Delhi विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी से शुरू: एजेंडा, अहम विधेयक और राजनीतिक मायने
Delhi विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी 2026 से शुरू होने जा रहा है, ठीक उस समय जब राजधानी ठंड और कोहरे की चपेट में रहती है। हाल ही में हुए एमसीडी चुनावों के बाद राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है—जहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने सत्ता बनाए रखी, वहीं भाजपा ने सीटें बढ़ाकर दबाव बनाया है। ऐसे में सवाल उठता है: क्या यह छोटा सत्र Delhi की बड़ी समस्याओं—जैसे प्रदूषण, पानी की किल्लत और प्रशासनिक अड़चनों—पर ठोस कदम उठा पाएगा?
इस लेख में जानते हैं सत्र का एजेंडा, संभावित अहम विधेयक और इसके राजनीतिक असर।
सत्र का स्वरूप और विधायी प्राथमिकताएं
Delhi सरकार इस शीतकालीन सत्र को संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण बता रही है। अवकाश के बाद विधानसभा के फिर से सक्रिय होने के साथ ही सबकी नजर इस पर है कि सरकार और विपक्ष शहर की जमीनी समस्याओं से कैसे निपटते हैं।
सत्र की अवधि और ढांचा
यह सत्र 5 जनवरी से शुरू होकर मध्य जनवरी तक चलने की संभावना है। यह हाल के वर्षों के सबसे छोटे सत्रों में से एक होगा। सीमित बैठकों के कारण केवल जरूरी मुद्दों पर ही चर्चा होगी।
कार्यवाही का ढांचा सामान्य रहेगा—पहले प्रश्नकाल, फिर विधेयकों पर चर्चा। हालांकि, सर्द मौसम, कोहरा और स्वास्थ्य अलर्ट के चलते कुछ बैठकें हाइब्रिड या ऑनलाइन भी हो सकती हैं।
सरकार का एजेंडा: किन मुद्दों पर फोकस
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP सरकार प्रदूषण नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं पर जोर देने की तैयारी में है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि:
वायु प्रदूषण पर कड़ा कानून
सड़कों और स्थानीय ढांचे में सुधार
पानी की कमी और स्कूलों की स्थिति
जैसे मुद्दों पर विधेयक या चर्चाएं होंगी। यह सत्र बजट से पहले सरकार के लिए अपनी उपलब्धियां गिनाने का मौका भी है।
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संभावित अहम विधेयक
1. प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े विधेयक
Delhi क्लीन एयर एक्ट 2026 पेश किया जा सकता है। इसके तहत:
फैक्ट्रियों पर सख्त निगरानी
इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा
आनंद विहार जैसे इलाकों में एंटी-स्मॉग टावर
करीब 500 करोड़ रुपये के ग्रीन फंड का प्रस्ताव है। उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना लग सकता है।
मुख्य बिंदु:
उद्योगों का वार्षिक पर्यावरण ऑडिट
मार्च 2026 से पहला चरण
प्रदूषण में 20% तक कमी का दावा
2. नगर निगम और स्थानीय शासन सुधार
एमसीडी चुनावों के बाद नगर सुधार विधेयक लाया जा सकता है, जिसका उद्देश्य:
कचरा प्रबंधन में सुधार
वार्ड और विधानसभा क्षेत्रों के बीच तालमेल
सड़कों और पार्कों के काम में देरी खत्म करना
इससे पूर्वी Delhi जैसे इलाकों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं पर असर पड़ सकता है।
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3. वित्तीय प्रस्ताव और अनुपूरक बजट
सरकार 2,000 करोड़ रुपये की अनुपूरक बजट मांग ला सकती है, जिसमें शामिल हैं:
बाढ़ राहत खर्च
मोहल्ला क्लीनिकों का बकाया
महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा
अगर यह मंजूर नहीं हुआ, तो कुछ लोकप्रिय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
विपक्ष का रुख और टकराव की संभावना
भाजपा और कांग्रेस इस सत्र को सरकार पर हमला बोलने के मंच के रूप में इस्तेमाल करेंगी।
शासन में खामियों पर सवाल
भाजपा जल संकट, अस्पतालों में बेड की कमी और बढ़ती सांस की बीमारियों को मुद्दा बनाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, हाल में श्वसन रोगों के मामलों में 15% की बढ़ोतरी हुई है।
कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा सकती है, खासकर 10,000 शिक्षक पदों के खाली होने को लेकर।
हालिया फैसलों की जांच
शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने पर भाजपा का हमला
मेट्रो विस्तार में देरी
उपराज्यपाल (LG) और सरकार के बीच टकराव
इन मुद्दों पर सदन में तीखी बहस और संभवतः वॉकआउट भी देखने को मिल सकता है।

उपराज्यपाल की भूमिका
सत्र से पहले ही मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के बीच तबादलों और नियुक्तियों को लेकर पत्राचार हुआ है। AAP इसे प्रशासनिक बाधा बताती है, जबकि भाजपा इसे जरूरी नियंत्रण कहती है।
पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसे विवादों से सत्र बाधित भी हो सकता है।
पिछले शीतकालीन सत्रों से सबक
Delhi के शीतकालीन सत्र अक्सर छोटे और सीमित नतीजों वाले रहे हैं।
2024 सत्र: कचरा विधेयक पास, लेकिन बिजली दरों पर फैसला नहीं
2022 सत्र: प्रदूषण पर चर्चा, कुछ संशोधन पास
छोटे सत्र संकट में काम आते हैं, लेकिन बड़े सुधारों में बाधा भी बनते हैं।
नागरिकों के लिए उपयोगी सुझाव
आप सिर्फ दर्शक न रहें, बल्कि सक्रिय बनें:
Delhi विधानसभा वेबसाइट पर लाइव कार्यवाही देखें
विधेयकों की स्थिति के लिए ईमेल अलर्ट लें
MyGov जैसे प्लेटफॉर्म पर सुझाव दें
सोशल मीडिया पर #DelhiWinterSession के जरिए सवाल पूछें
इस सत्र की विरासत क्या होगी?
5 जनवरी से शुरू होने वाला Delhi विधानसभा का यह शीतकालीन सत्र या तो प्रदूषण, नगर सुधार और स्वास्थ्य पर ठोस कदमों के लिए याद किया जाएगा, या फिर केवल राजनीतिक बयानबाजी के लिए।
नजरें टिकी हैं:
क्लीन एयर एक्ट
एमसीडी सुधार
स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं के लिए बजट
Mallikarjun खर्गे का कहना है कि मोदी सरकार न तो स्वच्छ पानी दे सकी और न ही स्वच्छ हवा, जिससे जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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