Delhi सीएम ने 4,000 ई-बसों को दिखाई हरी झंडी: सतत शहरी परिवहन की ओर एक बड़ा कदम

कल्पना कीजिए कि आप दिल्ली की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ऐसी बस में सफर कर रहे हैं जो डीज़ल के धुएँ पर नहीं, बल्कि स्वच्छ बिजली पर चलती है। 15 फरवरी 2026 को Delhi की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 4,000 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर इस कल्पना को हकीकत बना दिया। यह आयोजन उनकी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों की वर्षगांठ पर हुआ, जिसने शहर के परिवहन क्षेत्र में एक साहसिक बदलाव का संकेत दिया।

ये बसें न केवल हवा को साफ़ करेंगी, बल्कि ट्रैफिक में फँसने की झुँझलाहट भी कम करेंगी। प्रदूषण घटेगा, जो Delhi की सड़कों को लंबे समय से जकड़े हुए है। यह लेख इस ऐतिहासिक घटना, बसों की तकनीक और दिल्ली के रोज़मर्रा के जीवन पर इसके असर को विस्तार से समझाता है। आप देखेंगे कि दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की यह पहल हरित शहरों के लिए एक नया मानक कैसे स्थापित करती है।

ऐतिहासिक आयोजन: हरित बस बेड़े का शुभारंभ

हरी झंडी समारोह का विवरण और महत्व

समारोह Delhi के एक व्यस्त बस डिपो में साफ़ आसमान के नीचे आयोजित हुआ। जैसे ही मुख्यमंत्री गुप्ता ने फीता काटा और पहली बसों को रवाना किया, हॉर्न की आवाज़ों और तालियों से माहौल गूंज उठा।

यह लॉन्च सरकार के एक साल पूरे होने के मौके से जुड़ा था, जिसमें विकास कार्यों को उजागर किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे स्मॉग से परेशान नागरिकों के लिए एक वादा पूरा होने की तरह बताया। उन्होंने अपने भाषण में कहा,
“ये बसें हमारी हवा को साफ़ करेंगी और आपकी यात्रा को आसान बनाएँगी।”

कार्यक्रम में परिवहन कंपनियों और पर्यावरण संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। यह शहरी समस्याओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास का प्रतीक था। दिल्लीवासियों के लिए यह बेहतर और स्वच्छ यात्रा की उम्मीद लेकर आया।

तैनाती का पैमाना: 4,000 बसें

यह बेड़ा Delhi के पिछले प्रयासों से कहीं बड़ा है। पहले शहर में लगभग 1,000 इलेक्ट्रिक बसें थीं। अब 4,000 नई बसों के साथ कुल संख्या 5,000 से अधिक हो गई है—कुछ ही महीनों में 400% की वृद्धि।

इन बसों को शहर के सभी ज़ोन की रूटों पर चलाया जाएगा—हवाई अड्डों से लेकर बाज़ारों तक। टाटा और अशोक लेलैंड जैसी प्रमुख कंपनियों ने भारत की गर्मी और सड़कों को ध्यान में रखकर ये मॉडल सप्लाई किए हैं।

एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बसें लाने का मकसद डीज़ल बसों को तेज़ी से हटाना है। यह कदम राष्ट्रीय हरित लक्ष्यों को भी गति देता है। 2026 के मध्य तक कई रूट पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाएंगे।

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तकनीकी प्रगति: नई ई-बसों की विशेषताएँ

बैटरी तकनीक और रेंज क्षमता

इन बसों में 300 kWh क्षमता की लिथियम-आयन बैटरियाँ लगी हैं, जो एक बार चार्ज होने पर 250 किलोमीटर तक चल सकती हैं। यह दिल्ली की ट्रैफिक परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।

डिपो में लगे फास्ट चार्जर दो घंटे से कम समय में बसों को चार्ज कर देते हैं। परीक्षणों में यह साबित हुआ कि ये बसें पीक आवर्स में भी भरोसेमंद हैं।

ग्रिड से मजबूत कनेक्शन के कारण बिजली आपूर्ति स्थिर रहती है। यह तकनीक डीज़ल बसों की सीमाओं को पीछे छोड़ती है।

यात्री सुविधाएँ और पहुँच

बसों में 40 यात्रियों के बैठने की जगह और खड़े यात्रियों के लिए पर्याप्त स्पेस है। गर्मियों में राहत के लिए एयर कंडीशनिंग उपलब्ध है। लो-फ्लोर डिज़ाइन व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए आसान चढ़ाव-उतार सुनिश्चित करता है।

