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Delhi एसिड अटैक: जब मुख्य आरोपी मौके पर नहीं था — पिता-बेटी की साजिश ने दिल दहला देने वाला मोड़ लिया

कल्पना कीजिए — Delhi की एक व्यस्त सड़क, दिन का उजाला, और अचानक एक चीख़ से सबकुछ ठहर जाता है। एक युवती पर तेजाब फेंका जाता है, उसका चेहरा और हाथ झुलस जाते हैं। यह दिल दहला देने वाली घटना पूरे शहर को हिला देती है, लेकिन जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, सामने आता है कि कहानी में जितना दिखाई देता है, उससे कहीं ज़्यादा छिपा हुआ है।

इस बार का ट्विस्ट — मुख्य आरोपी खुद घटना-स्थल पर मौजूद ही नहीं था।
और जो सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया — यह हमला नहीं, बल्कि पिता-बेटी की सोच-समझकर रची गई साजिश थी।

घटना की शुरुआत और शुरुआती जांच

घटना 15 अक्टूबर की दोपहर करीब 3 बजे पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में हुई। 25 वर्षीय युवती, जो एक कॉल सेंटर में काम करती थी, ऑफिस से घर लौट रही थी। तभी बाइक पर आए एक व्यक्ति ने अचानक बोतल से तेजाब फेंका और भाग गया।

पीड़िता का चेहरा और हाथ झुलस गए। राहगीरों ने तुरंत मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय पुलिस ने मिनटों में पहुंचकर मामला दर्ज कर लिया।

शुरुआती चश्मदीदों के अनुसार—

  • हमलावर हेलमेट पहने हुए था।

  • बाइक की रफ्तार बहुत तेज थी।

  • एक राहगीर ने कहा कि फेंकने के बाद हमलावर ने पीछे मुड़कर देखा और मुस्कुराया।

इन बयानों के आधार पर पुलिस ने आसपास के CCTV खंगाले। कुछ फुटेज में बाइक दिखी, लेकिन चेहरे की पहचान मुश्किल थी।

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पहली गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी का ‘ग़ायब रहना’

शाम तक दो संदिग्धों को पकड़ा गया जिन्होंने पूछताछ में राजेश नाम के व्यक्ति का नाम लिया — वही इस हमले का “मास्टरमाइंड” था।
पर जब पुलिस ने लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड चेक किए, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ —

राजेश घटना के समय स्थल पर था ही नहीं।
वह करीब 5 किलोमीटर दूर एक चाय की दुकान पर बैठा पाया गया। मोबाइल लोकेशन, दुकान के मालिक का बयान और CCTV फुटेज — सबने यह बात पक्की कर दी।

फिर भी पुलिस को यकीन था कि वह पूरे खेल का सूत्रधार है।

साजिश का खुलासा: कैसे पिता-बेटी ने रचा पूरा प्लान

जांच में सामने आया कि यह हमला किसी अजनबी ने नहीं, बल्कि राजेश की बेटी प्रिया के कहने पर हुआ था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक—

  • प्रिया का पीड़िता से कार्यालय में पुराना झगड़ा था।

  • दोनों एक ही कॉल सेंटर में काम करती थीं।

  • कुछ महीने पहले प्रिया को अनुशासनहीनता के कारण नौकरी से निकाला गया था, और उसे लगा कि इसके पीछे वही लड़की है।

प्रिया ने पिता से बात की। राजेश, जो बेटी के पक्ष में अंधा था, ने “सज़ा देने” की बात कही। उसने एक युवक को पैसे देकर तेजाब फेंकवाने की योजना बनाई।

लेकिन खुद मौके पर क्यों नहीं गया?
क्योंकि वह जानता था कि CCTV और मोबाइल लोकेशन पुलिस के लिए अहम सबूत होंगे। इसलिए उसने दूरी बनाकर खुद को “निर्दोष” साबित करने की तैयारी पहले से कर ली थी।

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पैसे और फोन रिकॉर्ड्स से खुली पोल

  • बैंक रिकॉर्ड में पाया गया कि राजेश ने हमलावर को हमले से तीन दिन पहले ₹20,000 ट्रांसफर किए।

  • व्हाट्सऐप चैट में “काम निपटा देना” और “उसको सबक सिखा देना” जैसे संदेश मिले।

  • हमले के ठीक पहले दोनों में फोन पर 45 सेकंड की बातचीत भी दर्ज हुई।

इन साक्ष्यों ने राजेश की “साफ छवि” की कहानी को तोड़ दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रिया ने ही हमले की जगह चुनी, ताकि भागने में आसानी हो और भीड़ में शोर से बचा जा सके।

कैसे चली जांच: फोरेंसिक और तकनीकी सबूत

Delhi पुलिस की क्राइम टीम ने मामले को टेक्नोलॉजी की मदद से सुलझाया।

  • CCTV फुटेज: बाइक की दिशा, हेलमेट, और नंबर प्लेट से हमलावर की पहचान हुई।

  • फोन डेटा: कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन से पिता-बेटी और हमलावर के बीच निरंतर संपर्क साबित हुआ।

  • रासायनिक विश्लेषण: घटनास्थल पर मिला तेजाब “सुलभ टॉयलेट क्लीनर” निकला, जो आसानी से बाजार में मिलता है।

मोटिव: नौकरी का झगड़ा या कुछ और?

