Rahul Gandhi की सुल्तानपुर कोर्ट में पेशी: मानहानि मामले की सुनवाई
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एमपी-एमएलए Court में राहुल गांधी की पेशी ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। यह मामला उनके उस बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने एक चुनावी रैली के दौरान “मोदी सरनेम” को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद स्थानीय भाजपा नेताओं ने 2019 में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
जैसे-जैसे चुनावी माहौल बन रहा है, इस मामले को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।
मामला क्या है?
2019 में एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा था, “सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?”
इस बयान को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और अन्य नेताओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। इसके बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499 और 500 के तहत सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए अदालत में मानहानि का मामला दर्ज किया गया।
राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया है और इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है।
सुल्तानपुर क्यों अहम है?
सुल्तानपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है। यह इलाका कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
स्थानीय स्तर पर दर्ज मुकदमा होने के कारण यह मामला राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील बन गया है। मीडिया कवरेज और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने इसे और चर्चित बना दिया।

सुनवाई के दिन क्या हुआ?
राहुल गांधी सुबह सुरक्षा घेरे में अदालत पहुंचे।
Court ने दस्तावेजों की समीक्षा की।
अभियोजन पक्ष ने रैली के वीडियो और बयान को साक्ष्य बताया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह राजनीतिक टिप्पणी थी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आती है।
Court ने आरोप तय करने पर तत्काल फैसला नहीं दिया और अगली तारीख 15 मार्च 2026 तय की।
राहुल गांधी को पहले से मिली जमानत जारी रही।
कानूनी दलीलें
अभियोजन पक्ष का तर्क:
बयान से सार्वजनिक रूप से प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
सोशल मीडिया पर बयान तेजी से फैला, जिससे छवि प्रभावित हुई।
बचाव पक्ष का तर्क:
यह राजनीतिक व्यंग्य था, किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार।

राजनीतिक असर
भाजपा का रुख
भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक नेताओं को अपने शब्दों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है।
पूर्व के मामलों से तुलना
राहुल गांधी पहले भी मानहानि के मामलों का सामना कर चुके हैं। 2023 में गुजरात की एक Court ने इसी टिप्पणी से जुड़े मामले में उन्हें सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उच्चतम न्यायालय से राहत मिली।
यह दर्शाता है कि राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई के बीच संतुलन का सवाल लगातार बना हुआ है।

आगे क्या?
15 मार्च 2026 को अगली सुनवाई
आरोप तय होने पर मुकदमे की औपचारिक ट्रायल प्रक्रिया शुरू हो सकती है
मामला लंबा चलने की संभावना
सुल्तानपुर में राहुल गांधी की पेशी केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा बन चुकी है।
एक ओर इसे मानहानि का मामला बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न कहा जा रहा है। आने वाले समय में Court का रुख और राजनीतिक प्रतिक्रिया, दोनों ही उत्तर प्रदेश की राजनीति पर असर डाल सकते हैं।
अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

