Pratishtha

Pratishtha द्वादशी समारोह के लिए अयोध्या पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

उत्तर प्रदेश के हृदय में बसे अयोध्या नगर में इन दिनों भक्ति और उत्साह का माहौल है। Pratishtha द्वादशी के पावन अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगमन से राम नगरी एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गई है। राम मंदिर के भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह (जनवरी 2024) के कुछ ही महीनों बाद यह आयोजन आस्था और राष्ट्रीय चेतना के संगम का प्रतीक बन गया है। सर्दियों की धूप में मंदिर के स्वर्णिम शिखर चमक रहे हैं, चारों ओर राम नाम का जाप और श्रद्धालुओं की गूंज सुनाई दे रही है।

राजनाथ सिंह न केवल देश के रक्षा मंत्री हैं, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन से लंबे समय से जुड़े एक प्रमुख नेता भी रहे हैं। उनका यह दौरा सिर्फ व्यक्तिगत श्रद्धा का नहीं, बल्कि समकालीन भारत में धर्म, राजनीति और राष्ट्रबोध के आपसी संबंधों को भी रेखांकित करता है।

Pratishtha द्वादशी का धार्मिक महत्व

Pratishtha द्वादशी हिंदू पंचांग के अनुसार चंद्र मास की द्वादशी तिथि को आती है। यह तिथि विशेष रूप से भगवान विष्णु और मंदिर Pratishtha से जुड़ी मानी जाती है। अयोध्या में इसका महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि यह राम मंदिर में स्थापित रामलला की निरंतर पूजा और ऊर्जा के स्थायित्व का प्रतीक है।

हिंदू पंचांग में द्वादशी तिथि

इस दिन विशेष पूजन, अभिषेक और आरती होती है। दूध, जल और पंचामृत से भगवान राम का अभिषेक किया जाता है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं, दीप जलाते हैं और परिवार सहित पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं। यह दिन समुदाय को एकजुट करने वाला माना जाता है।

अयोध्या: भक्ति और परंपरा का केंद्र

Pratishtha द्वादशी पर अयोध्या में भक्ति की लहर दौड़ जाती है। साधु-संत, स्थानीय लोग और देश-विदेश से आए श्रद्धालु सरयू घाटों और मंदिर परिसर में जुटते हैं। शोभायात्राएं, घंटियों की ध्वनि और भजन-कीर्तन वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद की अनुष्ठान परंपरा

22 जनवरी 2024 की प्राण Pratishtha के बाद अयोध्या में हर चंद्र मास में विशेष अनुष्ठान हो रहे हैं। प्रतिष्ठा द्वादशी का उद्देश्य मंदिर और पूजा परंपरा को स्थिरता देना है। यह राम नवमी जैसे बड़े उत्सवों से अलग, शांत और गहन भक्ति का अवसर प्रदान करती है।

Rajnath Singh to visit Ayodhya for Pratishtha Dwadashi celebrations | Asianet Newsable

अयोध्या में राजनाथ सिंह की सहभागिता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह दौरा श्रद्धा और कर्तव्य का मेल है। कड़ी सुरक्षा के बीच वे राम मंदिर पहुंचे और गर्भगृह में दर्शन कर भगवान राम के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

आधिकारिक कार्यक्रम और जनसंपर्क

दर्शन के बाद उन्होंने पुजारियों से भेंट की और सरयू तट पर सामूहिक आरती में भाग लिया। अपने संदेश में उन्होंने राम मंदिर को “राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक” बताया। आम श्रद्धालुओं से संवाद और अभिवादन ने इस यात्रा को और खास बना दिया।

राम मंदिर आंदोलन से पुराने संबंध

राजनाथ सिंह 1980 के दशक से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने इस मुद्दे पर स्पष्ट समर्थन दिया। यही कारण है कि उनकी अयोध्या यात्राओं को ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाता है—एक संघर्ष से उपलब्धि तक की यात्रा।

सुरक्षा और रक्षा मंत्रालय का संदर्भ

लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही। रक्षा मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह ने व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की। ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त बल और समन्वय इस बात का संकेत है कि आज आस्था स्थलों की सुरक्षा भी राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

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राजनीतिक संदेश और समय की रणनीति

राजनाथ सिंह का यह दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2025 के अंत में संभावित चुनावी माहौल के संदर्भ में।

सत्तारूढ़ दल का संकेत

बीजेपी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से अपने सांस्कृतिक एजेंडे को मज़बूत करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राण Pratishtha में भूमिका के बाद, वरिष्ठ नेताओं की लगातार यात्राएं इस नैरेटिव को आगे बढ़ाती हैं कि पार्टी अपने वादों को पूरा करती है।

मतदाता वर्ग तक पहुंच

यह दौरा उन मतदाताओं से संवाद करता है जो परंपरा और आस्था को महत्व देते हैं। रक्षा मंत्री का मंदिर में दर्शन यह संदेश देता है कि शासन और संस्कृति के बीच दूरी नहीं है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने इसे आस्था से अधिक राजनीति से जोड़ा, जबकि कई दल सीधे विरोध से बचते दिखे। राम मंदिर की व्यापक स्वीकार्यता के चलते आलोचना सीमित रही।

Pratishtha के बाद अयोध्या का आर्थिक और बुनियादी ढांचा विकास

राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या में अभूतपूर्व बदलाव देखा गया है। Pratishtha द्वादशी जैसे आयोजनों से यह रफ्तार और तेज़ होती है।

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पर्यटन और रोजगार

2025 में अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 10 करोड़ तक पहुंच गई—जो पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और गाइड सेवाओं में रोज़गार के नए अवसर बने हैं।

मुख्य आंकड़े:

  • चरम महीनों में प्रतिदिन 5 लाख से अधिक श्रद्धालु

  • आतिथ्य क्षेत्र में लगभग 20,000 नए रोजगार

  • स्थानीय व्यापार में 50% तक की वृद्धि

वीआईपी दौरों की भूमिका

राजनाथ सिंह जैसे नेताओं की यात्राएं मीडिया ध्यान और सरकारी प्राथमिकता दोनों बढ़ाती हैं। इससे हवाई अड्डे, सड़कें, स्वच्छता और नदी संरक्षण जैसी परियोजनाओं को गति मिलती है।

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धर्म और शासन का स्थायी संगम

Pratishtha द्वादशी पर राजनाथ सिंह का अयोध्या दौरा आस्था, राजनीति और विकास के त्रिकोण को दर्शाता है। यह न केवल धार्मिक परंपराओं का सम्मान है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राम मंदिर आज राष्ट्रीय जीवन का एक अहम केंद्र बन चुका है।

मुख्य निष्कर्ष:

  • राम मंदिर की भूमिका धार्मिक से आगे बढ़कर राष्ट्रीय हो रही है

  • राजनाथ सिंह की सहभागिता बीजेपी के सांस्कृतिक संदेश को बल देती है

  • पर्यटन और विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ

  • सुरक्षा और राजनीति अब पवित्र स्थलों की संरचना का हिस्सा हैं

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