Delhi की वोटर लिस्ट से नाम हटाने का विवाद: पूर्व सांसद राकेश सिन्हा ने दिया करारा जवाब
ज़रा सोचिए — चुनावी माहौल गरम है और बीजेपी के वरिष्ठ नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा पर अचानक आरोप लगता है कि उनका नाम Delhi की वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। लेकिन राकेश सिन्हा ने तुरंत सामने आकर तथ्यों के साथ जवाब दिया और पूरा माहौल पलट दिया।
मूल आरोप: विपक्ष का दावा क्या था
विपक्षी दलों — खासकर आप और कांग्रेस — ने कहा कि राकेश सिन्हा अब Delhi के वोटर नहीं रहे। उनका नाम मतदाता सूची से मिटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर उन्होंने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए जिनमें सिन्हा का नाम नहीं दिख रहा था।
यह दावा उस वक्त आया जब Delhi चुनावों की तैयारियाँ चरम पर थीं। विपक्ष ने इसे यह साबित करने की कोशिश के रूप में पेश किया कि बीजेपी के नेता “Delhi के नहीं” हैं और बाहर से आकर राजनीति कर रहे हैं।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) हर साल मतदाता सूची को अपडेट करता है। अगर कोई व्यक्ति घर बदलता है, निधन हो जाता है या दोहरी एंट्री पाई जाती है, तो नाम हटाया जा सकता है।
Delhi में पिछले साल एक बड़ा संशोधन अभियान चला था जिसमें लगभग 50,000 नाम हटाए गए। कई बार पते या कागज़ी गड़बड़ी के कारण बड़े नाम भी अस्थायी रूप से हट जाते हैं।
राकेश सिन्हा का पलटवार
राकेश सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के आरोपों को “घटिया राजनीति” बताया। उन्होंने कहा,
“मैं 1980 के दशक से दिल्ली का मतदाता हूँ। विपक्ष झूठ फैला रहा है क्योंकि उन्हें बीजेपी की ताकत से डर लग रहा है।”
उन्होंने अपने पास मौजूद वैध वोटर आईडी कार्ड, नवीनतम मतदाता सूची और शपथ पत्र मीडिया के सामने रखे। सबूतों में उनका नाम साफ़ तौर पर दर्ज था। तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए, जिससे मामला शांत पड़ गया।
निवास और मतदान क्षेत्र पर स्पष्टीकरण
सिन्हा ने बताया कि उनका निवास Delhi में ही है, लेकिन उन्होंने हाल ही में पता बदला था। विपक्ष ने पुराने पते की लिस्ट चेक की, इसलिए उन्हें नाम नहीं मिला।
उन्होंने कहा, “Delhi मेरा घर है। मैं यहाँ रहता भी हूँ और वोट भी यहीं डालता हूँ।”
राजनीतिक असर और रणनीतिक नतीजे
विपक्ष चाहता था कि यह मामला सिन्हा की “Delhi से दूरी” का प्रतीक बने। लेकिन उनके तेज़ जवाब ने मामला उल्टा कर दिया। बीजेपी ने इसे “झूठ के खिलाफ सच्चाई की जीत” के तौर पर पेश किया।
अब पार्टी अपने प्रचार में “फेक न्यूज़ के खिलाफ जागरूकता” को नया थीम बना सकती है।
Delhi में पहले भी ऐसे विवाद हुए
2015 में एक आप नेता पर दोहरी वोटर एंट्री का आरोप लगा था, जो बाद में गलत निकला। 2020 में कांग्रेस के कुछ नेताओं के नाम भी अस्थायी रूप से हटे थे।
ऐसे विवाद चुनावी मौसम में आम हैं — हर दल विरोधियों के कागज़ टटोलता है।

Delhi के मतदाताओं के लिए जरूरी सलाह
आप भी अपनी वोटर स्थिति अभी जांच लें — ताकि मतदान के समय परेशानी न हो।
कैसे जांचें:
पर जाएँ और “Search Your Name in Electoral Roll” पर क्लिक करें।
नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और राज्य भरें।
मोबाइल ऐप Voter Helpline से भी जांच सकते हैं।
Delhi की जानकारी के लिए पर जाएँ।

अगर गलती दिखे:
Form 8 भरें और सुधार की जानकारी दें।
इसे ऑनलाइन सबमिट करें या बूथ लेवल अधिकारी को दें।
आवेदन का स्टेटस वेबसाइट पर ट्रैक करें।
सच्चाई की जीत
राकेश सिन्हा ने अपने दस्तावेज़ों से यह साबित कर दिया कि उनका नाम Delhi की वोटर लिस्ट में मौजूद है। विपक्ष का आरोप हवा में उड़ गया।
यह घटना याद दिलाती है कि चुनावी माहौल में अफवाहें तेज़ी से फैलती हैं, लेकिन तथ्य अंत में जीतते हैं।
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