Bihar की सुरक्षा व्यवस्था को बड़ा बल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में शामिल होंगी चार बुलेटप्रूफ रेंज रोवर एसयूवी
Biharमें शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा को और मज़बूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले के लिए चार बुलेटप्रूफ रेंज रोवर एसयूवी खरीदने को मंज़ूरी दे दी गई है। ये अत्याधुनिक वाहन बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच मुख्यमंत्री को उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रदान करेंगे।
कल्पना कीजिए—भीड़भाड़ वाली सड़कों से गुजरता एक काफिला, जहां मुख्यमंत्री आधुनिक बख़्तरबंद तकनीक से लैस वाहन में सुरक्षित बैठे हों। यही सुरक्षा कवच अब बिहार के मुख्यमंत्री के काफिले को मिलने जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देशभर में राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
नया बख़्तरबंद बेड़ा: विशेषताएं और तकनीक
खरीद प्रक्रिया और वाहन की बुनियादी विशेषताएं
Bihar सरकार मुख्यमंत्री के काफिले में चार रेंज रोवर एसयूवी शामिल करने जा रही है। इन लक्ज़री वाहनों का चयन उनकी ताक़त, भरोसेमंद परफॉर्मेंस और सुरक्षा क्षमता को देखते हुए किया गया है। मूल रूप से ये रेंज रोवर वाहन शक्तिशाली V8 इंजन के साथ आते हैं, जो 500 से अधिक हॉर्सपावर उत्पन्न करता है।
ये एसयूवी शहरी सड़कों के साथ-साथ ग्रामीण और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी बेहतरीन प्रदर्शन करने में सक्षम हैं, जो Bihar की भौगोलिक परिस्थितियों के लिहाज़ से अहम है। एक सामान्य रेंज रोवर की कीमत लगभग 1.2 करोड़ रुपये होती है, लेकिन बुलेटप्रूफ अपग्रेड के बाद प्रति वाहन लागत 2.5 से 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो सकती है।
खरीद प्रक्रिया राज्य सरकार के तय नियमों के तहत की जा रही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और इन वाहनों की डिलीवरी 2026 के मध्य तक होने की उम्मीद है।
बुलेटप्रूफिंग और बैलिस्टिक सुरक्षा स्तर
इन रेंज रोवर एसयूवी को B7 बैलिस्टिक प्रोटेक्शन स्टैंडर्ड के अनुसार बख़्तरबंद बनाया जाएगा, जो नागरिक वाहनों में सबसे उच्च सुरक्षा स्तर माना जाता है। यह सुरक्षा स्तर AK-47 जैसी असॉल्ट राइफलों से चली गोलियों को भी रोकने में सक्षम होता है।
वाहनों के शीशे और बॉडी पैनल विशेष लेयर्ड मटेरियल से बने होंगे, जो गोली लगने पर टूटते नहीं हैं। इसके अलावा, नीचे की तरफ़ ब्लास्ट-प्रूफ अंडरबॉडी शील्ड होगी, जो सड़क किनारे विस्फोटों से सुरक्षा प्रदान करती है।

अन्य प्रमुख सुरक्षा फीचर्स में शामिल हैं:
रन-फ्लैट टायर, जो गोली लगने के बाद भी लगभग 30 मील तक वाहन चलने देते हैं
आग लगने की स्थिति में स्वतः सक्रिय होने वाली फायर सप्रेशन सिस्टम
धुएं या गैस की स्थिति में ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम
जीपीएस जैमर, जिससे वाहन की ट्रैकिंग रोकी जा सके
बुलेटप्रूफिंग के कारण वाहन का वज़न लगभग 900 किलोग्राम तक बढ़ जाता है, लेकिन इसके बावजूद ड्राइविंग कंट्रोल बनाए रखने के लिए चेसिस को विशेष रूप से मज़बूत किया गया है।
हाई-एंड बख़्तरबंद वाहनों की ज़रूरत क्यों?
मुख्यमंत्री की मौजूदा सुरक्षा आवश्यकताएं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत की सुरक्षा श्रेणी में Z-प्लस सुरक्षा प्राप्त है, जो सबसे उच्च स्तरों में से एक है। इसमें 24×7 सुरक्षा, खुफिया निगरानी और लगातार खतरे का आकलन शामिल होता है।
हाल के वर्षों में राजनीतिक कार्यक्रमों, जनसभाओं और विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ी हैं। पहले मुख्यमंत्री के काफिले में बख़्तरबंद टोयोटा लैंड क्रूज़र जैसे वाहन इस्तेमाल होते थे, जो बुनियादी सुरक्षा तो देते थे, लेकिन नई रेंज रोवर एसयूवी की तुलना में तकनीकी रूप से कम उन्नत थे।
नई एसयूवी 360-डिग्री सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिससे जिले-दौरे और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान जोखिम काफी कम हो जाएगा।
वित्तीय प्रभाव और सार्वजनिक बहस
चार बुलेटप्रूफ रेंज रोवर एसयूवी पर कुल खर्च 10 से 12 करोड़ रुपये तक हो सकता है। चूंकि यह खर्च सार्वजनिक धन से किया जा रहा है, इसलिए इस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कुछ लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही पैसा शिक्षा, स्वास्थ्य या सड़कों पर नहीं लगाया जा सकता था।

