भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’: आर्थिक बदलाव की मोदी की तेज़ रफ्तार यात्रा का विश्लेषण-Country
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे “रिफॉर्म एक्सप्रेस” कहते हैं—पूरी रफ़्तार में दौड़ती हुई।
भारत तेज गति से बड़े बदलावों की ओर बढ़ रहा है। ये सुधार अर्थव्यवस्था और लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी दोनों को नया रूप देने की कोशिश करते हैं।
इसे ऐसे सोचें, जैसे एक ट्रेन जो लंबे समय की धीमी रफ्तार के बाद अचानक तेज़ हो गई हो।
मोदी सरकार डिजिटल सिस्टम से लेकर कारोबारी माहौल तक कई क्षेत्रों में तेज़ सुधार लागू कर रही है। गति नई है, और अंदाज़ पहले से अधिक साहसी।
यह पुरानी धीमी नीतिगत प्रक्रिया से अलग रास्ता है। डिजिटल विकास, सरल नियमों और नए आर्थिक ढांचे पर जोर दिया जा रहा है।
आइए, समझते हैं कि यह रफ्तार किससे आ रही है और इसका असर किस पर पड़ेगा।
रफ्तार का ढांचा: सुधार गति के पीछे की मुख्य ताकतें
सरकार तेज़ी इसलिए दिखा पा रही है क्योंकि हालात भी मांग करते हैं और राजनीतिक स्थिति इसका समर्थन करती है।
वैश्विक अवसर भी भारत को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
भारत की आर्थिक चुनौतियाँ तेज़ कदम उठाने की मांग करती हैं। सरकार अपनी मजबूत स्थिति का उपयोग करके देरी कम कर रही है।
इससे बड़े विचार जल्दी कानून या नीति बन जाते हैं।
राजनीतिक स्थिरता और निर्णायक जनादेश
चुनावों में जोरदार जीत सरकार को मजबूत आधार देती है।
कठिन विधेयक भी कम विरोध के साथ पास हो जाते हैं। किसी गठबंधन की राजनीति का दबाव नहीं होता।
यह स्वतंत्रता संवेदनशील मुद्दों पर तेज फैसलों को संभव बनाती है।
संसद में बिल महीनों में पास हो जाते हैं, वर्षों में नहीं।
इस स्थिरता से सरकार दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान दे पाती है।
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वैश्विक माहौल और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
विश्व व्यापार में बदलाव भारत के लिए अवसर खोल रहा है।
कंपनियाँ एक देश पर निर्भरता घटाना चाहती हैं—भारत एक आदर्श विकल्प बनता जा रहा है।
तेज़ सुधार इन अवसरों को पकड़ने में मदद करते हैं।
सप्लाई चेन भारत की ओर शिफ्ट हो रही है, जिससे नौकरियाँ और निवेश बढ़ते हैं।
टेक, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियाँ भारत को कौशल और बाज़ार के लिए चुन रही हैं।
तेज़ नीतियाँ सेटअप को आसान बनाती हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) एक बड़ा सक्षम कारक
आधार, UPI, DigiLocker जैसी डिजिटल सेवाओं ने व्यवस्था को बदल दिया है।
ये पहचान, भुगतान और सत्यापन को तेज़ और सस्ता बनाती हैं।
सरकारी योजनाएँ आसानी से लागू होती हैं और लोगों तक बिना दलालों के पहुँचती हैं।
ONDC जैसे प्लेटफ़ॉर्म छोटे दुकानदारों को बड़े खरीदारों से जोड़ते हैं।
यही डिजिटल ढांचा “रिफॉर्म एक्सप्रेस” को गति देता है।
गहराई से समझें: रिफॉर्म एक्सप्रेस के मुख्य स्तंभ
ये सुधार कई बड़े क्षेत्रों में विभाजित हैं—हर क्षेत्र देश की किसी न किसी पुरानी कमजोरी को लक्ष्य करता है।
पैसा, फैक्ट्रियाँ, रोजगार, निवेश—हर क्षेत्र में बदलाव का फोकस स्पष्ट है।
वित्तीय क्षेत्र सुधार और पूंजी बाज़ार का विस्तार
नए नियमों ने बैंकिंग और बाजारों में बड़ा सुधार लाया है।
Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) ने खराब कर्ज की समस्या को तेज़ी से हल करना संभव किया है।
2024 में FDI $80 बिलियन पार कर गया।
शेयर बाज़ार और बॉन्ड मार्केट का विस्तार हुआ।
NPA (बुरे कर्ज) 3% से नीचे आ गए।
बेहतर बैंकिंग संरचना बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड देती है और अर्थव्यवस्था का इंजन तेज़ चलता है।
मैन्युफैक्चरिंग और PLI योजना
PLI (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने पर इनाम देती है।
फोन और दवा क्षेत्र में उत्पादन में भारी उछाल।
