CM नीतीश कुमार का पीएम मोदी को सलाम: बिहार विधानसभा में बयान से विपक्ष की एकता हिली
पटना की भरी हुई बिहार विधानसभा में माहौल वैसे ही तप रहा था। इसी बीच CM नीतीश कुमार उठे और एक ऐसा बयान दे गए जिसने सदन से लेकर दिल्ली की सियासत तक हलचल मचा दी।
“मैं प्रधानमंत्री को सलाम करता हूँ… आप लोग तो ये करते रहते हैं…”
उनके ये शब्द विपक्षी बेंचों पर तीर की तरह लगे। इशारा साफ था—पुराने पाला बदलने के आरोपों और विपक्षी गठबंधन की टूटी एकता पर चोट।
यह क्षण बिहार की उलझी हुई राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया। अक्सर गठबंधन बदलने के लिए जाने जाने वाले नीतीश अब खुलकर पीएम मोदी की तारीफ करते दिखे। इसका असर सिर्फ बिहार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विपक्षी एकता की कोशिशों पर भी पड़ रहा है।
आइए जानते हैं इस बयान के पीछे का पूरा सियासी खेल।
1. सलाम का मतलब: CM नीतीश का मोदी की ओर झुकाव
विधानसभा का माहौल और संदर्भ
सदन में बजट और किसानों के मुद्दों पर गरमा-गरमी चल रही थी। विपक्ष केंद्र से मिलने वाली सहायता पर हमला बोल रहा था। तनाव ऐसा कि हर नेता तीखी जुबानी तीर चला रहा था।
तभी नीतीश ने बोलना शुरू किया। उन्होंने पीएम मोदी की परियोजनाओं—खासकर हाईवे और विकास योजनाओं—का ज़िक्र किया, जिन्हें बिहार के लिए महत्त्वपूर्ण बताया।
भारतीय राजनीति में ‘सलाम’ का संकेत
“सलाम” सिर्फ एक शब्द नहीं—भारतीय राजनीति में यह आदर + रणनीति दोनों का मिश्रण है।
यह दिल्ली से निकटता दिखाता है।
गठबंधन politics में अपने partners को भरोसा देता है।
केंद्र से फंड और परियोजनाएँ पाने में आसानी होती है।
2014 के बाद कई क्षेत्रीय नेताओं ने बीजेपी को समर्थन के लिए ऐसे ही संदेश दिए। नीतीश भी उसी संकेत भाषा का उपयोग कर रहे हैं।

तुरंत प्रतिक्रियाएँ
NDA बेंचों पर तालियाँ, नारे और मुस्कानें।
विपक्ष स्तब्ध—and then furious.
तेजस्वी यादव ने इसे “सरेंडर” बताया। सोशल मीडिया पर मीम्स और बहस की बाढ़ आ गई।
2. “आप लोग ये करते हैं…” — विपक्ष पर सीधा वार
पूरा बयान और उसका मतलब
नीतीश ने विपक्ष को सीधा घेरते हुए कहा:
“आप लोग हर बार वही करते हैं—जब मन हुआ पक्ष बदल लिया। मेरे ऊपर आरोप लगाते हैं, खुद क्या करते रहे हैं?”
उन्होंने 2015, 2017 और हालिया I.N.D.I.A. गठबंधन की टूट पर भी इशारे किए।
I.N.D.I.A. गठबंधन पर असर
यह बयान विपक्षी एकता पर बड़ा झटका है:
छोटे दल असमंजस में पड़ सकते हैं।
बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर विपक्ष की रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
अंदरूनी अविश्वास बढ़ेगा।
ऐतिहासिक तौर पर बिहार में ऐसे हमले आम
बिहार की राजनीति हमेशा से तीखी जुबान और पाला बदलने के लिए मशहूर रही है।
लालू बनाम नीतीश, नीतीश बनाम बीजेपी—इस राज्य की राजनीति हमेशा गठबंधनों के थियेटर में बदलती रही है।
3. रणनीति: नीतीश ने अभी यह क्यों कहा?
Bihar में राजनीतिक संतुलन
NDA की सरकार बहुमत के किनारे पर है। नीतीश मोदी की तारीफ कर:
बीजेपी से रिश्ते मजबूत कर रहे हैं,
केंद्र से राहत पैकेज और निधि हासिल करना आसान बना रहे हैं।

राष्ट्रीय राजनीति में भविष्य
CM नीतीश की नजरें सिर्फ बिहार पर नहीं—वे राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका चाहते हैं।
पीएम मोदी की तारीफ उनके लिए दिल्ली की राजनीति के दरवाजे खुला रखने की रणनीति है।
मतदाताओं पर असर
ऊँची जातियाँ + कुर्मी समुदायों में इसका पॉजिटिव असर।
यादव + मुस्लिम वोट RJD के साथ और मजबूत।
ग्रामीण मतदाता इसे “स्थिरता” का संकेत मान सकते हैं।
4. मीडिया और विशेषज्ञ क्या कह रहे?
विशेषज्ञ कहते हैं: “नीतीश कुमार political survival के उस्ताद हैं।”
कुछ इसे NDA में उनकी मजबूरी बताते हैं।
मीडिया में दो तरह की हेडलाइन चली:
“नीतीश का रणनीतिक सलाम”
“विपक्षी एकता पर नीतीश का वार”
ट्विटर पर #NitishSalute ट्रेंड में रहा।

5. आगे की राजनीति कैसे बदलेगी?
NDA यदि सीटें बढ़ाकर नीतीश को ज्यादा स्पेस देता है—समझिए मामला पक्का है।
केंद्र से बिहार के लिए बड़े पैमाने पर मदद आती है तो यह बयान उसी डील का हिस्सा हो सकता है।
विपक्ष अब और दबाव में आएगा—खासकर चुनाव करीब आते ही।
विधानसभा का यह पल बनेगा यादगार
CM नीतीश कुमार के इस बयान ने बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।
यह एक तरफ सम्मान, दूसरी तरफ कटाक्ष, और तीसरी तरफ रणनीति—तीनों का मिश्रण है।
जैसे-जैसे 2025 के चुनाव करीब आ रहे हैं, यह घटना राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
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