bihar

Bihar का अटूट जनादेश: कैसे BJP की जबरदस्त बढ़त ने नीतीश कुमार की राजनीतिक अनिश्चितता को निष्प्रभावी कर दिया

Bihar की राजनीति अक्सर एक ऐसे खेल जैसी लगती है, जहाँ कुर्सियाँ बदलते ही गठबंधन भी बदल जाते हैं। वर्षों से नीतीश कुमार और उनकी पार्टी—जदयू—अचानक फैसलों और अप्रत्याशित गठबंधन-परिवर्तनों के लिए मशहूर रही है। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों ने तस्वीर पलट दी है। इस बार बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिस तरह का जनादेश मिला है, उसने राज्य की राजनीति के समीकरण को पूरी तरह नए ढांचे में ढाल दिया है।
अब BJP को नीतीश कुमार की संभावित “एक और पलटी” का डर उतना नहीं रह गया—क्योंकि पार्टी की स्वतंत्र ताकत पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।

2024 का जनादेश: BJP की वापसी को कैसे समझें

वोट शेयर और सीटों का गणित

2024 के लोकसभा चुनावों में बिहार में BJP ने अपने बलबूते 12 सीटें जीतीं—2019 की तुलना में बढ़त दर्ज करते हुए। वोट शेयर बढ़कर लगभग 25% के आसपास पहुँचा, जो प्रदेश में उसकी बढ़ती पकड़ का संकेत है।

अगर इसमें NDA के अन्य घटक जैसे चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की 5/5 सीटों की जीत जोड़ें, तो पूरा गठबंधन 40 में से 30 सीटों के साथ बिहार में स्पष्ट रूप से हावी दिखा। जदयू ने भी 12 सीटें जीतीं लेकिन इन सबके बीच BJP की अकेली क्षमता का ग्राफ सबसे ऊपर रहा।

ग्रामीण इलाकों में भारी मतदान और BJP की कई पारंपरिक कमजोर सीटों पर सुधार ने इस वृद्धि को मजबूत किया।

बिहारः बीजेपी के खिलाफ जेडीयू ने खोला मोर्चा, क्या आर-पार के मूड में हैं  नीतीश? - jdu cm nitish kumar attack on bjp tweet ajay alok speaker vijay  kumar sinha ntc -

जातीय समीकरणों का बदलना

2024 में Bihar में जातिगत वोटिंग पैटर्न में महत्वपूर्ण परिवर्तन दिखे:

  • EBC वर्ग (30%+ वोटर)—जिन्हें कभी जदयू का मुख्य आधार माना जाता था—अब बड़ी संख्या में BJP की ओर झुके।

  • दलित और महादलित वोट—कई क्षेत्रों में RJD के बजाय BJP को मिले।

  • यादव वोट बैंक के किनारों पर भी दरारें नज़र आईं, जो RJD के लिए चेतावनी है।

यह बदलाव एक व्यापक हिंदू वोट समेकन की ओर इशारा करता है जिसने BJP की स्थिति को और मजबूत किया।

“मोदी फैक्टर” बनाम स्थानीय नेतृत्व

Bihar में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता आज भी बेहद ऊँची है। उनकी रैलियों और विकास-आधारित संदेश ने जनभावनाओं को प्रभावित किया।
लेकिन इसके साथ राज्य स्तरीय नेताओं—जैसे सम्राट चौधरी—की सक्रियता को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
राष्ट्रीय ब्रांड + स्थानीय संगठन
= ऐसा गठजोड़ बना जिसने गठबंधन की पुरानी कमजोरियों को ढँक दिया।

bihar CM Nitish kumar hit back at BJP said BJP leader keep on talking not  take notice of their words सीएम नीतीश ने कहा- भाजपा वाले बोलते ही रहते हैं,  उनकी बातों

“पुलिंग ए नीतीश”: बदलावों का इतिहास और उसका असर

नीतीश कुमार के पिछले गठबंधन बदलाव

  • 2013: NDA छोड़ा, मोदी का विरोध जताया, UPA में गए।

  • 2015: RJD+Congress के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव जीता।

  • 2017: अचानक इस्तीफा दे वापस NDA में लौट आए।

  • 2022: फिर NDA छोड़ा और RJD के साथ सरकार बनाई।

हर बार बिहार की राजनीति हिल गई—कभी चुनाव हुए, कभी रातों-रात सरकारें बदलीं।

राजनीतिक कारण और इस्तेमाल किए जाने वाले दबाव बिंदु

  • नीतीश हर बार अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता और नेतृत्व भूमिका सुरक्षित रखना चाहते रहे।