आज तक $100 बिलियन से अधिक निवेश।
लाखों नौकरियाँ तैयार हुईं।
इलेक्ट्रॉनिक्स आउटपुट 3 साल में दोगुना।
Apple जैसी कंपनियाँ दक्षिण भारत में बड़े कारखाने चला रही हैं, जो आसपास के क्षेत्रों में छोटे व्यवसाय भी पैदा करते हैं।
भूमि और श्रम सुधार: नई विकास क्षमता को unlock करना
पुराने श्रम कानूनों को चार नए कोड में बदल दिया गया है—नियम साफ और सरल बने हैं।
इससे कंपनियों को कर्मचारियों की भर्ती-निकासी आसान होती है और मजदूरों को अधिक सुरक्षा मिलती है।
भूमि सुधारों से सड़क परियोजनाओं और उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण तेज हुआ है।
20+ राज्यों ने नए श्रम कानून लागू किए।
जमीन के उपयोग के लिए “लैंड बैंक” बनाए गए।
फैक्ट्ररी अनुमोदन तेजी से होने लगे।
असर कैसे दिख रहा है: आंकड़ों में शुरुआती परिणाम
सुधारों का असर जमीन पर दिखने लगा है।
कारोबारी माहौल आसान हुआ है।
पूँजी खर्च, सड़कें, रेलवे और एयरपोर्ट तेजी से बढ़ रहे हैं।
Ease of Doing Business — बड़ी छलांग
भारत 2014 में 142वें स्थान पर था—अब 63वें पर है।
नियम सरल होने से कंपनियाँ कुछ ही दिनों में शुरू हो जाती हैं।
परमिट आधे हो गए।
विदेशी निवेशक साफ प्रक्रियाओं की तारीफ करते हैं।
इससे नौकरियाँ और छोटे व्यवसाय दोनों में उछाल आया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च और तेज़ प्रोजेक्ट पूरा होने की दर
2025 में सरकार का कैपिटल खर्च 11 ट्रिलियन रुपये पार कर गया।
सड़कों, रेल, बंदरगाहों और हवाईअड्डों पर भारी निवेश हुआ।
हाईवे नेटवर्क 1.5 लाख किमी से अधिक
एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी
प्रोजेक्ट पूरा होने की गति 30% तेज
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट इसका उदाहरण हैं।
जीएसटी और अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण
GST ने टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाया।
1.4 करोड़ से अधिक GST रजिस्ट्रेशन।
90% से अधिक अनुपालन दर।
टैक्स कलेक्शन 15% वार्षिक दर से बढ़ा
छोटे व्यवसाय भी डिजिटल सिस्टम में जुड़े
काले धन पर रोक लगी
औपचारिक रोजगार और सुरक्षा लाभ बढ़े।
तेज़ रफ्तार की चुनौतियाँ भी हैं
गति के साथ असमानता और स्थानीय कठिनाइयाँ भी आती हैं।
हर राज्य उतनी जल्दी सुधार लागू नहीं कर पाता जितनी केंद्र चाहता है।
राज्यों में असमान प्रगति
दक्षिणी राज्य आगे हैं—कुछ उत्तरी और पूर्वी राज्य पिछड़ रहे हैं।
यह निवेश आकर्षण में फर्क पैदा करता है।
केंद्र-राज्य समन्वय की बैठकों से सुधार हो रहा है, पर अभी लंबा रास्ता बाकी है।
गति और परामर्श में संतुलन की जरूरत
तेज़ फैसले कभी-कभी सभी हितधारकों से चर्चा के बिना हो जाते हैं।
नौकरी बदलने वालों को स्किल ट्रेनिंग जैसी सुरक्षा ज़रूरी है।
PMKVY जैसे कार्यक्रम मदद करते हैं, पर कवरेज और बढ़नी चाहिए।
सुधारों को लंबी अवधि तक बनाए रखना
रिफॉर्म एक्सप्रेस को लगातार आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत मजबूती जरूरी है।
NITI Aayog और डेटा-ड्रिवन टूल्स इसके लिए महत्वपूर्ण हैं।
भविष्य की सरकारें तभी इस रफ्तार को कायम रख पाएँगी।
भारत के संरचनात्मक परिवर्तन की दिशा
मोदी की रिफॉर्म एक्सप्रेस तेज़ रफ्तार से आर्थिक ढांचे को बदल रही है।
डिजिटल सिस्टम, निर्माण प्रोत्साहन, वित्तीय सुधार—सब मिलकर भारत की विकास कहानी नई दिशा दे रहे हैं।
अभी चुनौतियाँ हैं, पर रफ्तार सही दिशा में है।
राज्यों, उद्योगों और नागरिकों की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
निवेशक भारत के मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सुधारों से आकर्षित हैं।
व्यवसाय सरल नियमों और डिजिटल ढांचों से लाभ ले रहे हैं।
नागरिकों को नौकरियों और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का फायदा मिल रहा है।
समान विकास के लिए राज्यों की भूमिका निर्णायक होगी।
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