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। तुलना करें तो उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल अपने मुख्यमंत्री के लिए करीब 16 करोड़ रुपये के बख़्तरबंद वाहन खरीदे थे। केंद्र सरकार के VVIP बेड़े पर हर साल इससे कहीं अधिक खर्च होता है।
सरकार का तर्क है कि मजबूत सुरक्षा से किसी भी संभावित हमले या हादसे से बचाव होगा, जिससे दीर्घकालिक नुकसान और राजनीतिक अस्थिरता को रोका जा सकेगा।
काफिले में शामिल होने के बाद की तैयारियाँ
काफिले की आवाजाही में बदलाव
चार एक जैसे बख़्तरबंद वाहन शामिल होने से काफिले की रणनीति बदलेगी। मुख्यमंत्री आवश्यकता पड़ने पर किसी भी वाहन में बैठ सकते हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करना आसान होगा।
वाहनों की औसत गति 60 से 80 किमी प्रति घंटा रखी जाएगी। हर यात्रा से पहले वैकल्पिक रास्तों और आपातकालीन निकासी मार्गों की योजना बनाई जाएगी।
ड्राइवरों और सुरक्षा कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, क्योंकि बख़्तरबंद वाहन सामान्य गाड़ियों से भारी होते हैं और उनकी हैंडलिंग अलग होती है।
रखरखाव और बुनियादी ढांचा
इन वाहनों के रखरखाव के लिए मुख्यमंत्री आवास परिसर में विशेष गैराज तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें सीसीटीवी निगरानी और अंडरबॉडी स्कैनिंग की सुविधा होगी।
रन-फ्लैट टायर और बख़्तरबंद हिस्सों की नियमित जांच जरूरी होगी। अनुमान है कि प्रति वाहन सालाना रखरखाव खर्च लगभग 40–50 लाख रुपये तक हो सकता है। इसके लिए अधिकृत लैंड रोवर सर्विस सेंटर से करार किया जाएगा।
भारत और दुनिया में VVIP सुरक्षा की मिसालें
अन्य राज्यों में सुरक्षा वाहन
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बुलेटप्रूफ मर्सिडीज़ का इस्तेमाल करते हैं, जिनकी खरीद 2024 में की गई थी। तमिलनाडु में राज्यपाल के काफिले में बख़्तरबंद ऑडी वाहन शामिल हैं। केरल ने हाल ही में अपेक्षाकृत कम लागत वाले बुलेटप्रूफ टोयोटा फॉर्च्यूनर खरीदे हैं।
प्रधानमंत्री के काफिले में इस्तेमाल होने वाले विशेष बख़्तरबंद वाहन देश में सुरक्षा मानकों की मिसाल माने जाते हैं।

वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम
अमेरिकी राष्ट्रपति का वाहन “द बीस्ट” एक चलते-फिरते टैंक जैसा होता है। ब्रिटेन और यूरोप में भी B7 स्तर के बख़्तरबंद वाहन इस्तेमाल किए जाते हैं। Bihar द्वारा रेंज रोवर का चयन वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप माना जा रहा है।
Bihar के नेतृत्व के लिए सुरक्षित रास्ता
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में शामिल होने वाली ये चार बुलेटप्रूफ रेंज रोवर एसयूवी Bihar की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और निर्णायक कदम हैं। ये वाहन ताक़त, प्रतिष्ठा और अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीक का संयोजन हैं।
हालांकि इस फैसले पर खर्च को लेकर बहस ज़रूर होगी, लेकिन सरकार का मानना है कि सुरक्षित नेतृत्व ही स्थिर शासन की बुनियाद है। आने वाले समय में ये वाहन मुख्यमंत्री की यात्राओं को कहीं अधिक सुरक्षित बनाएंगे।
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