पटना की आवाज़ आरजे अंजलि ने परिवार संग मनाया Chhath पूजा: आस्था और उत्सव का संगम
डूबते सूरज की सुनहरी किरणें गंगा पर बिखरी हों, चारों ओर भक्ति का माहौल हो — यही है पटना का Chhath। हर साल लाखों श्रद्धालु सूर्यदेव की आराधना में डूब जाते हैं। इस बार पटना की मशहूर रेडियो जॉकी आरजे अंजलि ने अपने परिवार के साथ इस पवित्र पर्व को मनाया और अपनी आवाज़ के ज़रिए पूरे शहर में आस्था का संदेश फैलाया।
आरजे अंजलि: पटना की आवाज़ और उनकी छठ परंपरा
करियर और पटना से जुड़ाव
आरजे अंजलि आज पटना के सबसे लोकप्रिय एफएम चैनल पर सुबह का शो होस्ट करती हैं। उनकी मस्तीभरी बातें, स्थानीय खबरें और संगीत ने उन्हें “पटना की आवाज़” बना दिया है।
उन्होंने पाँच साल पहले कॉलेज से निकलते ही रेडियो की दुनिया में कदम रखा। पटना में जन्मी और पली-बढ़ी अंजलि अपने शो में बिहार की संस्कृति और लोक परंपराओं को शामिल करती हैं। खासकर छठ जैसे त्योहारों के दौरान उनकी आवाज़ लोगों के दिलों तक पहुँचती है।
परिवार की परंपराएँ: अंजलि के लिए Chhath का अर्थ
अंजलि के लिए Chhath सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का ज़रिया है। यह आभार और आस्था का उत्सव है, जहाँ परिवार एक साथ मिलकर सूर्यदेव से स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता है।
त्योहार की तैयारियाँ उनके घर में कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं — घर की सफाई, बांस की टोकरी तैयार करना और प्रसाद की सामग्री जुटाना। अंजलि कहती हैं, “ये वो वक्त होता है जब हम काम की भागदौड़ भूलकर खुद से और अपने भगवान से जुड़ते हैं।”
पिछले सालों की Chhath यादें
पिछले साल उन्होंने अपनी छत से लाइव अपडेट दिए थे — दीपों से जगमग तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं।
दो साल पहले भारी बारिश के बावजूद उनका परिवार घाट तक पहुँचा और पूजा की। बाद में उन्होंने शो में मज़ाक करते हुए कहा, “गीले थे ठेकुए, पर मन की आस्था सूखी नहीं!”
इस साल मौसम साफ़ था, तो उन्होंने और बड़ा आयोजन किया। हर साल की तरह, उनका Chhath अनुभव लोगों को परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन सिखाता है।
इस साल का Chhath: आरजे अंजलि के घर की खास तैयारियाँ
अस्ताचलगामी और उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य
पहले दिन सूर्यास्त के समय अंजलि ने गंगा किनारे परिवार के साथ अर्घ्य दिया। उनके हाथों में फल, ठेकुआ और मिठाई से भरी सुप थी। मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने डूबते सूरज को प्रणाम किया और मन में शांति महसूस की।
सुबह के उषा अर्घ्य में पूरा परिवार फिर जुटा। अंजलि ने माँ के साथ व्रत खोला और नदी का जल ग्रहण किया। बच्चे आसपास खेलते रहे — माहौल में श्रद्धा और खुशी दोनों थी।
ठेकुआ और प्रसाद की मिठास
अंजलि के घर का मुख्य आकर्षण है ठेकुआ — गेहूँ के आटे, गुड़, घी और सौंफ से बना ये पारंपरिक प्रसाद। वो अपनी बहनों के साथ मिलकर इसे तले बिना रह नहीं पातीं।
साथ ही चावल की खीर, गुड़ वाला लाई और घर के बने दही से प्रसाद पूरा होता है।
वो कहती हैं, “Chhath का प्रसाद सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, यह पूरे परिवार को जोड़ता है।”
टिप: ठेकुआ को धीमी आँच पर तलें, ताकि कुरकुरा और सुनहरा रंग बने।
सोशल मीडिया और श्रोताओं की प्रतिक्रियाएँ
अंजलि ने अपने अर्घ्य का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया, जो हज़ारों लाइक्स बटोर गया। फैंस ने लिखा, “आपकी ऊर्जा से छठ और भी खूबसूरत लगता है!”
उनका रेडियो शो रिकॉर्ड कॉल्स के साथ चला — श्रोताओं ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। ट्विटर पर #AnjaliChhathVibes ट्रेंड हुआ।
इससे साबित होता है कि अंजलि पुरानी परंपराओं को नए अंदाज़ में पेश करती हैं।
पटना के घाटों पर आस्था का समंदर
दिघा घाट पर पीली साड़ियों का सागर लहराता दिखा। कदमनगर और कदमकुआँ घाट पर हजारों दीपों की रोशनी ने रात को दुल्हन बना दिया।
यह नज़ारा बिहार की आत्मा है — जहाँ विश्वास गंगा की तरह बहता है।
सुरक्षा और प्रशासन की व्यवस्था
इस बार पटना प्रशासन ने घाटों पर ड्रोन निगरानी, 5000 से ज़्यादा पुलिसकर्मी और साफ-सफाई की बेहतरीन व्यवस्था की।
स्वास्थ्य शिविर लगाए गए ताकि व्रतधारियों को सुविधा मिल सके।
शहर ने अपने सबसे बड़े पर्व के लिए एकजुट होकर जिम्मेदारी निभाई।
मीडिया की भूमिका: त्योहारों में रेडियो की धड़कन
अंजलि जैसी आरजे त्योहारों के दौरान लोगों के दिलों को जोड़ने का काम करती हैं। वो Chhath गीत बजाती हैं, रीति-रिवाजों की जानकारी देती हैं और प्रवासी श्रोताओं तक बिहार की खुशबू पहुँचाती हैं।
रेडियो उनके ज़रिए “वर्चुअल घाट” बन जाता है — जहाँ हर कोई एक साथ पूजा में शामिल हो सकता है।
संदेश और शुभकामनाएँ
अंजलि ने अपने शो पर कहा, “सूर्यदेव आपके घरों को रोशनी और स्वास्थ्य से भर दें। Chhath हमें कृतज्ञता सिखाता है — इसे अपने पड़ोसियों के साथ बाँटें।”
उनकी ये बात कई दिलों को छू गई। लोगों ने मोहल्लों में मिलकर प्रसाद बाँटा, गीत गाए।
आध्यात्मिकता और आधुनिक जीवन का संतुलन
रेडियो की व्यस्तता के बीच भी अंजलि हर सुबह ध्यान करती हैं। उनका मानना है, “श्रद्धा बड़े कदमों से नहीं, छोटे-छोटे पलों से बनती है।”
वो सलाह देती हैं कि चाहे जितनी व्यस्तता हो, हर दिन 10 मिनट Chhath गीत सुनें — मन में शांति आएगी।
आस्था की अमर शक्ति और पटना की पहचान
आरजे अंजलि की Chhath यात्रा दिखाती है कि परंपरा और आधुनिकता साथ चल सकती हैं। परिवार की एकजुटता, घाटों की भीड़ और रेडियो की गूंज — सब मिलकर पटना की पहचान बनाते हैं।
Chhath सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि एकता का उत्सव है — जो हमें याद दिलाता है कि सूर्य की तरह हर दिन नई शुरुआत संभव है।
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