Elamanchili

Elamanchili रेलवे स्टेशन के पास टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस में आग, 1 यात्री की मौत

आंध्र प्रदेश के Elamanchili रेलवे स्टेशन के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस के दो डिब्बों में अचानक आग लग गई। यह एक सामान्य रेल यात्रा थी, जो कुछ ही पलों में भयावह हादसे में बदल गई। इस दुर्घटना में एक यात्री की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

यह घटना न केवल पीड़ित परिवारों के लिए गहरा सदमा है, बल्कि एक बार फिर रेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

पटरियों पर अचानक लगी आग: क्या हुआ?

घटना का विवरण और शुरुआती प्रतिक्रिया

रात करीब 8 बजे, ट्रेन संख्या 18006 (टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस) दक्षिण की ओर जा रही थी, तभी S4 और S5 कोच से धुआं निकलता दिखाई दिया। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया। यात्रियों ने तुरंत चेन पुलिंग की, जिससे ट्रेन एलमंचिली स्टेशन से कुछ दूरी पहले रुक गई।

रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां, पुलिस और मेडिकल टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि तब तक एक यात्री की जान जा चुकी थी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन एक जान जाना इस घटना की गंभीरता को दिखाता है।

ट्रेन का रूट और इसका महत्व

टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस झारखंड के जमशेदपुर से केरल के कोच्चि तक चलती है और लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी तय करती है। यह ट्रेन आंध्र प्रदेश के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरती है और रोज़ाना हज़ारों यात्रियों के लिए जीवनरेखा है।

Elamanchili, श्रीकाकुलम ज़िले का एक शांत स्टेशन है, लेकिन इस रूट पर ट्रैफिक काफी ज़्यादा रहता है। ऐसे में इस तरह की घटना पूरे ईस्ट कोस्ट रेलवे नेटवर्क को प्रभावित करती है।

आग की लपटें, चीख-पुकार के बीच ट्रेन से नहीं उतर पाए 70 साल के बुजुर्ग, एर्नाकुलम हादसे का ऐसा था मंजर - train fire incident two coaches of Tata Ernakulam Express One

राहत और बचाव कार्य

आग पर काबू पाने की कोशिश

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग कोच S4 के नीचे (अंडरकैरेज) से शुरू हुई और तेज़ी से S5 तक फैल गई। आशंका है कि यह किसी इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से हुआ।

दमकल विभाग की टीमों को आग बुझाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। ट्रेन मोड़ (कर्व) पर खड़ी होने के कारण भारी उपकरण पहुंचाना मुश्किल था। करीब दो घंटे बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।

यात्रियों की निकासी और हताहतों की पुष्टि

करीब 400 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों को प्राथमिकता दी गई। कई यात्रियों को हल्की चोटें और धुएं से सांस की तकलीफ हुई, जिन्हें मौके पर ही इलाज दिया गया।

दुर्भाग्य से, कोच S5 में फंसे एक मध्य आयु के यात्री की मौत हो गई। रेलवे ने घटना पर दुख जताया और परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

आग लगने के कारणों की जांच

रेलवे सुरक्षा अधिकारियों की प्रारंभिक जांच

रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) और अन्य जांच टीमें मौके पर पहुंचीं। शुरुआती जांच में एसी सिस्टम की वायरिंग में खराबी को संभावित कारण माना जा रहा है। फिलहाल तोड़फोड़ या साजिश की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

जले हुए हिस्सों के सैंपल लैब भेजे गए हैं और पूरी रिपोर्ट आने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

कोच मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच

बताया गया है कि संबंधित कोच 2018 में बने थे और हाल ही में उनका नियमित निरीक्षण हुआ था। हालांकि, रिकॉर्ड में कुछ पार्ट्स बदलने में देरी के संकेत मिले हैं। अब पूरे रेक की मेंटेनेंस हिस्ट्री की गहन जांच की जा रही है।

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रेल सेवाओं पर असर और यात्रियों को मदद

ईस्ट कोस्ट मेन लाइन पर असर

इस हादसे के कारण Elamanchili सेक्शन पर रेल यातायात करीब 12 घंटे तक बाधित रहा। लगभग 50 ट्रेनें प्रभावित हुईं, कई को डायवर्ट किया गया और कई घंटों की देरी हुई।

यात्रियों के लिए सहायता और मुआवजा

रेलवे ने हेल्प डेस्क और राहत शिविर लगाए। यात्रियों को भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा दी गई।

  • घायल यात्रियों को रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के माध्यम से मुआवजा

  • मृतक के परिजनों को ₹5 लाख एक्स-ग्रेशिया राशि

  • सामान जलने पर टिकट दिखाने पर रिफंड/मुआवजा

जानकारी और मदद के लिए रेलवे हेल्पलाइन 139 सक्रिय रही।

रेल अग्नि सुरक्षा पर सवाल

भारत में इससे पहले भी कई रेल आग की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनसे सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की बात हुई थी। हालांकि, यह हादसा दिखाता है कि पुराने कोचों में तकनीकी अपग्रेड अभी भी अधूरे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • बेहतर वायरिंग इंसुलेशन

  • आधुनिक फायर डिटेक्शन सेंसर

  • ऑटोमैटिक फायर सप्रेशन सिस्टम

जैसी तकनीकों को तेज़ी से लागू करना ज़रूरी है।

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सबक और आगे का रास्ता

Elamanchili के पास हुआ यह हादसा याद दिलाता है कि तेज़ प्रतिक्रिया से जानें बच सकती हैं, लेकिन तकनीकी खामियां अब भी बड़ी चुनौती हैं। सैकड़ों यात्रियों का सुरक्षित बचना राहत की बात है, लेकिन एक जान का जाना सिस्टम में सुधार की सख़्त मांग करता है।

अब ज़रूरत है कि रेलवे:

  • पुराने कोचों को तुरंत अपग्रेड करे

  • मेंटेनेंस पर सख़्त निगरानी रखे

  • और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे

यह हादसा एक चेतावनी है—यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए

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