इंडिगो में मची अफरातफरी पर Centre की हाई-लेवल जांच, 72 घंटे में सामान्य स्थिति लाने का लक्ष्य: पूरी कहानी
सोचिए, आप परिवार के साथ छुट्टियों पर जाने के लिए एयरपोर्ट पहुँचें और अचानक पता चले कि आपकी फ्लाइट बिना किसी साफ कारण के रद्द कर दी गई है। पिछले हफ़्ते हज़ारों यात्रियों के साथ ठीक यही हुआ—जब भारत की सबसे बड़ी लो-कॉस्ट एयरलाइन इंडिगो बड़ी गड़बड़ी में फँस गई। उड़ानें देरी से चलने लगीं, कई रद्द हो गईं, और यात्री घंटों हॉल में फँसे रहे।
यह संकट दिसंबर 2025 के मध्य में शुरू हुआ—यानी त्योहारी सीजन के चरम पर। एक ही दिन में इंडिगो ने 200 से अधिक उड़ानों को ग्राउंड कर दिया, जिससे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे मार्गों पर भारी असर पड़ा। नाराज़ यात्री सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते रहे—कनेक्शन मिस हुए, काम का समय गया, और योजनाएँ गड़बड़ा गईं।
अब सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। लक्ष्य है—सिर्फ 72 घंटों में स्थिति सामान्य करना, जो एयरलाइन और अधिकारियों दोनों पर भारी दबाव डालता है।
यह संकट सिर्फ यात्रियों को नहीं, बल्कि पूरे यात्रा उद्योग को झटका देता है। व्यापार, परिवारिक योजनाएँ, पर्यटन—सब प्रभावित।
संकट की परतें: इंडिगो में ऑपरेशनल मेल्टडाउन क्यों हुआ?
प्रणालीगत खामियाँ और क्रू की कमी उजागर
सबसे बड़ी समस्या थी पायलट और क्रू की कमी। शेड्यूल की गड़बड़ी के कारण कई विमान लाइन में खड़े थे, लेकिन उन्हें उड़ाने वाला स्टाफ उपलब्ध नहीं था।
मेंटेनेंस में देरी ने समस्या को और गहरा कर दिया—कई विमान निर्धारित समय पर तैयार नहीं थे।
एयरलाइन अधिकारियों ने त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग को भी कारण बताया। क्रू अनुपलब्धता ने बेंगलुरु-चेन्नई जैसे लोकप्रिय मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया।
उदाहरण के तौर पर, दिल्ली-गोवा वाली 6E-234 फ्लाइट लगातार तीन दिनों तक रद्द हुई—हर बार 500 से ज़्यादा यात्री फँसे रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो की तेज़ी से हुई बढ़त ने उसके सिस्टम पर भारी बोझ डाला, और यह संकट उन्हीं कमजोरियों को उजागर करता है।
नतीजा?
यात्री एयरपोर्ट पर नाराज़ दिखे, और सोशल मीडिया शिकायतों से भर गया।

यात्री भरोसा और अर्थव्यवस्था पर असर
फँसे हुए यात्रियों को घंटों इंतज़ार करना पड़ा, कई लोगों को मदद भी समय पर नहीं मिली।
सिर्फ 48 घंटों में 10,000 से अधिक यात्रियों पर इसका असर पड़ा।
व्यापार भी प्रभावित हुआ—मीटिंग्स रद्द, शिपमेंट देरी से पहुँचीं, पर्यटन उद्योग से जुड़ी सेवाएँ जैसे होटल और टैक्सी भी नुकसान में रहीं।
वित्तीय विशेषज्ञ मानते हैं कि इंडिगो को करीब 500 करोड़ रुपये तक का घाटा हो सकता है—रिफंड, रीबुकिंग और अन्य खर्चों के कारण।
DGCA के शुरुआती दिसंबर 2025 के आँकड़े बताते हैं कि इंडिगो की 40% उड़ानें देरी से चल रही थीं।
इसका सीधा असर यात्रियों के भरोसे पर पड़ा है—लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या वे फिर इंडिगो से टिकट बुक करें?
सरकार की कार्यवाही: हाई-लेवल जांच का ढाँचा और अधिकार
मुख्य उद्देश्य और अधिकार
नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस जांच का नेतृत्व कर रहा है। DGCA के विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हैं। टीम सीधे मंत्री को रिपोर्ट करती है ताकि कार्रवाई तेज़ हो।
जांच के दायरे में शामिल हैं:
दैनिक संचालन की समीक्षा
सुरक्षा नियमों का पालन
क्रू प्रशिक्षण
पीक सीजन की तैयारी
शेड्यूलिंग सिस्टम
जांच टीम रिकॉर्ड मांग सकती है, कर्मचारियों से पूछताछ कर सकती है और संचालन की गहरी समीक्षा कर सकती है।
उद्देश्य है—खामियों की पहचान और सुधार, ताकि संकट दोबारा न हो।

