CM रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग परियोजना का किया शुभारंभ, नगर आयुक्त की शक्तियों में हुई वृद्धि
शहरी विकास, प्रशासनिक सुधार और राजधानी के भविष्य की नई दिशा
राजधानी के शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए CM रेखा गुप्ता ने आज बहुप्रतीक्षित शालीमार बाग परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने नगर प्रशासन को अधिक सक्षम और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) की शक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की भी घोषणा की। यह निर्णय न केवल बुनियादी ढांचे के विकास को गति देगा, बल्कि नगर निगमों के कामकाज में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक बाधाओं को भी दूर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
इस दोहरे फैसले—एक ओर शालीमार बाग जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन और दूसरी ओर नगर आयुक्त को अतिरिक्त अधिकार—को शहरी शासन सुधार (Urban Governance Reform) के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे राजधानी में योजनाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार बढ़ेगी और जनता को सीधे तौर पर बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी।
शालीमार बाग परियोजना: एक आधुनिक शहरी मॉडल की ओर
परियोजना की पृष्ठभूमि
शालीमार बाग क्षेत्र लंबे समय से यातायात जाम, जलभराव, हरित क्षेत्रों की कमी और अव्यवस्थित विकास जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। बढ़ती आबादी और अनियोजित शहरीकरण ने इस इलाके की मूल संरचना पर दबाव डाला है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने शालीमार बाग परियोजना की परिकल्पना की, जिसे एक समग्र शहरी पुनर्विकास परियोजना (Integrated Urban Redevelopment Project) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
CM रेखा गुप्ता ने उद्घाटन समारोह में कहा,
“शालीमार बाग परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारे शहर को रहने योग्य, स्वच्छ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक सोच का प्रतीक है।”
परियोजना के प्रमुख घटक
शालीमार बाग परियोजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा। इसके प्रमुख घटक इस प्रकार हैं:
आधुनिक सड़क और यातायात व्यवस्था
चौड़ी सड़कों का निर्माण
स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल
पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन

हरित क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण
नए पार्क और हरित पट्टियाँ
वर्षा जल संचयन प्रणाली
प्रदूषण कम करने के लिए वृक्षारोपण अभियान
आवास और बुनियादी ढांचा
किफायती आवासीय परियोजनाएँ
पुराने और जर्जर भवनों का पुनर्विकास
बेहतर जल आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम
स्मार्ट सिटी सुविधाएँ
सीसीटीवी निगरानी
स्मार्ट स्ट्रीट लाइट
डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली
सरकार का दावा है कि यह परियोजना शालीमार बाग को राजधानी के सबसे सुव्यवस्थित और आधुनिक इलाकों में शामिल कर देगी।
उद्घाटन समारोह: राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
शुभारंभ समारोह में मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य, नगर निगम अधिकारी, स्थानीय विधायक और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। CM ने परियोजना का शिलान्यास करते हुए इसे “जनता के भरोसे की जीत” बताया।
उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि शहरी विकास अब केवल कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध और परिणाम-आधारित प्रशासन सरकार की प्राथमिकता होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा,
“हम चाहते हैं कि जनता को योजनाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना ज़रूरी है।”
यहीं से नगर आयुक्त की शक्तियों में वृद्धि की घोषणा को विशेष महत्व मिल जाता है।
नगर आयुक्त की शक्तियों में वृद्धि: प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
पहले की स्थिति
अब तक नगर आयुक्त को कई मामलों में राज्य सरकार या संबंधित मंत्रालयों की स्वीकृति का इंतज़ार करना पड़ता था। इससे:
परियोजनाओं में देरी होती थी
जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता था
राजनीतिक और नौकरशाही हस्तक्षेप बढ़ जाता था
विशेषज्ञों का मानना था कि नगर आयुक्त की भूमिका केवल एक प्रशासक तक सीमित होकर रह गई थी, जबकि शहर जैसे जटिल तंत्र को चलाने के लिए अधिक अधिकारों की आवश्यकता थी।
नई शक्तियाँ क्या होंगी?
सरकार द्वारा घोषित सुधारों के तहत नगर आयुक्त को अब निम्नलिखित अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं:
परियोजना स्वीकृति की स्वतंत्रता
तय बजट सीमा तक परियोजनाओं को सीधे मंजूरी
छोटे और मध्यम स्तर के कार्यों के लिए राज्य स्तर की अनुमति की आवश्यकता नहीं
वित्तीय अधिकारों में विस्तार
आपातकालीन मरम्मत और सेवाओं के लिए त्वरित फंड उपयोग
ठेके और निविदाओं पर तेज़ निर्णय