शुरुआती कारण एक “ऑफिस विवाद” बताया गया, लेकिन जांच ने और गहराई दिखाई।

  • प्रिया ने अपने पिता को बताया था कि पीड़िता ने उसकी “इमेज खराब” कर दी।

  • परिवार में आर्थिक तनाव था — पिता की पुरानी दुकान घाटे में थी।

  • बेटी को लगता था कि अगर पीड़िता बदनाम हो जाएगी, तो उसकी नौकरी वापस मिल सकती है।

यह व्यक्तिगत बदले और पारिवारिक गुस्से का मिला-जुला रूप था।

चैट्स और धमकी संदेशों ने किया सब कुछ साफ

पीड़िता के फोन से मिले मैसेजों में धमकी भरे शब्द थे —

“अब तुझे चेहरे से पहचानना मुश्किल होगा।”
“जिससे खेला है, वही तुझे सिखाएगा।”

ये संदेश एक पुराने नंबर से आए, जो बाद में प्रिया के नाम रजिस्टर्ड निकला।

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कानूनी पहलू: भारत में एसिड अटैक के कड़े कानून

भारत में एसिड अटैक एक संगीन अपराध है।

  • धारा 326A (IPC): किसी व्यक्ति पर एसिड फेंकना — सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है।

  • धारा 120B (षड्यंत्र): साजिश रचने वालों पर भी समान सजा लागू होती है।

राजेश और प्रिया दोनों पर अब 326A, 120B, और 201 (सबूत मिटाने की कोशिश) के तहत मामला दर्ज है।

पीड़िता की स्थिति और सहायता

पीड़िता फिलहाल Delhi के LNJP अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने बताया कि चेहरे और हाथों की त्वचा बुरी तरह झुलसी है, लेकिन वह खतरे से बाहर है।

सरकार ने एसिड अटैक सर्वाइवर सहायता निधि से ₹3 लाख की मदद मंजूर की है।
NGO समूह उसकी सर्जरी और काउंसलिंग का खर्च उठा रहे हैं।

भारत में एसिड अटैक के आंकड़े और हकीकत

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के मुताबिक—

  • भारत में हर साल करीब 100-120 एसिड अटैक केस दर्ज होते हैं।

  • इनमें से 70% मामलों में आरोपी पीड़िता को पहले से जानते हैं।

  • ज़्यादातर हमले “बदले” या “अस्वीकृत रिश्ते” के कारण होते हैं।

Delhi, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल इस अपराध के “हॉटस्पॉट” माने जाते हैं।

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मुख्य आरोपी का बचाव और कानून की पेचीदगी

राजेश के वकीलों का कहना है कि चूंकि वह मौके पर मौजूद नहीं था, इसलिए सीधा अपराध साबित नहीं होता।
लेकिन अभियोजन पक्ष का तर्क है —

“मौजूद न होना साजिश को खत्म नहीं करता। जिसने योजना बनाई और धन दिया, वही मुख्य दोषी है।”

कानून के मुताबिक, अपराध की “योजना” और “आदेश” देना भी उतना ही दंडनीय है जितना कि खुद हमला करना।

सामाजिक संदेश और सीख

यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि एक गहरी चेतावनी है।

  1. नफरत और बदले की आग सबको जलाती है।
    — प्रिया ने जिस लड़की को सज़ा देना चाही, उसी के साथ खुद का भविष्य भी जला दिया।

  2. कानून से बचने की चालें टिकती नहीं।
    — राजेश ने सोचा था कि दूरी बनाकर बच जाएगा, पर डिजिटल युग में हर कॉल, हर चैट सबूत बन जाती है।

  3. समाज को संवेदनशील होना होगा।
    — एसिड की बिक्री पर निगरानी बढ़ानी चाहिए, और युवाओं में गुस्सा-नियंत्रण व संवाद सिखाना जरूरी है।

अब आगे क्या?

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि—

  • क्या किसी और परिवार-सदस्य ने हमले में मदद की?

  • तेजाब खरीदने वाला व्यक्ति कौन था और उसने कहाँ से बोतल ली?

  • क्या इस साजिश के पीछे कोई और बड़ा उद्देश्य था — जैसे ब्लैकमेल या आर्थिक लाभ?

अदालत में जल्द ही चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद है।

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एक साजिश जो खुद पर भारी पड़ी

Delhi का यह एसिड अटैक मामला डर और हैरानी दोनों लाता है।
एक पिता-बेटी की जोड़ी ने बदले की भावना में इंसानियत को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने सोचा था कि “दूरी बनाकर” बच निकलेंगे, पर सच्चाई तकनीक और सबूतों से कहीं नहीं छिप सकती।

पीड़िता के लिए न्याय की राह शुरू हो चुकी है।
और हम सबके लिए यह एक सवाल छोड़ जाती है —

“क्या गुस्सा कभी इंसाफ ला सकता है, या बस और ज़िंदगियाँ बर्बाद करता है?”

मुख्य बातें संक्षेप में:

  • घटना: 15 अक्टूबर, लक्ष्मी नगर, Delhi।

  • आरोपी: राजेश (45) और उसकी बेटी प्रिया (22)।

  • मकसद: पुराना ऑफिस झगड़ा और बदला।

  • सबूत: बैंक ट्रांसफर, व्हाट्सऐप चैट, फोन कॉल डेटा।

  • कानून: IPC 326A, 120B, 201।

  • पीड़िता: अस्पताल में स्थिर स्थिति, सरकार की सहायता जारी।

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