Delhi धमाका जांच उजागर: फरीदाबाद की ईकोस्पोर्ट कड़ी ने कैसे पहुंचाया बमबाज के साले तक
पिछले हफ्ते Delhi में हुए भयंकर विस्फोट ने राजधानी को हिला दिया, जिसमें कई लोग घायल हुए। शुरू में यह एक सामान्य जांच लग रही थी, लेकिन एक छोटी-सी गाड़ी ने पूरे केस की दिशा बदल दी। फरीदाबाद में खड़ी एक लाल फोर्ड ईकोस्पोर्ट ने पुलिस को ऐसा सुराग दिया, जिसने सबको हैरान कर दिया — कार चलाने वाला शख्स बमबाज का सगा साला निकला। अब यह पारिवारिक रिश्ता जांच का सबसे अहम मोड़ बन चुका है।
Delhi धमाका: जांच में अहम सफलता
Delhi के भीड़भाड़ वाले बाजार में दोपहर के वक्त जोरदार धमाका हुआ। अफरा-तफरी मच गई, लोग जान बचाने को भागे। 15 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें दो की हालत गंभीर रही।
जांच दल ने जगह को घेर लिया, बम निरोधक दस्ते ने दूसरे खतरे ढूंढे। शाम तक साफ हो गया — यह हादसा नहीं, टार्गेटेड अटैक था।
रहस्यमय गाड़ी: फरीदाबाद की लाल ईकोस्पोर्ट
धमाके के कुछ दिन बाद पुलिस को फरीदाबाद में एक लाल फोर्ड ईकोस्पोर्ट संदिग्ध हालत में मिली। कार में विस्फोटक अवशेष, वायर और टाइमर जैसे सबूत मिले।
कार के नंबर प्लेट ने सीधा इशारा किया — मालिक कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि मुख्य संदिग्ध अमित सिंह का साला, राजेश कुमार था।

फॉरेंसिक जांच और सबूत
फॉरेंसिक टीम ने कार से फिंगरप्रिंट, फाइबर और विस्फोटक के निशान जुटाए। यह निशान दिल्ली धमाके में इस्तेमाल हुए बम से मेल खाते थे।
ट्रैफिक कैमरों से पता चला कि वही कार धमाके से पहले दिल्ली में घूमी थी। यह सबूत केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
साले की गिरफ्तारी और पूछताछ
राजेश कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। उसने कहा कि उसने कार “परिवार को उधार” दी थी, लेकिन बाद में माना कि वह अपने जीजा अमित सिंह के साथ एक वेयरहाउस गया था।
उसके फोन में “डिलीवरी” से जुड़ी बातचीत मिली — जो बम सामग्री ले जाने से जुड़ी लग रही है।
साजिश का नेटवर्क: रिश्तों में छिपे लिंक
इस खुलासे ने जांच एजेंसियों के सामने बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया। पाया गया कि यह कोई अकेले व्यक्ति की करतूत नहीं थी, बल्कि स्लीपर सेल का हिस्सा था — जो NCR के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं।
पैसे की सप्लाई विदेश से, छोटे ट्रांजैक्शन के ज़रिए होती रही। कई बार इन्हें स्थानीय दुकानों से नकली व्यापार के रूप में फंड मिला।
सुरक्षा एजेंसियों की चूक और पुराने अलर्ट
अमित सिंह पहले भी एजेंसियों के रडार पर था। 2020 में उसके बॉर्डर एरिया के सफर को लेकर रिपोर्ट बनी थी, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह लापरवाही अब भारी पड़ी।

सुरक्षा पर असर और NCR में अलर्ट
धमाके के बाद NCR में सुरक्षा सख्त कर दी गई है।
एयरपोर्ट और मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त स्कैनिंग
पार्किंग लॉट में रैंडम जांच
फरीदाबाद में विशेष निगरानी
इन कदमों का मकसद है – ऐसे हमलों को पहले ही रोकना।
कानूनी नतीजे: आतंकवाद में सहायता का आरोप
राजेश कुमार पर UAPA के तहत मामला दर्ज हुआ है। यह कानून आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने वालों को भी कठोर सज़ा देता है।
संभावित आरोप:
षड्यंत्र में शामिल होना
आतंकियों को सहायता देना
बम सामग्री की ढुलाई में मदद
इन अपराधों में उम्रकैद तक की सज़ा हो सकती है।

मुख्य सबक और आगे की दिशा
वाहन ट्रैकिंग सिस्टम ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।
पारिवारिक संबंधों का दुरुपयोग आतंक नेटवर्क में आम होता जा रहा है।
स्थानीय सूचना नेटवर्क यानी मोहल्ले के लोग, पुलिस के सबसे बड़े सहयोगी साबित होते हैं।
Delhi धमाके की जांच मलबे से शुरू हुई और एक परिवार के रहस्य पर खत्म हुई।
फरीदाबाद की लाल ईकोस्पोर्ट ने पूरा जाल खोल दिया — एक गाड़ी, एक रिश्ता, और एक साजिश।
यह मामला बताता है कि छोटी से छोटी जानकारी भी बड़ी घटनाओं को रोक सकती है।
अगर आपको कभी कोई संदिग्ध गाड़ी या हरकत दिखे, तो तुरंत सूचना दें।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें — यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
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