72 घंटे की समयसीमा: सामान्य स्थिति के लिए लक्ष्यों का खाका
सरकार चाहती है कि 72 घंटे के भीतर उड़ानें 90% तक समय पर चलने लगें।
इंडिगो को रद्द उड़ानों की रीबुकिंग पूरी करनी होगी और इंतज़ार का समय कम कर 1 घंटे से नीचे लाना होगा।
अगर इंडिगो लक्ष्य से चूकती है, तो उस पर:
जुर्माना
लाइसेंस संबंधी कड़े कदम
संचालन पर प्रतिबंध
जैसे सख्त उपाय लागू हो सकते हैं।
नियामक कदम और अंतरराष्ट्रीय तुलना
DGCA की भूमिका
DGCA उड़ान नियम, क्रू आराम, मेंटेनेंस मानक जैसे क्षेत्रों पर नज़र रखती है।
पिछले मामलों में जैसे 2023 में स्पाइसजेट के संकट पर, DGCA ने ऑडिट और क्रू संख्या बढ़ाने के आदेश दिए थे।
यह संकट DGCA की क्षमता को फिर से परख रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मानक
दुनिया भर में एयरलाइनों का लक्ष्य 85% ऑन-टाइम प्रदर्शन होता है।
यूरोपीय एयरलाइनों पर क्रू की कमी पर भारी जुर्माने लगते हैं—और परिणामस्वरूप वे सिस्टम लगातार अपग्रेड करते हैं।
भारत अब उसी स्तर की सख़्ती लाने की कोशिश कर रहा है।

स्थिरता की राह: इंडिगो के तत्काल और दीर्घकालिक कदम
तत्काल उपाय
प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अतिरिक्त पायलट बुलाए गए
कम व्यस्त मार्गों पर उड़ानें घटाकर मुख्य रूट्स को प्राथमिकता
शेड्यूल में बड़ा बफ़र
मेन्टेनेंस के लिए अतिरिक्त समय
रिफंड और रीबुकिंग तेज़
अस्थायी स्टाफ की नियुक्ति
इन कदमों से 1–2 दिनों में उड़ान संचालन 50% तक सुधरने की उम्मीद है।
लंबी अवधि के उपाय
20% रिज़र्व क्रू बनाए रखना
उन्नत रोस्टरिंग सॉफ्टवेयर
DGCA द्वारा नियमित ऑडिट
छुट्टियों के दौरान उच्च मांग की खास तैयारी
यात्रियों के लिए सुझाव:
पीक सीजन में फ्लेक्सिबल टिकट लें
अपने अधिकार जानें—लंबी देरी पर पूरा रिफंड
एयरलाइन की ऐप पर रियल-टाइम अपडेट देखें

भारत की तेज़ी से बढ़ती एयरलाइन में भरोसा फिर कैसे लौटेगा-Centre
इंडिगो का ऑपरेशनल संकट यह दिखाता है कि तेज़ी से बढ़ने के साथ मजबूत सिस्टम भी जरूरी होते हैं। सरकार की त्वरित जांच और 72 घंटे का लक्ष्य इस बात का संकेत है कि समस्या को हल करने के लिए गंभीर कदम उठाए जा रहे हैं।
क्रू की कमी मुख्य कारण थी
लेकिन त्वरित कदमों से सुधार के संकेत हैं
यात्रियों पर बड़ा असर पड़ा
बेहतर नियमन से भविष्य सुरक्षित हो सकता है
भरोसा धीरे-धीरे ही लौटेगा—हर सफल फ्लाइट के साथ।
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