Delhi में वायु प्रदूषण संकट: सीएम रेखा गुप्ता ने टूटी सड़कों और धूल नियंत्रण पर उच्चस्तरीय बैठक की अगुआई
Delhi का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) इस हफ्ते 450 तक पहुँच गया—यानी “गंभीर” स्तर, जहाँ सांस लेना मुश्किल हो जाता है और आंखें जलने लगती हैं। प्रदूषण सिर्फ फैक्ट्रियों या गाड़ियों से नहीं आता—टूटी सड़कों से उठने वाली धूल भी स्मॉग को कहीं अधिक जहरीला बना देती है। यह स्वास्थ्य संकट केवल सर्दियों के बैन से नहीं सुलझेगा—जमीन पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत है।
अध्ययनों के अनुसार, सड़क धूल Delhi-NCR के व्यस्त इलाकों में PM2.5 के 20–30% तक योगदान देती है। इसी तात्कालिकता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर सड़कों और धूल प्रबंधन पर सख्त निर्देश जारी किए। यह कदम दिल्ली की विषैली हवा के खिलाफ एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
सीएम गुप्ता का बड़ा निर्देश: अब बुनियादी ढाँचे को लेकर नई सोच
रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया—टूटी सड़कों को ठीक किए बिना प्रदूषण नहीं घट सकता। बैठक में विभिन्न एजेंसियों को तेज़ी से काम शुरू करने के स्पष्ट आदेश दिए गए।
सड़क धूल के योगदान की समीक्षा
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्टों के अनुसार, सड़क धूल Delhi के PM10 प्रदूषण का लगभग 38% हिस्सा बनाती है, खासकर सूखे महीनों में।
मुख्य सड़कों पर बने गड्ढे
बड़े गाड़ियों के गिरते मलबे
राजमार्गों के किनारे अधूरे कच्चे हिस्से
ये सभी धूल को उड़ाकर हवा में घुला देते हैं।
बैठक में MCD, PWD और NHAI जैसी प्रमुख एजेंसियाँ शामिल थीं।
MCD: 500 किमी सड़क पर धूल मानकों की जांच एक महीने में
PWD: मरम्मत के लंबित कामों की रिपोर्ट
NHAI: भारी ट्रैफिक वाले एक्सप्रेसवे पर धूल नियंत्रण
महत्वपूर्ण सड़कों की मरम्मत व रखरखाव को प्राथमिकता
अधिकारियों ने सबसे बुरी हालत वाले मार्गों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ट्रैफिक डेटा और एयर क्वॉलिटी सेंसरों की मदद से रिंग रोड, आउटर दिल्ली और कुछ औद्योगिक गलियारों को ‘हॉटस्पॉट’ चिन्हित किया गया।
सीएम गुप्ता ने बजट की तुरंत रिलीज़ का आदेश दिया।
अब
वैक्यूम रोड स्वीपर
वॉटर स्प्रे मशीनें
रात में मरम्मत दल
पूरे शहर में तैनात होंगे।
लक्ष्य है कि मध्य जनवरी तक प्रमुख सड़कों की मरम्मत पूरी हो जाए और सड़क धूल में 15% की तुरंत कमी आए।
उन्नत धूल-नियंत्रण तकनीकों का लागू होना
पुराने तरीके छोड़कर दिल्ली को अब आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
आधुनिक यांत्रिक सफाई रणनीति अनिवार्य
हाथ से झाड़ू लगाने से धूल हवा में और उड़ती है। इसके बजाय
पानी के स्प्रे
सक्शन सिस्टम
वाली मशीनें धूल को खींचकर जमा करती हैं। ये काम रात में सबसे बेहतर होते हैं ताकि ट्रैफिक में बाधा न आए।
निर्देशों के तहत:
अगले सप्ताह तक 100 यांत्रिक स्वीपर तैनात
रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक मुख्य सड़कों की सफाई
GPS से ट्रैकिंग
सफाई के बाद AQI का现场 परीक्षण
यदि धूल कम न हो तो प्रक्रिया दोहराई जाएगी।