GPS आधारित लाइव ट्रैकिंग दिल्ली ट्रांसपोर्ट ऐप पर उपलब्ध है। सुरक्षा के लिए कैमरे और स्टॉप की जानकारी देने वाली स्क्रीन लगी हैं।

वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों के लिए रैम्प और ब्रेल संकेत मौजूद हैं।

मुख्य सुविधाएँ:

  • रियल-टाइम देरी अलर्ट

  • मोबाइल चार्जिंग के लिए USB पोर्ट

  • चौड़े गलियारे

इन सुविधाओं से रोज़ाना उपयोग और भरोसा दोनों बढ़ते हैं।

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पर्यावरण और आर्थिक प्रभाव

वायु गुणवत्ता में सुधार

इलेक्ट्रिक बसें उत्सर्जन में भारी कटौती करती हैं। हर बस डीज़ल की तुलना में 90% कम नाइट्रोजन ऑक्साइड छोड़ती है। 4,000 बसों से सालाना लगभग 50,000 टन प्रदूषण कम होगा।

भीड़भाड़ वाले इलाकों में PM2.5 स्तर 15% तक घट सकता है। इससे सांस से जुड़ी बीमारियों में 20% तक कमी आने की उम्मीद है।

जहाँ डीज़ल बसें प्रति किलोमीटर 1.2 किलोग्राम CO₂ छोड़ती हैं, वहीं ई-बसों का उत्सर्जन लगभग शून्य है।

परिचालन लागत और सब्सिडी

लंबी अवधि में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन डीज़ल बसों से 60% सस्ता पड़ता है। ईंधन और रखरखाव दोनों में बचत होती है।

केंद्र सरकार ने FAME-II योजना के तहत 40% सब्सिडी दी, बाकी राशि राज्य ने ऋण के ज़रिए जुटाई। इससे बिना कर बढ़ाए इतनी बड़ी खरीद संभव हुई।

एक बस सालाना लगभग 20,000 डॉलर की बचत करती है। इससे किराए कम रखने और रूट बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही बैटरी और EV सेक्टर में रोज़गार भी पैदा होता है।

बुनियादी ढाँचा: चार्जिंग और मेंटेनेंस

चार्जिंग नेटवर्क का विकास

डिपो में 500 फास्ट चार्जर और रूट-साइड 200 चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं। कुल 700 चार्जिंग पॉइंट पूरे बेड़े की ज़रूरतें पूरी करते हैं।

ग्रिड को अपग्रेड किया गया है और कई जगह सोलर पैनल लगाए गए हैं। पीक टाइम में भी ब्लैकआउट की समस्या नहीं होगी।

कार्यबल प्रशिक्षण और रखरखाव

ड्राइवरों को दो हफ्ते का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 2,000 से अधिक ड्राइवर प्रमाणित हो चुके हैं।

मैकेनिकों को हाई-वोल्टेज सिस्टम की ट्रेनिंग नए केंद्रों में दी जा रही है। नियमित जांच हर 10,000 किलोमीटर पर होगी।

इससे बसों का डाउनटाइम न्यूनतम रहेगा।

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2030 की ओर दिल्ली का विज़न

चरणबद्ध विस्तार योजना

पहले 1,000 बसें मार्च 2026 तक सड़कों पर आ जाएँगी। अगस्त तक पूरी 4,000 बसें चालू होंगी, जो 80% रूट कवर करेंगी।

2028 तक 2,000 और बसें जुड़ेंगी। लक्ष्य है 2030 तक सभी 10,000 बसों को इलेक्ट्रिक बनाना।

नागरिकों के लिए उपयोगी सुझाव

नीले-हरे रंग और “E-Bus” चिन्ह से इन बसों को पहचानें। लाइव रूट और समय के लिए ऐप डाउनलोड करें।

यात्रा सुझाव:

  • ऐप से शेड्यूल देखें

  • कॉन्टैक्टलेस कार्ड से भुगतान करें

  • फीडबैक देकर सेवाओं को बेहतर बनाएँ

कम इंतज़ार, साफ़ हवा—फायदा आपका है।

महानगरों के विद्युतीकरण की मिसाल

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा 4,000 ई-बसों की शुरुआत Delhi के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक पर ठोस कार्रवाई है।

यह पहल भारत में हरित परिवहन का नेतृत्व करती है। मुंबई जैसे शहर इसे ध्यान से देख रहे हैं।

अगली बार ई-बस में सफर करें—आपकी यात्रा Delhi को स्वच्छ और बेहतर बनाने में योगदान देगी। मिलकर हम 2030 के लक्ष्यों की ओर बढ़ सकते हैं।

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