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Congress नेता ने राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से की, बीजेपी ने बताया ‘हिंदुओं का अपमान’

कल्पना कीजिए—एक राजनीतिक भाषण जिसमें आस्था और सत्ता का मेल एक ही वाक्य में हो जाए। हाल ही में Congress के एक वरिष्ठ नेता द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई। बीजेपी ने इसे तुरंत “हिंदुओं की आस्था का अपमान” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

2026 के चुनावी माहौल के बीच आया यह बयान भावनाओं को झकझोरने वाला साबित हुआ। यह विवाद एक बार फिर दिखाता है कि भारत में धर्म और राजनीति का रिश्ता कितना संवेदनशील और विभाजनकारी हो सकता है।

बयान की प्रकृति: संदर्भ और पृष्ठभूमि

बयान कहां और कैसे आया

Congress प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उत्तर प्रदेश में एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर कहा कि “राहुल गांधी भगवान राम के मार्ग पर चलते हैं—त्याग, सत्य और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का मार्ग।” मंच पर मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाईं, लेकिन यह बयान जल्द ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

Congress के अनुसार, इस तुलना का उद्देश्य धार्मिक नहीं बल्कि मूल्यों पर जोर देना था—जैसे सत्य, त्याग और न्याय—जिन्हें पार्टी राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और राजनीतिक संघर्ष से जोड़कर देखती है।

यह बयान ऐसे समय आया जब अयोध्या और मंदिर राजनीति से जुड़ी बहसें फिर तेज़ हैं। भगवान राम के प्रतीक का इस्तेमाल नैतिकता और संघर्ष की कहानी गढ़ने के लिए किया गया, लेकिन इसी ने विवाद को जन्म दे दिया।

भारतीय राजनीति में धार्मिक प्रतीकों का इतिहास

भारतीय राजनीति में धार्मिक और पौराणिक प्रतीकों का इस्तेमाल नया नहीं है।

  • इंदिरा गांधी के दौर में दुर्गा का रूपक सामने आया।

  • बीजेपी की राजनीति में राम और अयोध्या केंद्रीय रहे हैं।

ऐसे प्रतीक कई बार मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाते हैं, लेकिन गलत संदर्भ में इस्तेमाल होने पर तीखी प्रतिक्रिया भी पैदा करते हैं।

Rahul's Remark On Lord Rama Triggers Row

बीजेपी का पलटवार: “हिंदुओं का अपमान”

बीजेपी की प्रतिक्रिया और रणनीति

बीजेपी नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा की। पार्टी का कहना है कि भगवान राम करोड़ों हिंदुओं के आराध्य हैं और किसी राजनीतिक नेता से उनकी तुलना करना अनुचित है। बीजेपी ने इसे “वोट बैंक की राजनीति” करार देते हुए सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर विरोध तेज़ कर दिया।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने वीडियो क्लिप्स और पोस्टर साझा किए और इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बताया। यह रणनीति अपने समर्थक आधार को एकजुट रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

“हिंदुओं का अपमान” शब्द क्यों असरदार है?

भगवान राम का स्थान हिंदू समाज में अत्यंत पवित्र है। रामायण की कथा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी है। ऐसे में किसी राजनीतिक संदर्भ में उनकी तुलना करना कई लोगों को असहज करता है।

बीजेपी इस भावनात्मक जुड़ाव को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश करती दिखी, खासकर उन इलाकों में जहां धार्मिक पहचान चुनावी फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।

Congress का बचाव और सफाई

पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया

Congress नेतृत्व ने बयान का बचाव करते हुए कहा कि यह तुलना देवत्व से नहीं, बल्कि मूल्यों से जुड़ी थी। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति न्याय, सत्य और करुणा पर आधारित है—और यही भगवान राम के आदर्श भी हैं।

Congress ने बयान वापस नहीं लिया, बल्कि इसे नैतिक तुलना बताते हुए बीजेपी पर “गलत अर्थ निकालने” का आरोप लगाया।

विपक्षी दलों का रुख

कुछ विपक्षी दलों ने सीधे समर्थन नहीं किया, लेकिन बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि मूल मुद्दों—महंगाई, बेरोज़गारी, सामाजिक न्याय—से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विवाद खड़े किए जाते हैं।

हालांकि, विपक्ष के भीतर भी यह चिंता दिखी कि धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल से कुछ मतदाता नाराज़ हो सकते हैं।

Using power to create Hindu-Muslim rift not in state or country's interest:  Rahul on Sambhal clashes | India News - The Indian Express

जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया: बढ़ता ध्रुवीकरण

सोशल मीडिया पर बहस

यह मुद्दा सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।

  • Congress समर्थकों ने इसे “मूल्य आधारित राजनीति” बताया।

  • बीजेपी समर्थकों ने मीम्स और पोस्ट के जरिए इसे अपमानजनक करार दिया।

ऑनलाइन बहस ने इस मुद्दे को और भड़का दिया, जिसका असर ज़मीनी राजनीति तक महसूस हुआ।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान राहुल गांधी की छवि को “संघर्षशील और नैतिक” दिखाने में मदद कर सकता है, लेकिन साथ ही यह जोखिम भी है कि कुछ हिंदू मतदाता Congress से दूर हो जाएं।

बीजेपी के लिए यह मुद्दा अपने कोर वोटर्स को और मजबूत करने का अवसर बन गया, जबकि Congress के लिए यह संतुलन साधने की चुनौती है।

Using power to create Hindu-Muslim rift not in state or country's interest:  Rahul on Sambhal clashes | India News - The Indian Express

सियासी असर और सीख

राहुल गांधी की भगवान राम से तुलना पर उठा विवाद दिखाता है कि भारत में धर्म और राजनीति का मेल कितना संवेदनशील है।

  • Congress को नैतिकता और त्याग की कहानी मिलती है,

  • जबकि बीजेपी इसे आस्था के अपमान के रूप में पेश कर अपनी राजनीति मजबूत करती है।

मुख्य बातें:

  • धार्मिक भाषा वोट दिला भी सकती है और विवाद भी खड़ा कर सकती है।

  • सोशल मीडिया छोटे बयानों को बड़े राजनीतिक तूफान में बदल देता है।

  • 2026 के चुनावों में ऐसे मुद्दे करीबी मुकाबलों का रुख तय कर सकते हैं।

आपकी राय क्या है—यह एक सोची-समझी राजनीतिक चाल थी या बड़ी चूक?
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