Delhi वायु प्रदूषण संकट: सुप्रीम कोर्ट का दखल, बॉर्डर टोल पर रोक की मांग
सोचिए, सुबह उठते ही आसमान नीला नहीं बल्कि धुंध से भरा हो। Delhi में यह आज की हकीकत है। दिसंबर 2025 में एक बार फिर प्रदूषण चरम पर है—एनसीआर दमघोंटू ज़ोन बन चुका है। बच्चे घरों में कैद हैं, दफ्तर जल्दी बंद हो रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का सख्त कदम उम्मीद जगाता है: दिल्ली के प्रमुख बॉर्डर टोल पर टोल वसूली पर अस्थायी रोक।
यह सिर्फ फीस की बात नहीं है। टोल प्लाज़ा पर लंबी कतारों में फँसे वाहन ज़हरीला धुआँ उगलते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीधे-सीधे प्रदूषण से जोड़ा है। टोल हटेंगे तो जाम घटेगा, वाहन चलेंगे, और हवा कुछ साफ़ होगी।
सुप्रीम कोर्ट का अहम हस्तक्षेप-Delhi
अदालत ने सिंघु, नोएडा जैसे व्यस्त बॉर्डर पॉइंट्स पर टोल कलेक्शन रोकने को कहा। मकसद—भीड़ कम करना और उत्सर्जन घटाना। जजों ने साफ कहा कि टोल प्लाज़ा “पर्यावरणीय खतरा” बन चुके हैं और इनके चलते लोग धुएँ में सांस लेने को मजबूर हैं। टोल दोबारा शुरू करने से पहले बेहतर ट्रैफिक फ्लो का प्रमाण मांगा गया है।
यह फैसला भारत के उत्सर्जन घटाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जुड़ा है। अदालत का संदेश स्पष्ट है: पुराने ढांचे अब स्वीकार्य नहीं।
टोल प्लाज़ा, जाम और प्रदूषण-Delhi
ट्रैफिक जाम सिर्फ असुविधा नहीं—यह प्रदूषण फैक्ट्री है। रेंगते या रुके वाहन ज़्यादा PM2.5 और NOx छोड़ते हैं, जो फेफड़ों के लिए खतरनाक हैं। IIT दिल्ली जैसे संस्थानों के अध्ययन बताते हैं कि जाम वाले इलाकों में स्थानीय प्रदूषण 20–30% तक बढ़ जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक, बॉर्डर पर आइडलिंग से सालाना 500 टन से ज़्यादा CO₂ निकलती है। भारी ट्रक सबसे बड़े दोषी हैं—उनके इंजन लंबी कतारों में घंटों चलते रहते हैं।
नीति संकेत और समाधान
1) पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक टोल (FASTag)
FASTag के बावजूद जाम इसलिए हैं क्योंकि 100% अनुपालन नहीं है और लेन क्षमता सीमित है। अदालत का इशारा है—सभी वाहनों के लिए अनिवार्य ETC, ज्यादा FASTag लेन, तेज़ स्कैनिंग, और गैर-अनुपालन पर जुर्माना।
2) कमर्शियल वाहनों का बेहतर प्रबंधन
शहर से अलग फ्रेट कॉरिडोर
भारी वाहनों की नाइट-एंट्री
पीक आवर्स में डायनेमिक प्राइसिंग
ट्रकों के लिए डेडिकेटेड लेन और रियल-टाइम रूट ऐप्स
बीजिंग, लंदन जैसे शहरों के मॉडल बताते हैं कि ये उपाय जाम 10–15% तक घटा सकते हैं।
जन प्रतिक्रिया और आगे की राह-Delhi
यात्रियों ने राहत महसूस की है—सोशल मीडिया पर “लंबा इंतज़ार खत्म” जैसे संदेश दिख रहे हैं। परिवहन एजेंसियां कदम बढ़ा रही हैं, हालांकि राजस्व नुकसान की चिंता भी है। पर्यावरण समूह इसे शुरुआत मानते हैं और GRAP जैसे उपायों के सख्त पालन की मांग करते हैं।

अल्पकाल में बॉर्डर टोल रोक से स्थानीय प्रदूषण 10–20% तक घट सकता है। दीर्घकाल में राज्यों के बीच तालमेल, उद्योगों पर सख्ती और पराली प्रबंधन जैसे कदम ज़रूरी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश साफ़ संदेश देता है: स्मार्ट मोबिलिटी = साफ़ हवा। बॉर्डर पर टोल हटाकर आइडलिंग घटेगी, जाम कम होगा और प्रदूषण पर लगाम लगेगी।
मुख्य बातें
टोल बाधाएँ हटें, जाम घटे
100% इलेक्ट्रॉनिक टोल लागू हो
राज्यों का समन्वय और सख्त प्रवर्तन
आप भी योगदान दें—पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएँ, कार-पूल करें, और एयर क्वालिटी अलर्ट्स पर ध्यान दें। मिलकर इस न्यायिक पहल को स्थायी स्वच्छ हवा में बदल सकते हैं।