कार्मिक प्रबंधन में अधिकार
नगर निगम कर्मचारियों की तैनाती और स्थानांतरण
लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
डिजिटल और स्मार्ट गवर्नेंस को बढ़ावा
ई-गवर्नेंस परियोजनाओं की सीधी निगरानी
डेटा-आधारित निर्णय लेने की शक्ति
CM ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारों के साथ जवाबदेही भी तय की जाएगी और नगर आयुक्त के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन होगा।
सरकार का तर्क: क्यों ज़रूरी था यह फैसला?
सरकार का कहना है कि तेजी से बढ़ते शहरी दबावों के बीच पारंपरिक प्रशासनिक ढांचा अप्रभावी साबित हो रहा था। नगर आयुक्त को अधिक शक्तियाँ देकर:
निर्णय प्रक्रिया तेज़ होगी
भ्रष्टाचार की संभावनाएँ घटेंगी
नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी
CM रेखा गुप्ता ने कहा,
“शहर की समस्याएँ रोज़ बदलती हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व ही समाधान दे सकता है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया: समर्थन और सवाल दोनों
इस फैसले पर विपक्ष की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ विपक्षी दलों ने शालीमार बाग परियोजना का स्वागत किया, लेकिन नगर आयुक्त की शक्तियों में वृद्धि पर सवाल भी उठाए।
विपक्ष के मुख्य तर्क
इससे निर्वाचित पार्षदों की भूमिका कम हो सकती है
अत्यधिक केंद्रीकरण का खतरा
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी तंत्र ज़रूरी
एक विपक्षी नेता ने कहा,
“प्रशासनिक सुधार ज़रूरी हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संतुलन भी बना रहना चाहिए।”

विशेषज्ञों की राय: शहरी शासन में बदलाव का संकेत
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के अन्य महानगरों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। कई विशेषज्ञों ने इसे मेयर-इन-काउंसिल सिस्टम या मजबूत नगर प्रशासन की दिशा में शुरुआती कदम बताया।
हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि:
अधिकारों के साथ पारदर्शिता अनिवार्य है
नागरिक भागीदारी को कम नहीं किया जाना चाहिए
डेटा और ऑडिट सिस्टम मजबूत होने चाहिए
आम नागरिकों की उम्मीदें
शालीमार बाग के स्थानीय निवासियों में इस परियोजना को लेकर उत्साह भी है और उम्मीदें भी। लोगों का कहना है कि यदि योजनाएँ समय पर पूरी हुईं और नगर आयुक्त वास्तव में सशक्त होकर काम कर पाए, तो:
जलभराव और जाम से राहत मिलेगी
साफ-सफाई और सुरक्षा सुधरेगी
क्षेत्र की संपत्ति मूल्य में वृद्धि होगी
हालांकि कुछ नागरिकों को डर है कि कहीं यह सब कागज़ों तक सीमित न रह जाए।

भविष्य की राह: शहरी विकास का नया अध्याय?
शालीमार बाग परियोजना और नगर आयुक्त की शक्तियों में वृद्धि, दोनों मिलकर राजधानी के शहरी प्रशासन में एक नए अध्याय की शुरुआत करते हैं। यह पहल दर्शाती है कि सरकार अब नीति-निर्माण से आगे बढ़कर प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
यदि यह मॉडल सफल होता है, तो भविष्य में:
अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की परियोजनाएँ शुरू हो सकती हैं
नगर प्रशासन को और अधिक स्वायत्त बनाया जा सकता है
भारत के शहरी शासन में संरचनात्मक सुधार की मिसाल कायम हो सकती है
CM रेखा गुप्ता द्वारा शालीमार बाग परियोजना का शुभारंभ और नगर आयुक्त की शक्तियों में वृद्धि केवल दो अलग-अलग घोषणाएँ नहीं हैं, बल्कि यह एक समग्र दृष्टिकोण का हिस्सा हैं—जहाँ विकास, प्रशासन और जवाबदेही एक साथ आगे बढ़ते हैं।
अब असली परीक्षा ज़मीन पर होगी। क्या परियोजनाएँ समय पर पूरी होंगी? क्या बढ़ी हुई शक्तियाँ बेहतर सेवाओं में बदलेंगी? इन सवालों के जवाब आने वाले महीनों में मिलेंगे। फिलहाल इतना तय है कि शहरी विकास की बहस में यह फैसला एक अहम मोड़ बन गया है।
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