निर्माण व ध्वस्तीकरण (C&D) मलबे की आवाजाही पर सख्ती
धूल उड़ाने वाले बिना ढके ट्रक अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
सभी ट्रकों पर पूर्ण कवर/तिरपाल अनिवार्य
स्कूलों व रिहायशी इलाकों से दूर निर्धारित मार्ग
खाली प्लॉट पर मलबा फेंकने पर 50,000 रुपये का तत्काल जुर्माना
निर्माण स्थलों पर मिस्ट गन, व्हील वॉश, ग्रीन नेट बैरिकेड अनिवार्य
कंपनियों को साप्ताहिक रिपोर्ट देनी होगी और निरीक्षक अचानक जांच करेंगे। पिछले पायलट प्रोजेक्ट्स दिखाते हैं कि इससे धूल में 40% कमी आ सकती है।
एजेंसियों के बीच समन्वय और सख्त प्रवर्तन
अकेली किसी एक एजेंसी के प्रयास से कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं।
यूनिफाइड मॉनिटरिंग सेल का गठन
एक साझा डिजिटल डैशबोर्ड बनाया जाएगा, जहाँ
सड़क मरम्मत
सफाई समय
जुर्माने
AQI डेटा
सब रियल टाइम दिखेगा।
समीक्षा का नेतृत्व CAQM करेगा। देरी पर संबंधित विभाग से जवाब तलब होगा।
नागरिकों के लिए भी एक सार्वजनिक व्यू उपलब्ध रहेगा ताकि काम पारदर्शी रहे।

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सज़ा
लगातार नियम तोड़ने पर दोगुने जुर्माने
ट्रक से मलबा गिरने पर 2 लाख रुपये तक का दंड
काम धीमा होने पर MCD/PWD को बजट में कटौती
एक नया हॉटलाइन नंबर भी शुरू होगा—
आप किसी भी धूलयुक्त सड़क, निर्माण स्थल या टूटी सड़क की फोटो भेजकर शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
उल्लंघन की प्रक्रिया:
पहली बार—चेतावनी + छोटा जुर्माना
दूसरी बार—भारी जुर्माना + काम रोकना
लगातार उल्लंघन—लाइसेंस की समीक्षा
परिवर्तन को कैसे मापेंगे: परिणाम और आगे का रास्ता
शॉर्ट-टर्म बदलाव और डेटा बेंचमार्किंग
अगले कुछ हफ्तों में आप देखेंगे:
सड़कों पर ज्यादा मशीनें
निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट
पानी छिड़काव के जरिए दीवारों पर कम धूल
30 दिनों में लक्ष्य है—
PM10 में 10–15% की कमी
सड़क की ‘स्मूदनेस स्कोर’ में सुधार
50 सेंसर पॉइंट्स पर हवा की गुणवत्ता में गिरावट का रुका होना
नागरिक भी इसमें भाग ले सकते हैं—हॉटलाइन पर अपने इलाके की स्थिति अपडेट करें।

क्लीन एयर के लिए लंबी अवधि की रणनीति
सिर्फ अभी के फिक्स नहीं, बल्कि
धूल-रोधी सड़कें
चौड़े ग्रीन बफ़र ज़ोन
सड़क किनारों पर पेड़-पौधे
जैसे कदम शामिल किए जाएंगे।
2026 तक दिल्ली की प्रमुख सड़कें नए मानकों के हिसाब से अपग्रेड होंगी।
साफ़ आसमान के लिए मजबूत कदम
सीएम रेखा गुप्ता की यह बैठक Delhi की वायु प्रदूषण लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। टूटी सड़कों से उठने वाली धूल अब केंद्र में है—और एजेंसियों को स्पष्ट लक्ष्य, बेहतर मशीनें और सख्त जवाबदेही दी गई है।
कड़े नियम, नागरिकों की भागीदारी और निरंतर निगरानी—ये सब मिलकर Delhi की हवा को साफ़ करने में मदद करेंगे।
आगे जब आप सड़कों पर यांत्रिक क्लीनर, ढके हुए ट्रक और कम उड़ती धूल देखें—जानिए, बदलाव शुरू हो चुका है।

