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नई दिल्ली, 07 अप्रैल  उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा दाखिले
की न्यूनतम उम्र बढ़ाकर छह साल किए जाने पर सवाल खड़ा उठाया है।

न्यायालय ने केवीएस से कहा कि आपने
खुद हलफनामे में माना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने के लिए केंद्र सरकार से मिले
निर्देश पर दाखिले की उम्र सीमा बढ़ाई गई है।

जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि केंद्र के जिस पत्र का हवाला देकर दाखिले की उम्र को पांच से बढ़ाकर छह साल
किया है, उसमें स्पष्ट तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए अगले दो से तीन साल में रोड
मैप तैयार करने को कहा गया है,

ऐसे में आपका रोड मैप कहां है। केवीएस ने दाखिले की उम्रसीमा बढ़ाने को सही
ठहराते हुए अपने हलफनामे में कहा था कि पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के
लिए मिले निर्देश के तहत ऐसा किया है।

मामले की सुनवाई के दौरान केवीएस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने न्यायालय को बताया
कि मामले पर विचार किया जा रहा है,

इस बारे में शुक्रवार को समुचित जवाब दिया जाएगा। इसके बाद उच्च
न्यायालय ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने सोमवार को
केवीएस से यह बताने के लिए कहा था कि इस साल पहली कक्षा में दाखिले की न्यूनतम उम्र पहले की तरह पांच
साल की जा सकती है या नहीं।

न्यायालय ने केवीएस के वकील से इस बारे में दिशा निर्देश लेने और अवगत
कराने का निर्देश दिया था।