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नई दिल्ली, 16 अगस्त (। दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति को हेरोइन और अवैध शराब रखने के
आरोप से बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में ‘‘बहुत अधिक विरोधाभास’’ है। विशेष

न्यायाधीश दीपक वासन ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए आठ अगस्त को संबंधित आदेश पारित किया।
उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि पुलिस ने जांच के दौरान तय प्रक्रिया के प्रति ‘‘जानबूझकर असम्मान’’ दिखाया।

अदालत ने रेखांकित किया कि जांच एजेंसी अन्वेषण के किसी दौर में एक भी गवाह से संपर्क नहीं कर सकी और
इसके बजाय ‘‘लापरवाह तरीके से और नियमित’ जवाब के तौर पर कहा कि जिन लोगों से जांच में शामिल होने के

लिए कहा गया, उन्होंने इससे मना दिया जबकि ऐसे किसी भी व्यक्ति और उनके पते आदि का खुलासा नहीं किया
गया है। गौरतलब है कि बिंदापुर थाने में वर्ष 2016 में आरोपी के खिलाफ दिल्ली आबकारी अधिनियम और

एनडीपीएस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने दावा किया कि था कि
आरोपी के पास से अवैध शराब (96 पव्वे) और करीब नौ ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी।