Delhi एयर पॉल्यूशन विरोध प्रदर्शन में हिंसा: पुलिस पर पेपर स्प्रे हमले के बाद 15 लोग हिरासत में
Delhi के दिल में तब अफरा-तफरी मच गई जब जहरीली हवा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिस से भिड़ंत हो गई। आसपास की आगों से उठता धुआँ हवा में घुला हुआ था—जैसे गुस्सा भी उसी धुएँ में तैर रहा हो। स्वच्छ हवा की मांग से शुरू हुआ यह आंदोलन चीख-पुकार, पेपर स्प्रे और गिरफ्तारियों में बदल गया। यह घटना दिखाती है कि भारत के प्रदूषण संकट ने लोगों में कितनी गहरी पीड़ा पैदा कर दी है।
Delhi की हवा लंबे समय से एक बुरा सपना बनी हुई है—विशेषकर सर्दियों में जब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से ऊपर पहुँच जाता है। वर्षों से की जा रही अनदेखी के खिलाफ यह प्रदर्शन फूटा। सरकार की देरी से नाराज़ भीड़ के शांत मार्च के हिंसक होने के बाद 15 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिससे आगे और अशांति का डर बढ़ गया।
प्रदर्शन की संरचना: मांगें और लामबंदी
टकराव से पहले: बढ़ती नागरिक निराशा
हर साल पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से Delhi पर स्मॉग छा जाता है। हाल के महीनों में फैक्ट्रियों और गाड़ियों पर कमजोर नियमों ने हालात बदतर कर दिए। लोगों को लगा कि सरकार की ऑड-ईवन योजना भी हवा को साफ करने में नाकाम रही।
क्लीन एयर कैंपेन जैसे स्थानीय समूह और कॉलेजों के छात्र संगठन ऑनलाइन सक्रिय हुए। बच्चों के स्कूल छूटने और बुज़ुर्गों के घरों में कैद होने की कहानियाँ सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इसने गुस्से की लहर को सड़कों तक ला दिया।
पिछले सप्ताह प्रदूषण से हुई मौतों में 20% बढ़ोतरी की नई रिपोर्ट सामने आई। उसी क्षण निराशा ने दृढ़ संकल्प का रूप ले लिया और सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरने को तैयार हो गए।

प्रदर्शन मार्ग और शुरुआती मंशा
भीड़ इंडिया गेट के पास जमा हुई—जो बड़े आयोजनों के लिए जाना जाता है। मार्च की योजना संसद भवन तक जाने की थी। “स्मॉग रोको, फेफड़े बचाओ!” जैसे नारे गूँज रहे थे।
मुख्य मांगें थीं:
पुराने डीज़ल ट्रकों पर कड़ी रोक
किसानों को पराली न जलाने में मदद
गंभीर प्रदूषण वाले दिनों में फैक्ट्रियों पर सख्त बंदी
परिवार भी शामिल थे—छोटे बच्चों को मास्क पहनाकर स्ट्रोलर में ले जाया जा रहा था।
पुलिस शुरू से ही मार्ग पर तैनात थी। मार्च शांत था, लेकिन ट्रैफिक जाम की आवाजें तनाव बढ़ा रही थीं।
हिंसा की टाइमलाइन: नारों से टकराव तक
सुबह 11 बजे तक भीड़ 500 से ज़्यादा हो गई। एक घंटे तक नारेबाज़ी हुई। तनाव तब बढ़ा जब रास्ता बैरिकेड्स से बंद मिला।
12 बजे के आसपास एक प्रदर्शनकारी ने बैरिकेड धकेला और झड़प शुरू हो गई। 1 बजे के करीब कुछ लोगों ने पुलिस पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया—यही पल स्थिति बिगाड़ गया।
कुछ लोगों ने पानी की बोतलें भी फेंकीं। पुलिस ने तुरंत बैकअप बुलाया। झड़प 20 मिनट तक चली, उसके बाद माहौल शांत हुआ—लेकिन अव्यवस्था के निशान छोड़ गई।
मुख्य भिड़ंत: हिंसा के आरोप और पुलिस की कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों द्वारा पेपर स्प्रे के इस्तेमाल की रिपोर्ट
दर्शकों ने देखा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के चेहरों पर पेपर स्प्रे छिड़का। यह दुर्लभ था और कई लोगों को झटका लगा।
पुलिस लॉग के अनुसार, कम से कम तीन अधिकारियों को तुरंत आँख धोनी पड़ी।
आयोजकों ने बाद में कहा कि यह काम कुछ लोगों का था, पूरी भीड़ का नहीं।

पुलिस की प्रतिक्रिया और हिरासत
पेपर स्प्रे लगने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को पीछे धकेला।
15 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिन पर हिंसा और रास्ता अवरुद्ध करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस आयुक्त ने इसे “शांति भंग” बताया।
कई लोगों के परिवार थानों के बाहर जमा हो गए, जहाँ मानवाधिकार समूहों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
गवाहों की नजर में झड़प
सोशल मीडिया पर वीडियो की बाढ़ आ गई।
किसी ने एक पुलिसकर्मी को ढाल पकड़े हुए आँखें मलते हुए कैद किया।
एक दुकानदार ने कहा, “हवा पहले ही आँखें जला रही थी, लगता है उसी ने लड़ाई को चिंगारी दी।”
मूल समस्या: Delhiदिल्ली का लगातार बिगड़ता वायु संकट
AQI पिछले हफ्ते 450 तक पहुँच गया—“गंभीर” श्रेणी में। यह ऐसे है जैसे आप हर घंटे धुएँ का गुबार अंदर ले रहे हों।
स्वास्थ्य प्रभाव:
बच्चों में अस्थमा के मामले 30% बढ़े
बुज़ुर्गों में हार्ट स्ट्रोक का जोखिम
WHO रिपोर्ट: भारत में 16 लाख शुरुआती मौतें प्रदूषण से
सर्दियों में हवाएँ रुक जाती हैं, जिससे धूल और धुआँ फँस जाता है।
सरकारी नीतियों पर आलोचनाएँ
ऑड-ईवन योजना के नतीजे कमजोर
पराली रोकने के नियम ढीले
फैक्टरियों पर सख्त कार्रवाई की कमी
ग्रीनपीस ने इन्हें “घाव पर पट्टी” कहा।
शहर के नेता पेड़ लगाने और मेट्रो विस्तार की बात करते हैं, लेकिन स्मॉग हावी रहता है।

प्रतिक्रियाएँ: राजनीतिक असर और जनता में बहस
सरकार की प्रतिक्रिया
पर्यावरण मंत्री ने पेपर स्प्रे की निंदा की।
केंद्रीय सरकार ने शांति की अपील की और अतिरिक्त AQI मॉनिटर लगाने की बात कही।
नीतियों में बड़ा बदलाव अभी नहीं दिखा।
एक्टिविस्ट समूहों की प्रतिक्रिया
Fridays for Future और अन्य समूह 15 गिरफ्तार लोगों को कानूनी सहायता दे रहे हैं।
वे गैर-हिंसक विरोध की अपील करते हैं लेकिन मानते हैं कि “प्रदूषण रोज़ जान ले रहा है।”
मीडिया और जनता की राय
टीवी चैनलों ने हिंसा पर फोकस किया,
अखबारों ने प्रदूषण के आंकड़े छापे,
सोशल मीडिया विभाजित रहा—
कुछ पुलिस के साथ, कुछ प्रदर्शनकारियों के समर्थन में।
भारत में पर्यावरणीय आंदोलन का मोड़
Delhi प्रदूषण प्रदर्शन पेपर स्प्रे, झड़प और 15 गिरफ्तारियों के साथ सुर्खियों में रहा।
यह दिखाता है कि प्रदूषण संकट लोगों को किस कदर हताश कर चुका है।
लेकिन हिंसा संदेश को कमजोर करती है—सुरक्षित और प्रभावी विरोध ही आगे का रास्ता है।
मजबूत कानूनों और जनता के दबाव से ही हवा साफ हो सकती है।
Nitish कुमार ने बिहार में 1 करोड़ युवाओं को रोजगार देने की बड़ी योजना का अनावरण किया
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