  • जदयू की सीट ताकत, चाहे 15 हो या 20, उन्हें “किंगमेकर” का स्थान देती रही।

  • लेकिन बार-बार के बदलावों ने उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाया और इस रणनीति के लाभ कम होते गए।

bihar CM Nitish kumar hit back at BJP said BJP leader keep on talking not  take notice of their words सीएम नीतीश ने कहा- भाजपा वाले बोलते ही रहते हैं,  उनकी बातों

अब क्यों BJP सुरक्षित है: संरचनात्मक कारण

बहुमत की दहलीज़ और निर्भरता का कम होना

Bihar विधानसभा में 122 बहुमत के लिए चाहिए।
NDA अभी भी 125+ के आसपास का आँकड़ा रखता है, जिसमें:

  • BJP → ~78

  • जदयू → ~43

  • अन्य साथी → शेष सीटें

अर्थात अगर जदयू अलग भी हो जाए, BJP के पास:

  • छोटे दलों का समर्थन,

  • और नए चुनाव में बड़े लाभ की संभावना
    —दोनों विकल्प मौजूद हैं।

BJP का कैडर बनाम जदयू का नेतृत्व-केंद्रित मॉडल

  • BJP → गहराई तक संगठन, बूथ-स्तर पर मजबूत नेटवर्क, “पन्ना प्रमुख” प्रणाली

  • जदयू → नीतीश-केन्द्रित, शीर्ष नेतृत्व के बिना कमजोर

इसलिए BJP की राजनीतिक स्थिरता जदयू से कहीं अधिक मजबूत है।

केंद्रीय परियोजनाओं का असर

BJP की केंद्र सरकार ने बिहार में पिछले वर्षों में बड़ी परियोजनाएँ शुरू कीं—
जैसे AIIMS दरभंगा, बड़े हाईवे, और हज़ारों करोड़ की विकास योजनाएँ।

इन योजनाओं पर नीतीश का निर्भर होना किसी भी “पलटी” की कीमत बढ़ा देता है।
किसी तरह की राजनीतिक अस्थिरता विकास कार्यों को रोक सकती है—जो जदयू नहीं चाहेगा।

bihar CM Nitish kumar hit back at BJP said BJP leader keep on talking not  take notice of their words सीएम नीतीश ने कहा- भाजपा वाले बोलते ही रहते हैं,  उनकी बातों

अगर जदयू टूटे तो BJP की रणनीति: एक संभावित प्लेबुक

1. विधायी तैयारी

  • जदयू के असंतुष्ट विधायकों से संपर्क

  • निर्दलीयों को साथ जोड़ना

  • कैबिनेट और समितियों में रणनीतिक नियुक्तियाँ

2. विपक्ष की कमजोरी का लाभ

  • RJD में आंतरिक तनाव

  • कांग्रेस का गिरता ग्राफ

  • INDIA गठबंधन की राष्ट्रीय अस्थिरता

ये सभी BJP को राजनीतिक राहत देते हैं।

3. दो संभावित रास्ते

  • तत्काल चुनाव → BJP को 100+ सीटों का मौका

  • अल्पमत सरकार का प्रबंधन → सीमित समर्थन के साथ सरकार चलाना

दोनों ही परिस्थितियों में पार्टी के लिए खतरे कम हैं।

bihar CM Nitish kumar hit back at BJP said BJP leader keep on talking not  take notice of their words सीएम नीतीश ने कहा- भाजपा वाले बोलते ही रहते हैं,  उनकी बातों

Bihar में नई स्थिरता की शुरुआत

2024 का जनादेश सिर्फ जीत नहीं—एक राजनीतिक संतुलन में बदलाव है।
अब Bihar की राजनीति किसी एक नेता की अप्रत्याशित चाल पर निर्भर नहीं रह गई है।

BJP की ताकत के तीन प्रमुख आधार:

  1. स्वतंत्र चुनावी शक्ति—12 लोकसभा सीटें और बढ़ता वोट शेयर

  2. गहन संगठनात्मक पकड़—सीट-दर-सीट काम

  3. जातीय आधार का विस्तार—EBC, दलित, महादलित और अन्य वर्गों में पैठ

इससे गठबंधन की राजनीति में BJP की भूमिका तय हो चुकी है—और नीतीश कुमार की “पलटी” अब पहले जितनी निर्णायक नहीं रह गई।

Under Watch में 13 प्रदूषण हॉटस्पॉट: दिल्ली ने प्रदूषकों पर कार्रवाई के आदेश दिए

Follow us on Facebook

India Savdhan News | Noida | Facebook