकन से महागठबंधन को गठबंधन-दृश्य में मजबूती मिली है जिसका प्रभाव प्रचार-रणनीति, उम्मीदवार चयन, वोटर-मोवनेंट इत्यादि में दिख सकता है।

चुनौतियाँ और जोखिम
हालाँकि सहनी का नामांकन रणनीतिक रूप से मजबूत दिखता है, किन्तु इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
सीट-आवंटन और गठबंधन तनाव
VIP की पहले की मांगों और सीट-संख्या विवाद को देखते हुए गठबंधन में संतुलन बनाये रखना आसान नहीं होगा। यदि छोटे दल असंतुष्ट होंगे तो गठबंधन में दरारें भी आ सकती हैं।वोट बैंक का वास्तविक असर
हालांकि मल्लाह-निषाद वोट महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यह सवाल है कि सहनी के नेतृत्व में कितने मत प्रक्रियात्मक रूप से बदलेंगे। प्रत्याशी की स्वीकार्यता, स्थानीय विकास-मुद्दे, गठबंधन-ब्रांड आदि भी भूमिका निभाएंगे।प्रतिद्वंद्वी अभियान और मीडिया छवि
विपक्ष और मीडिया सहनी की सीट-लड़ाई, पिछली पार्टी-परिवर्तन, कार्यकाल व उपलब्धियों पर प्रश्न उठा सकते हैं, जो छवि-निर्माण में बाधा हो सकते हैं।गरीब-आधार और वास्तविक नेतृत्व-भरोसा
नामांकन से प्रतीकात्मक संदेश गया है, लेकिन यदि जमीन-स्तर पर विकास-काम नहीं दिखे, तो वोटर निराश भी हो सकते हैं। नेतृत्व-भागीदारी को वास्तविकता में बदलना होगा।
आगे की संभावनाएँ
सहनी का उपमुख्यमंत्री चेहरे के रूप में चयन अब भविष्य की राजनीति के लिए निम्नलिखित संभावनाएँ खोलता है:
यदि महागठबंधन चुनाव जीतता है, तो सहनी को उपमुख्यमंत्री पद मिलने का रास्ता खुला है — हालांकि, गठबंधन-समझौतों के तहत भागीदारी व विभागों का बंटवारा महत्वपूर्ण होगा।
VIP का विस्तार: 2025 के बाद VIP को अगर मजबूत सीटें मिलती हैं और वो लोकल नेतृत्व विकसित कर पाता है, तो बिहार में उसकी भूमिका बढ़ सकती है।
सामाजिक विकास-मुद्दा: सहनी मल्लाह-निषाद समुदायों, आपदा-प्रभावित क्षेत्रों, नदी-घाटी इलाकों में सक्रिय रहे हैं; इसके चलते यदि सरकार में अवसर मिले तो इन वर्गों में विकास-मापदंड सुधर सकते हैं।
गठबंधन-रणनीति का परीक्षण: यह देखना होगा कि चयन-मंच से आगे जाकर महागठबंधन कितनी एकजुटता दिखाता है, और उसका प्रचार-मंच (campaign) कितनी विविधता व सामाजिक समावेशन पर आधारित होगा।

मुकेश सहनी का उपमुख्यमंत्री चेहरे के रूप में नामांकन Bihar की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक-वर्गीय बदलाव, गठबंधन-रणनीति एवं आगामी विधानसभा चुनाव-2025 के लिए महागठबंधन की दिशा को प्रदर्शित करता है।
हालाँकि चुनौतियाँ हैं — सीट-बाँट, वोट बैंक वास्तविकता, गठबंधन अंदरूनी समीकरण — लेकिन यदि सहनी और VIP गठबंधन के अंदर प्रभावी भूमिका निभाते हैं, जमीन पर उतरते हैं और विकास-मुद्दों को पकड़ते हैं, तो उनकी सफलता सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक राजनीतिक बदलाव बना सकती है।
चुनाव के बाद, यह देखना रोचक होगा कि सहनी को कितनी भूमिका मिलती है, उपमुख्यमंत्री पद की प्रत्याशा कितनी साकार होती है, और मल्लाह-निषाद समुदाय के वोटर-मूड में कितना परिवर्तन आता है।
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