उत्तर प्रदेश की हरित ऊर्जा महत्वाकांक्षा-CM
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, और उत्तर प्रदेश इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य का लक्ष्य 2027 तक 22,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का है। इसमें सौर, पवन और अब हाइड्रोजन ऊर्जा को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि कोयले पर निर्भरता कम की जा सके।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश लगभग 30,000 मेगावाट बिजली उत्पन्न करता है, जिसमें लगभग 70% हिस्सा तापीय ऊर्जा का है। हालांकि, सौर ऊर्जा में तेज़ वृद्धि हो रही है—केवल 2025 में ही लगभग 2,000 मेगावाट सौर क्षमता जोड़ी गई।
जापान दौरे का उद्देश्य
CM योगी आदित्यनाथ का जापान दौरा मुख्य रूप से हाइड्रोजन तकनीक को समझने और सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए था। उन्होंने जापानी कंपनियों के साथ तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त निवेश और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर चर्चा की।
भारत और जापान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से सहयोग रहा है, और अब यह साझेदारी हाइड्रोजन जैसे शून्य-उत्सर्जन ईंधन तक विस्तारित हो रही है।
यामानाशी हाइड्रोजन मॉडल से क्या सीखा?
यामानाशी की सुविधा सौर ऊर्जा के माध्यम से जल का इलेक्ट्रोलिसिस कर ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करती है। इस प्रक्रिया में:
उत्पादन: नवीकरणीय ऊर्जा से जल का विभाजन
भंडारण: उच्च दबाव टैंकों में सुरक्षित संग्रह
परिवहन: पाइपलाइन या टैंकर द्वारा
उपयोग: वाहन, उद्योग, बिजली उत्पादन
CM ने सुरक्षा प्रणालियों, मॉड्यूलर डिज़ाइन और स्केलेबल मॉडल का अध्ययन किया। यह मॉडल उत्तर प्रदेश में छोटे पायलट प्रोजेक्ट से बड़े संयंत्रों तक विस्तार में सहायक हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में संभावित हाइड्रोजन हब-CM
राज्य में कई क्षेत्र हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं:
बुंदेलखंड: सौर ऊर्जा के लिए अनुकूल क्षेत्र
पश्चिमी औद्योगिक कॉरिडोर (लखनऊ–नोएडा क्षेत्र): उद्योगों के निकटता
पूर्वी उत्तर प्रदेश: जल संसाधनों की उपलब्धता
इन क्षेत्रों में पायलट परियोजनाओं के माध्यम से शुरुआत की जा सकती है।
नीति और निवेश का रोडमैप-CM
राज्य सरकार 2026 तक एक समर्पित हाइड्रोजन नीति लाने पर विचार कर रही है। संभावित प्रावधानों में शामिल हैं:
भूमि बैंक और रियायती दरों पर भूखंड
पाँच वर्ष तक कर छूट
उपकरणों पर सब्सिडी
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली
2030 तक 500 मेगावाट हाइड्रोजन क्षमता का लक्ष्य रखा जा सकता है।

आर्थिक प्रभाव और रोजगार
हाइड्रोजन परियोजनाओं से अरबों रुपये का निवेश आकर्षित हो सकता है। जापानी कंपनियाँ उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन स्थापित करने में रुचि दिखा सकती हैं।
अनुमान है कि अगले पाँच वर्षों में 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। कौशल विकास योजनाओं के तहत युवाओं को फ्यूल सेल, सुरक्षा और रखरखाव प्रशिक्षण दिया जाएगा।
हरित भविष्य की ओर उत्तर प्रदेश-CM
यामानाशी दौरा उत्तर प्रदेश के लिए एक नई दिशा का संकेत है। तकनीकी सहयोग, निवेश और नीति सुधारों के माध्यम से राज्य हाइड्रोजन ऊर्जा में अग्रणी बनने की ओर बढ़ रहा है।
यदि योजनाएँ सफल होती हैं, तो 2030 तक हाइड्रोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों का अहम हिस्सा बन सकता है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण बल्कि आर्थिक विकास को भी नई गति देगा।
उत्तर प्रदेश अब हरित ऊर्जा क्रांति की दहलीज़ पर खड़ा है—और यह यात्रा अभी शुरू हुई है।
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